गुलदस्ता – मोहोब्बत का(valentine)

 

गुलदस्ता – मोहोब्बत का

[1]
फ़िज़ा के रंग कुछ सवरने लगे है
हवाओं के रुख़ कुछ बदलने लगे है
सुस्त सी सर्दियों पर बिछी सूरज की रश्मि
दिल में तम्मनाओ के काफिले निकलने लगे है
मौसम में छाई है बसंती बहार
मंन में सज रहा मोहोब्बत का खुमार
पपिहरा नये गीतों से वादियाँ चहेकाना तुम 
सावरिया आए मिलन जब,ये राज़ किसे ना बताना तुम |

[2]

मोहोब्बत ये तुम्हारी हमारी
सदियों सी हो चाहे पुरानी
इतने अरसो बाद भी सजना
हम हर लम्हा बुनते नयी कहानी
बरकरार रखी है वही खुमारी
बावरी मैं हूँ तेरी दीवानी
तुम संग जो चली हूँ राहइश्क़
खुद को समझू सबसे सयानी. |

[3]

मोहोब्बत की घड़ियाँ ज़िंदगी में आए
सारी कायनात बदल ने का दस्तूर है |

इंसान को मसीहा का तसवुर दिया
इतना गहरा मोहोब्बत का सरूर है |

आस पास का सब कुछ बेमानी लगे अब
बेवक़्त उनका ख़याल दिल में हुज़ूर है |

इबादात करते है सौ बार दिन में
पाकजज़्बे पर हमे बहुत गरूर है |

नफ़रतॉ के खार दिल से रुखसत हुए सारे
इश्क़ –गुल का हम पर ये असर ज़रूर है |

[4]

खामोशियों से की कई बार कोशिश
बयान करे तुम से अपने मोहोब्बत का अफ़साना
दिलबर हुए हो जब से दिल के सरताज
महफ़िलचमन  हमे लगे और सुहाना
मिल जाते हों राहों में कभी अकेले
दो बातें कर लेते है तुझ से
की है मुश्किलें ज़रासी आसान
तेरा साथ पाने का मिला यही  बहाना. |

[5]

मोहोब्बत के सफ़र में ,कुछ पल रुक जाए
प्यार के महकते गुलाब आज फिर ले आए
चाँदनी ने की है रौशन सारी फ़िज़ाए
आफताब-ए-गवाह को भी संग बुलाए
तुम मेरी साँसों को महसूस करो दुबारा
तेरी धड़कने सुनू मैं,यूही गुज़रे वक़्त सारा
कुछ तुम कहो,कुछ हम कहे,कभी खामोश नज़ारा
पल पल मिलकर सजाए,बहेती जीवन धारा |

HAPPY VALENTINE DAY

 

17 टिप्पणियाँ

  1. Rewa said,

    फ़रवरी 14, 2008 at 4:36 पूर्वाह्न

    फ़िज़ा के रंग कुछ सवरने लगे है
    हवाओं के रुख़ कुछ बदलने लगे है
    सुस्त सी सर्दियों पर बिछी सूरज की रश्मि
    दिल में तम्मनाओ के काफिले निकलने लगे है

    Wah wah wah….bahut khoob!

    Happy valentine’s day to you too🙂

  2. Rewa said,

    फ़रवरी 14, 2008 at 4:38 पूर्वाह्न

    तुम मेरी साँसों को महसूस करो दुबारा
    तेरी धड़कने सुनू मैं, यूही गुज़रे वक़्त सारा
    कुछ तुम कहो, कुछ हम कहे, कभी खामोश नज़ारा

    yeh panktiyan mujhe sabse achhi lagi hai. keep it up dear.

  3. mehhekk said,

    फ़रवरी 14, 2008 at 4:49 पूर्वाह्न

    shukran rews,wish u happy valentine day to dear friend.

  4. फ़रवरी 14, 2008 at 6:04 पूर्वाह्न

    […] mehhekk wrote an interesting post today on à¤à¥à¤²à¤¦à¤¸à¥à¤¤à¤¾ – मà¥à¤¹à¥à¤¬à¥à¤¬à¤¤ à¤à¤¾(valentine)Here’s a quick excerptतेरी धड़कने सुनू मैं,यूही गुज़रे वक़्त सारा कुछ तुम कहो,कुछ हम कहे,कभी खामोश नज़ारा पल पल मिलकर सजाए,बहेती जीवन धारा |. HAPPY VALENTINE DAY. […]

  5. फ़रवरी 14, 2008 at 1:40 अपराह्न

    मोहोब्बत के सफ़र में ,कुछ पल रुक जाए
    प्यार के महकते गुलाब आज फिर ले आए
    चाँदनी ने की है रौशन सारी फ़िज़ाए
    आफताब-ए-गवाह को भी संग बुलाए
    तुम मेरी साँसों को महसूस करो दुबारा
    तेरी धड़कने सुनू मैं,यूही गुज़रे वक़्त सारा
    कुछ तुम कहो,कुछ हम कहे,कभी खामोश नज़ारा
    पल पल मिलकर सजाए,बहेती जीवन धारा |

    क्या बात है किसी एक का जिक्र क्योंकर करू मै
    हर एक रंग है सबसे न्यारा…बहुत सुन्दर रचनाये है…

  6. mehhekk said,

    फ़रवरी 14, 2008 at 2:01 अपराह्न

    hello kavita ji valentine day mubarak

    dr anil ji bahut shukran

    sunita ji bahut shukran aap ka bhi,sabhi o happy valentine day

  7. malhotraklal said,

    फ़रवरी 14, 2008 at 2:03 अपराह्न

    इस गुलदस्ते में काफी दिमाग लगाकर लिखी गयी कविताए हैं॥
    दिल के भाव लगभग नदारद हैं। मन पर ये कविताये प्रभाव नहीं छोड़ पायी। शब्द चयन सरल एवं विषय के अनुसार होता तो बहूत अच्छा होता।

  8. फ़रवरी 14, 2008 at 3:55 अपराह्न

    नफ़रतॉ के खार दिल से रुखसत हुए सारे
    इश्क़ -ओ-गुल का हम पर ये असर ज़रूर है |

    —————————-
    बहुत कुछ कहतीं है यह पंक्तियाँ
    दीपक भारतदीप

  9. mehhekk said,

    फ़रवरी 14, 2008 at 3:59 अपराह्न

    deepakji,klal sir ji bahut aabhari hun

  10. ajaykumarjha said,

    फ़रवरी 15, 2008 at 9:55 पूर्वाह्न

    mehek jee,
    shubh sneh, kamaal hai sab kuchh. itne khooboorat prem diwas par itnee khoobsooratee se aapne is mohabbat ke baare mein kaafee kuchh kah diya, magar bhai is din ke liye aapko fursat kahan se mil gayee . aajkal to is din ladkion ke paas waqt kahan hota hai. aapkaa blog bhee behad aakarshak hai

  11. फ़रवरी 15, 2008 at 11:28 पूर्वाह्न

    bahut khub….acha laga yahan aakar

  12. फ़रवरी 15, 2008 at 3:04 अपराह्न

    आपके प्रेममय पंक्तियों को पढ़कर मुझे मेरा एक मुक्तक याद आ गया –
    “मन में उम्मीदों की चाहत भरो ,
    डरो न किसी से , खुद से डरो ,
    यही ज़िंदगी का सही फलसफा है –
    प्यार जिससे करो डूबकर के करो !”
    आपकी अभिव्यक्ति वेहद सुंदर है , बधाईयाँ!

  13. mehhekk said,

    फ़रवरी 15, 2008 at 3:35 अपराह्न

    ajaykumar ji shukran,bhai pyar ke din par thodi fursat tho nikalni hi padegi,vaise ye blog ek din mein nahi banaya,16 din se thoda thoda saja rehe the.bahut aabhari hun aapke sneh bhari pratikriya ke liye.

    ashish ji aap ka bhi tehe dil se shukran

    ravindra ji bahut bahut shukran,bahut khubsurat alfaz hai muktak ke,sahi kaha pyar jisase karo dub kar ke karon.

  14. kishor said,

    फ़रवरी 27, 2008 at 12:07 अपराह्न

    seding


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