आयो होली को त्योहार

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आयो होली को त्योहार 
  बिखरी फागुन की बहार 
मनवा झूमे हमार 
चढ़ता मस्ती का खुमार 
ढोल मंजीरे ढ़म ढ़म 
पैंजनियों की छम छम 
पाव खुदई लेत थिरकन 
नब्ज़ नब्ज़ बढ़े धड़कन 
होली होय हर आँगना मा शोर 
उमड़ा जोश से चारों और 
सात रंगो की बौछार 
अंबर सज गयो अबीर गुलाल 
मदहोस नाचत फाग
म्हारा जिया लगायो आग 
अब के  हमका भी खेलन की होरी 
सैय्या जी से करें की जोराज़ोरी
छिपयके उका रंग मा है रंगाना 
लागत के ये होये की अब ना 
के हम आ गये पिहड़ 
ढोलना रह गयो ससुराल 

 ye niche wali panktiyan mirabai ki rachana hai.

श्याम पिया मोरी रंग दे चुनरिया
ऐसी रंग दे के रंग नाही छूटे
धोबिया धोए ये चाहे सारी उमरिया
लाल  रंगाउँ मैं,हरी  रंगाउँ मैं
अपने ही रंग में रंग दे चुनरिया
बिना रंगाये मैं तो घर नही जाउंगी
बीत ही जाए चाहे ये सारी उमरिया |
                              –मीराबाई 

20 टिप्पणियाँ

  1. paramjitbali said,

    मार्च 21, 2008 at 4:11 अपराह्न

    महक जी,आप की रचना बहुत सुन्दर है।मीरा जी,का भजन भी बहुत अच्छा ्प्रेषित किया है। आप को होली की बधाई।

  2. Rewa Smriti said,

    मार्च 21, 2008 at 4:42 अपराह्न

    Lovely one! Aapne jo meerabai ki bhajan dali hai use gaya hai shai roop mein Anup jalotaji ne….I guess u must have heared it in his voice!

  3. mehhekk said,

    मार्च 21, 2008 at 5:14 अपराह्न

    paramjit ji bahut bahut shukriya,holi ki bahut badhai

    rews holi bahut mubarak,ji haa sune hai,aaj yuhi yaad aagaye so likh di yaha.

  4. Ila said,

    मार्च 21, 2008 at 6:13 अपराह्न

    मह्कजी, आप को होली की ढेर सारी शुभकामनायें.आपकी कविता तन और मन दोनों को भिगा गई.मेरे ब्लौग्स पर आकर पोस्ट्स पर कमेन्ट्स देने के लिये आप का धन्यवाद.आपकी सलाह पर मैने comment verification का लफ़डा खत्म कर दिया है.अभी ब्लोग जगत में नयी हूं ना? सीखने में वक्त लगेगा,फ़िर भी आप लोगों के मार्ग दर्शन से आगे बढने की कोशिश करूंगी.

  5. mehhekk said,

    मार्च 21, 2008 at 6:17 अपराह्न

    ila ji,bahut bahut shukriya,aapko bhi holi mubarak,aapne hamari baat mani iske liye bahut thank u.even oneday i was new:):),all fellow bloggers r very helpful.

  6. मार्च 21, 2008 at 7:45 अपराह्न

    सुन्दर! होली मुबारक हो ।
    घुघूती बासूती

  7. mehhekk said,

    मार्च 22, 2008 at 2:37 अपराह्न

    ghughuti ji shukran,holi mubarak

  8. Menka said,

    मार्च 23, 2008 at 2:53 पूर्वाह्न

    Sachh me kavita padhh kar holi ke rangon me mai rang gayi.
    Holi ki subhkamnaye

  9. मार्च 23, 2008 at 2:54 पूर्वाह्न

    महक होली आपको बहुत-बहुत मुबारक हो…बहुत सुन्दर रचना है…मीरा बाई तो अनेको बार सुन चुके है मगर आज भी अच्छी लगी…:)

  10. ritu bansal said,

    मार्च 23, 2008 at 7:26 पूर्वाह्न

    महक जी
    बाहुत सुन्दर लिखा है। साथ में मीरा का पद पढ़कर आनन्द आगया। वाह!

  11. ammaishere said,

    मार्च 24, 2008 at 7:12 पूर्वाह्न

    holi ka sajiv varnan…….
    bahut khubsurat
    tumse milna chahungi…….kyonki tumhari pasand se
    rishta banta hai
    meera ka chand bade karine se daala

  12. anurag arya said,

    मार्च 24, 2008 at 7:31 पूर्वाह्न

    bhai vah ..holi ka khumaar ab tak jari hai…aap sachmuch is tyohaar ko jee rahi hai…badhayi.

  13. mehhekk said,

    मार्च 25, 2008 at 5:53 पूर्वाह्न

    menka ji,sunita ji,rachna ji,ritu ji,wish all u had nice time on holi,sarahana ke liye bahut shukran.

    amma ji aur anuraj ji holi bahut pasnad hai hume,kaabhi mauka hua jarur milenge amma ji aapse,tahe dil se shukrana.

  14. ami said,

    मार्च 25, 2008 at 1:42 अपराह्न

    Happy beltaed holi🙂

  15. ami said,

    मार्च 25, 2008 at 1:42 अपराह्न

    Asha hai ki holi ke rang abhi bhi kayam honge

  16. mehhekk said,

    मार्च 26, 2008 at 3:55 अपराह्न

    happy holi ami ji belated hi sahi,ji haan rang hamesha saath hote hai zindagi mein,holi ke ek dam gadhe:)

  17. vinod said,

    मार्च 9, 2009 at 10:57 पूर्वाह्न

    आयो होली को त्योहार
    बिखरी फागुन की बहार
    मनवा झूमे हमार
    चढ़ता मस्ती का खुमार
    ढोल मंजीरे ढ़म ढ़म
    पैंजनियों की छम छम
    पाव खुदई लेत थिरकन
    नब्ज़ नब्ज़ बढ़े धड़कन
    होली होय हर आँगना मा शोर
    उमड़ा जोश से चारों और
    सात रंगो की बौछार
    अंबर सज गयो अबीर गुलाल
    मदहोस नाचत फाग
    म्हारा जिया लगायो आग
    अब के हमका भी खेलन की होरी
    सैय्या जी से करें की जोराज़ोरी
    छिपयके उका रंग मा है रंगाना
    लागत के ये होये की अब ना
    के हम आ गये पिहड़
    ढोलना रह गयो ससुराल

    श्याम पिया मोरी रंग दे चुनरिया
    ऐसी रंग दे के रंग नाही छूटे
    धोबिया धोए ये चाहे सारी उमरिया
    लाल न रंगाउँ मैं,हरी न रंगाउँ मैं
    अपने ही रंग में रंग दे चुनरिया
    बिना रंगाये मैं तो घर नही जाउंगी
    बीत ही जाए चाहे ये सारी उमरिया |
    -मीराबाई

  18. keerthana said,

    दिसम्बर 26, 2012 at 2:30 अपराह्न

    wow ! i’m happy that while i was searching for lok geets this blog really has helped me by saving me from my mam’s beatings !……………………..wooooooooooooooooow i’m happy

  19. keerthana said,

    दिसम्बर 26, 2012 at 2:30 अपराह्न

    i see


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