दिल के जज़्बात

   

 हाथों में उठाए काग़ज़ और क़लम
लिख देते है दिल के जज़्बातों को
खुद के  ही अल्फ़ाज़ कभी पक्के ,कभी कच्चे से लगते है |

कल्पनाओ को मन के नया रूप मिलता
जी लेते है अपने उन सिमटे ख्वाबों को
भावनाओ में बहेते तरंग कभी झूठे ,कभी सच्चे से लगते है |

अक्सर निकलती वो मोहोब्बत की बातें
कभी दोहराते मजबूत ,बुलंद इरादों को
हम चाहे जो भी लफ्ज़ पिरोए,मन  को अच्छे ही लगते है |

बहुत अरमानो से सजाते और सवारते है
बेंइन्तहा चाहते है अपनी कविताओं को
जैसे हर मा को सबमें खूबसूरत अपने बच्चे ही लगते है |

19 टिप्पणियाँ

  1. Rewa said,

    फ़रवरी 10, 2008 at 11:46 पूर्वाह्न

    हाथों में उठाए काग़ज़ और क़लम
    लिख देते है दिल के जज़्बातों को
    खुद के ही अल्फ़ाज़ कभी पक्के, कभी कच्चे से लगते है |

    Beautiful lines. keep it up.

  2. mehhekk said,

    फ़रवरी 10, 2008 at 12:19 अपराह्न

    shukran rewa.

  3. फ़रवरी 10, 2008 at 12:56 अपराह्न

    बहुत अरमानो से सजाते और सवारते है
    बेंइन्तहा चाहते है अपनी कविताओं को
    जैसे हर मा को सबमें खूबसूरत अपने बच्चे ही लगते है |
    ——————————————-

    बहुत बढिया पंक्तियाँ
    दीपक भारतदीप

  4. mehhekk said,

    फ़रवरी 10, 2008 at 3:24 अपराह्न

    shukran deepakji aabhari hun .

  5. फ़रवरी 10, 2008 at 3:25 अपराह्न

    क्या बात है। महक जी बहुत अच्छे।अति सुन्दर तरीके से अति कोमल विचारो को अभिव्यक्त
    करती हुई कविता।
    कई दिन के इन्तजार का फल मीठा निकला।
    कुछ दिन आपकी नयी पोस्ट ना आने का एक फायदा हुआ हमने आपकी पिछली बहुत सारी पोस्ट पढ़ डाली।
    यकीन मनिये आप ही अपनी कविताओ को नहीं चाह्ती हम भी बे इन्तहा चाहते हैं। हम उस माँ कि तरह हैं जिसे अच्छे बच्चे अच्छे ही लगते हैं चाहे वो किसी भी माँ के हों। इससे हमें अपने बच्चों को सुधारने मे मदद ही मिलती है।
    आप लिखते रहिये हम पढ़ते रहेंगें । ये हमारा वादा है जब तक आप लिखते रहेंगें हम पढ़ते रहेंगें।

    महक जी,
    आपकी कवितायें पढ़ी, तो हमनें ये जाना
    कविताये तो आप जैसे कवि ही रचते है
    हम तो करते रहें बस तुकबन्दी
    और हद ये है कि खुद को कवि समझते हैं।

    फूल की पत्तियों पे
    ओस की बून्दों की तरह
    आपकी कविता का हर शब्द
    दिल पे बनाता है जगह

    हाँ एक दो सुझाव देना चाह्ता हूँ अगर आप गुस्ताखी ना समझें तो

  6. mehhekk said,

    फ़रवरी 10, 2008 at 3:56 अपराह्न

    shukran klal sir ji,apke sujhavon ka swagat hai.

  7. फ़रवरी 11, 2008 at 4:08 पूर्वाह्न

    एक अच्छी काव्य रचना, मंत्रमुग्ध कर दिया आपने|

  8. mehhekk said,

    फ़रवरी 11, 2008 at 6:11 पूर्वाह्न

    bahut aabhari hun nazarji

  9. keertivaidya said,

    फ़रवरी 11, 2008 at 6:33 पूर्वाह्न

    very sweat & lovley poem

  10. mehhekk said,

    फ़रवरी 11, 2008 at 6:46 पूर्वाह्न

    thanks a lot keerti

  11. hemjyo said,

    फ़रवरी 11, 2008 at 9:35 पूर्वाह्न

    बहुत अरमानो से सजाते और सवारते है
    बेंइन्तहा चाहते है अपनी कविताओं को
    जैसे हर मा को सबमें खूबसूरत अपने बच्चे ही लगते है | …. बिलकुल ठीक कहा महक जी

    अच्छी रचना के लिये मेरी तरफ से भी बधाई हो ,
    सादर
    हेम ज्योत्स्ना “दीप”

  12. मीत said,

    फ़रवरी 11, 2008 at 12:23 अपराह्न

    बहुत अरमानो से सजाते और सवारते है
    बेंइन्तहा चाहते है अपनी कविताओं को
    जैसे हर मा को सबमें खूबसूरत अपने बच्चे ही लगते है |

    बहुत बढ़िया. वाह.

  13. vikash said,

    फ़रवरी 11, 2008 at 1:50 अपराह्न

    bahut sundar🙂

  14. mehhekk said,

    फ़रवरी 11, 2008 at 3:03 अपराह्न

    hem ji,meet ji,vikash ji aap sab ki bhi tahe dil se shukrasar hun.

  15. Vinod Kumar said,

    फ़रवरी 11, 2008 at 7:49 अपराह्न

    हाथों में उठाए काग़ज़ और क़लम
    लिख देते है दिल के जज़्बातों को
    खुद के ही अल्फ़ाज़ कभी पक्के ,कभी कच्चे से लगते है |

    Bahut khoob…intazaar rahega aapki agli rahnaaon ka….

  16. mehhekk said,

    फ़रवरी 12, 2008 at 3:21 अपराह्न

    bahut aabhari hun vinodji.

  17. फ़रवरी 17, 2008 at 8:16 पूर्वाह्न

    भावनाओ मे बहते तरंग,कभी……….बहुत खूब
    विक्रम

  18. Rohit Jain said,

    फ़रवरी 27, 2008 at 5:57 पूर्वाह्न

    खुद के ही अल्फ़ाज़ कभी पक्के ,कभी कच्चे से लगते है

    very well expressed….. so true………

  19. मई 2, 2008 at 12:18 अपराह्न

    हाथों में उठाए काग़ज़ और क़लम
    लिख देते है दिल के जज़्बातों को
    खुद के ही अल्फ़ाज़ कभी पक्के ,कभी कच्चे से लगते है |
    बहुत अरमानो से सजाते और सवारते है
    बेंइन्तहा चाहते है अपनी कविताओं को
    जैसे हर मा को सबमें खूबसूरत अपने बच्चे ही लगते है |
    बहुत ही सुन्दर रचना


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