वक़्त की रफ़्तार

वक़्त की रफ़्तार

वक़्त अपनी रफ़्तार में मुझे भी ढलने दो  
मैं भी एक जर्रा हूँ तेरे लम्हे से गिरा हुआ  |
 
कितनी जल्दी है तुझे,कहाँ पहुँचना है बताओ 
तुम्हे भाग भाग कर पकड़ना नही होता मुझ से 
रुक जा कही,साँस तॉ लेलुँ ज़रा,खुद के खेल ना रचाओ 
तेरे कदमो से कदम मिला कर,कभी मुझे भी चलने दे 
 
वक़्त अपनी रफ़्तार में मुझे भी ढलने दो  
मैं भी एक क़तरा हूँ तेरे लम्हे से मिला हुआ  |
 
कभी तुम धीमे चलते हो,मेरे पीछे रहते हो 
मूड मूड कर देखती रहती हूँ तुझे,के पास आओगे 
छुप जाते हो तुम,जब मुझे किसी का इंतज़ार होता है 
ज़रूरत होगी इस दिल को तेरी,क्या तब साथ रह पाओगे 
 
वक़्त अपनी रफ़्तार में मुझे भी ढलने दो 
मैं भी एक आस हूँ तेरे लम्हे से जुड़ा हुआ  |

17 टिप्पणियाँ

  1. Rewa said,

    फ़रवरी 12, 2008 at 3:18 अपराह्न

    वक़्त अपनी रफ़्तार में मुझे भी ढलने दो
    मैं भी एक जर्रा हूँ तेरे लम्हे से गिरा हुआ!

    A very nice poem. The poem is containing in depth thinking ability….I really like the rhyme and flow it has. keep it up dear.

    wid luv.

  2. फ़रवरी 12, 2008 at 3:31 अपराह्न

    kafii kathin kavita likhane kii ek safal koshish…

  3. फ़रवरी 12, 2008 at 4:36 अपराह्न

    कभी तुम धीमे चलते हो,मेरे पीछे रहते हो
    मूड मूड कर देखती रहती हूँ तुझे,के पास आओगे
    छुप जाते हो तुम,जब मुझे किसी का इंतज़ार होता है
    ज़रूरत होगी इस दिल को तेरी,क्या तब साथ रह पाओगे

    ———————————–
    हृदय स्पर्शी
    दीपक भारतदीप

  4. mehhekk said,

    फ़रवरी 13, 2008 at 3:59 पूर्वाह्न

    hey rews thanks a lot dear

    nazar ji abhari hun

    deepak ji shukran sarahna ke liye

  5. parulk said,

    फ़रवरी 13, 2008 at 4:06 पूर्वाह्न

    सुंदर भाव

  6. mehhekk said,

    फ़रवरी 13, 2008 at 6:02 पूर्वाह्न

    shukran parulji

  7. Annapurna said,

    फ़रवरी 13, 2008 at 9:39 पूर्वाह्न

    ख़्याल अच्छा है !

  8. keerti said,

    फ़रवरी 13, 2008 at 10:45 पूर्वाह्न

    sunder rachna..

  9. malhotraklal said,

    फ़रवरी 13, 2008 at 11:59 पूर्वाह्न

    Extremely beautiful poem . Really a literary poem. Such thoughts could really come from a noble heart. My appreciations for this creation and best wishes for such beautiful outcome in future too.

  10. mehek said,

    फ़रवरी 13, 2008 at 4:59 अपराह्न

    anapurnaji,keert ji,klal sir ji aap sab ka shukran hausla efzayi ke liye.

  11. फ़रवरी 13, 2008 at 5:08 अपराह्न

    you desrve it. I swear

  12. फ़रवरी 14, 2008 at 1:54 पूर्वाह्न

    बहुत सुन्दर!!

  13. mehhekk said,

    फ़रवरी 14, 2008 at 4:47 पूर्वाह्न

    samir ji aapka tahe dil se shukran

  14. फ़रवरी 17, 2008 at 8:09 पूर्वाह्न

    सुन्दर.. मन को छू गयी
    विक्रम

  15. फ़रवरी 17, 2008 at 1:39 अपराह्न

    क्या नाम रखा जाये अपने इस नये वेबलॉग का कुछ सोच के बताये ना|

  16. Rohit Jain said,

    फ़रवरी 27, 2008 at 5:55 पूर्वाह्न

    वाह वाह क्या बात है……..

  17. limit said,

    मार्च 3, 2008 at 8:06 पूर्वाह्न

    Hi,

    beautifully composed,keepit up


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