कुछ यूँ ही

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1..  जब संग तुम्हारे होती हूँ सनम 
      ज़िंदगी की मंज़िले और भी करीब नज़र आती है  |

2,, ये तन्हा रहने की ज़िद्द कबसे करने लगी हो 
      नदिया को एक दिन सागर में समा जाना है.  |

3,, एक तस्वीर बनाई है तुम्हारी दिल में 
     अपने तकदीर की लकीरों से 
     इंतज़ार कर रही हूँ चित्रकार 
    तुम आओ,और प्यार के रंग भर दो  | 

4,, हम तो अजनबी थे यहाँ पर एक दिन 
      अब सब कुछ अपना सा लगने लगा है 
      आपके रंग में ऐसे रंग लिया खुद को 
      हमारे ख्वाहिशों का घर भी सजने लगा है.  |

5,,  अब दिल में बस ये तमन्ना  है बाकी 
      जाम छोड़ के मुझे साथ लेजा तू साकी  |

6,,  यादे धुंधली हो कर भुलाई जाती है वक़्त के साथ 
      किसी  की और हमारे रुख़ बदल जाते है वक़्त के साथ 
      जो कभी दिलजान से ज़्यादा अज़ीज़ हुआ करते थे 
      वो भी पराए हो जाते है  हमसे वक़्त के साथ.  |

23 टिप्पणियाँ

  1. MEET said,

    मार्च 14, 2008 at 7:26 अपराह्न

    अच्छा है बॉस.

    And aren’t you writing well ? What say ? ? Whatever ! Kinda love some of what you write these days. Keep ip up.

  2. Rewa Smriti said,

    मार्च 14, 2008 at 7:27 अपराह्न

    हम तो अजनबी थे यहाँ पर एक दिन
    अब सब कुछ अपना सा लगने लगा है
    आपके रंग में ऐसे रंग लिया खुद को
    हमारे ख्वाहिशों का घर भी सजने लगा है.

    Nice poem!

  3. मार्च 15, 2008 at 2:07 पूर्वाह्न

    अति सुन्दर रचना

  4. mehhekk said,

    मार्च 15, 2008 at 3:43 पूर्वाह्न

    meetji bahut hi shukran sarahana ke liye,hmmm:);)thanks for liking my poems,hume to apna kachha pakka alfazon ka makan hamesha pyara hi lagta hai:);).

    rews bahut bahut shukrana

    dr.anilji thanks a lot for appreciation.

  5. anurag arya said,

    मार्च 15, 2008 at 6:06 पूर्वाह्न

    एक तस्वीर बनाई है तुम्हारी दिल में
    अपने तकदीर की लकीरों से
    इंतज़ार कर रही हूँ चित्रकार
    तुम आओ,और प्यार के रंग भर दो |

    well said mahek…….

  6. मार्च 15, 2008 at 6:53 पूर्वाह्न

    इंतज़ार कर रही हूँ चित्रकार
    तुम आओ,और प्यार के रंग भर दो |

    बहुत सुन्दर

    मैने पहले भी कहा था तुम्हारी कविताओं मे साहित्य झलकता है खास कर तब जब आप मन की कोमल भावनाओ को व्यक्त करती हैं आज नहीं तो कल आपका नाम प्रसिदध कवियों/ साहित्यकारों मे होगा। बस हजूर औटोग्राफ के लिये हमें ज्यादा इन्तजार ना करवाईयेगा

  7. mehhekk said,

    मार्च 15, 2008 at 12:41 अपराह्न

    anurag ji aap ka tahe dil se shukrana

    klal sirji bahut hi shukriya,sarahana ar itni khubsurat tariffana alfazon ke liye.

  8. rasprabha said,

    मार्च 15, 2008 at 4:02 अपराह्न

    6,, यादे धुंधली हो कर भुलाई जाती है वक़्त के साथ
    किसी की और हमारे रुख़ बदल जाते है वक़्त के साथ
    जो कभी दिल-ओ-जान से ज़्यादा अज़ीज़ हुआ करते थे
    वो भी पराए हो जाते है हमसे वक़्त के साथ. |
    जीवन का यह मोड़ आ ही जाता है,सुन्दर

  9. Saraswati Prasad said,

    मार्च 15, 2008 at 4:07 अपराह्न

    ये तन्हा रहने की ज़िद्द कबसे करने लगी हो
    तन्हाई तो यूँ ही आ जाती है…
    बहुत सुन्दर लिखा है…

  10. Rashmi Prabha said,

    मार्च 15, 2008 at 4:22 अपराह्न

    6,, यादे धुंधली हो कर भुलाई जाती है वक़्त के साथ
    किसी की और हमारे रुख़ बदल जाते है वक़्त के साथ
    जो कभी दिल-ओ-जान से ज़्यादा अज़ीज़ हुआ करते थे
    वो भी पराए हो जाते है हमसे वक़्त के साथ. |
    जीवन का यह मोड़ आ ही जाता है,सुन्दर

  11. sonu7 said,

    मार्च 15, 2008 at 6:35 अपराह्न

    bahoot hi sunder hai ,

  12. mehek said,

    मार्च 15, 2008 at 7:16 अपराह्न

    rashmi ji bahut shukran ,haan ji kabhi na kabhi jeevan ka ye mood aahi jata hai bahut sahi.

    saraswati ji bahut shukriya,sach tanhaiyan khud hame dundh leti hai.,kabhi kabhi bhed mein bhi.

    sonu ji aabhari hun.

  13. मार्च 16, 2008 at 6:57 पूर्वाह्न

    सचमुच बहुत बढिया कविता , अभिव्यक्ति सुंदर और भावपूर्ण !

  14. ajaykumarjha said,

    मार्च 16, 2008 at 9:05 पूर्वाह्न

    mehhekk jee,
    saadar abhivaadan. bahut sundar lagaa padh kar hameshaa kee tarah.

  15. मार्च 16, 2008 at 11:25 पूर्वाह्न

    बहुत सुन्दर मुक्तक हैं।बधाइ।

    हम तो अजनबी थे यहाँ पर एक दिन
    अब सब कुछ अपना सा लगने लगा है
    आपके रंग में ऐसे रंग लिया खुद को
    हमारे ख्वाहिशों का घर भी सजने लगा है. |

  16. mehhekk said,

    मार्च 16, 2008 at 5:17 अपराह्न

    ravindra ji,ajayji,paramjit ji,sagar ji,aap sab ki bahut abhari hun,thanks.

  17. मार्च 16, 2008 at 5:25 अपराह्न

    badhiya mehek ji…. aise hi likhte rahiye.

  18. kuldeep said,

    मार्च 17, 2008 at 12:59 पूर्वाह्न

    “यादे धुंधली हो कर भुलाई जाती है वक़्त के साथ
    किसी की और हमारे रुख़ बदल जाते है वक़्त के साथ
    जो कभी दिल-ओ-जान से ज़्यादा अज़ीज़ हुआ करते थे
    वो भी पराए हो जाते है हमसे वक़्त के साथ. |”

    bahut hi achchha and molik hai

    kya yaaden sirf bhoolane ki liye hoti hai
    kaise kuchh log aasani se sab bhool jate hai
    pata nahi , par

    एक वक्त था जब वक्त कटता नही था उनकी याद आने के बाद
    एक वक्त है आज, जब वक्त कट जाता है उनकी याद आने के बाद
    ता उम्र कोशिश रही भूल जाऊँ उसे
    वक्त के फासले भी न मिटा सके उसकी याद
    उस के चले जाने के बाद

    वक्त और यादें कुछ ऐसी डोर से बंधे
    कि जैसे जैसे भूलने की कोशिश की
    वक्त कटता ही चला गया
    इस नादान हरकत मे
    यादें और जवान होती रही
    ता उम्र ये कोशिश जारी रही
    यादें थी कि आज भी उतनी हसीं थी

  19. mehhekk said,

    मार्च 17, 2008 at 4:53 पूर्वाह्न

    tanha ji aap ka shukran

    kuldeepji shukrana sarahana aur waqt aur yaad ki ek sundar kavita ke liye bhi.

  20. Tanu Shree said,

    मार्च 18, 2008 at 11:17 पूर्वाह्न

    एक तस्वीर बनाई है तुम्हारी दिल में
    अपने तकदीर की लकीरों से
    इंतज़ार कर रही हूँ चित्रकार
    तुम आओ,और प्यार के रंग भर दो!!!

    beautiful creation mehek….
    MEHEK ,As ur name sounds ur beautiful feelings sound as well…

  21. मार्च 19, 2008 at 11:16 पूर्वाह्न

    Dear,
    I dont no how to write in hindi here but your creation is awesome, we even cant imagine and you wrote your imagination here, its great writing🙂 Keep writing, we all love it 🙂

  22. google cash said,

    मई 1, 2009 at 5:34 अपराह्न

    hey i have seen that every one write with heart so i like this and i will also try to write in hindi so from tommarow you can see me to writing in own language and will all will be happy


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