नयी दिशा,नयी उड़ान

जीवन का एक और पन्ना पलट गया
अगला अध्याय लेकर आया, एक और साल नया

पिछला जो अच्छा है ,उसको साथ लेकर चलना
पिछला जो बुरा था, उसको नये साल में भूलना

नये सपनों के साथ हो तेरी नयी उमंगे
जीवन डोर वही पुरानी पर उड़ाओ नयी पतंगे

करके अपना बुलंद हौसला, आगे तुम राही बढ़ना
पिछली ग़लतिया ना दोहराए, उनसे सबक सिखना

जीवन में तूफ़ानो का सामना नयी हिम्मत से करना
खुद को कर मजबूत इतना, मुश्किलो से ना डरना

जीवन है अथांग सागर , सदैव इस में बहाना है
तेरी कश्ती को साहिलोपे,तुझे खुद संभालना है

प्रेमभाव, आदर, भक्ति, विश्वास पर सदा अटल रहना
किसीको बुरा लागे कभी, कोई अपशब्द ना कहना

ख्वाहिश और कोशिश की गठरी सदा संग रखना
अब गुजरा साल बीत गया,चढनी है नयी चढ़ान

एक नये क्षितिज की और तुम्हें है उड़ना
एक नयी दिशा में लेकर एक नयी उड़ान.

http://merekavimitra.blogspot.com/2008/01/blog-post_1291.html

4 टिप्पणियाँ

  1. मार्च 10, 2008 at 6:11 पूर्वाह्न

    एक नये क्षितिज की और तुम्हें है उड़ना
    एक नयी दिशा में लेकर एक नयी उड़ान.

    –बहुत सकारात्मक भाव…बधाई/

  2. मार्च 10, 2008 at 8:20 पूर्वाह्न

    आशावाद की स्पष्ट झलक…

  3. Rewa said,

    मार्च 10, 2008 at 9:30 पूर्वाह्न

    जीवन है अथांग सागर , सदैव इस में बहाना है
    तेरी कश्ती को साहिलोपे,तुझे खुद संभालना है

    Beautiful poem!
    Khud per bharosa ho to kishti tofano se bhi lad sakti hai…..

  4. Tanu Shree said,

    मार्च 18, 2008 at 11:22 पूर्वाह्न

    जीवन है अथांग सागर , सदैव इस में बहाना है
    तेरी कश्ती को साहिलोपे,तुझे खुद संभालना है!!

    well said Mehek ji…

    Aapki kashti yu hi chalti rahe…
    Sahil to aapke intezaar me hai!!


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