कौन हो नूरे-जिगर

कौन हो नूरेजिगर कोई मोह्पाश हो
हकते दिल में खिला प्यार पलाश हो |

खीची चली आती हूँ उसी मकाम पर
मुश्किल से मिलती वो बूँद आस हो |

शाहेसमंदर कब का रीता हो चुका
बुझती ही नही कभी अजीब प्यास हो |

तुमसे दूर जाउँ ये ख़याल सितम ढाए
जिस में जकड़ना चाहूं एसे बन्द्पाश हो |

जमाने से छुपाना और जताना भी है
नवाजिश करूँ सब से हसीन राज हो |

परदा उठाओ अब,के बेसब्र दिल हुआ
या पलकों में सजता बस ख्वाब हो. |

15 टिप्पणियाँ

  1. Annapurna said,

    मार्च 27, 2008 at 5:35 पूर्वाह्न

    बहुत खूब !

  2. Rewa said,

    मार्च 27, 2008 at 6:15 पूर्वाह्न

    शाहे-समंदर कब का रीता हो चुका
    बुझती ही नही कभी अजीब प्यास हो |

    Bahut sunder Mehek. I found this stanza having deepest feelings!

    rgds.

  3. मार्च 27, 2008 at 6:30 पूर्वाह्न

    जमाने से छुपाना और जताना भी है
    नवाजिश करूँ सब से हसीन राज हो |

    bahut badhiya

  4. मार्च 27, 2008 at 6:44 पूर्वाह्न

    वाह!! बहुत बढ़िया.

  5. rasprabha said,

    मार्च 27, 2008 at 1:42 अपराह्न

    शाहे-समंदर कब का रीता हो चुका
    बुझती ही नही कभी अजीब प्यास हो |……..इस अजीब सी प्यास का क्या कहना-
    बहुत ही अच्छी.

  6. मार्च 27, 2008 at 3:15 अपराह्न

    mehek jee,
    achha likhaa apne . ab wapas aa gaya hoon to aataa rahoongaa.

  7. मार्च 27, 2008 at 5:33 अपराह्न

    जमाने से छुपाना और जताना भी है
    नवाजिश करूँ सब से हसीन राज हो |
    क्या बात है छुपाना भी और जताना भी…बहुत सुन्दर!

  8. mehhekk said,

    मार्च 27, 2008 at 6:29 अपराह्न

    annapurnaji,rews,mishra ji,samirlal ji,rashmi ji,ajay ji sunitaji aap sab ka tahe dil se shukrana

  9. मार्च 28, 2008 at 6:25 पूर्वाह्न

    idhr aaya to achchha lga aur dukh hua ki ab tk kyon nhi aaya, idhr to mje se ummar bhi gujari ja sakti hai….aitraj n ho to aata rhunga…aapke posts bahut bhaye…..

  10. ila said,

    मार्च 28, 2008 at 7:59 पूर्वाह्न

    शाहे-समंदर कब का रीता हो चुका
    बुझती ही नही कभी अजीब प्यास हो |

    जमाने से छुपाना और जताना भी है
    नवाजिश करूँ सब से हसीन राज हो |

    वाह महक, क्या समां बांधा है? अजब:गज़ब !!

  11. mehhekk said,

    मार्च 28, 2008 at 2:53 अपराह्न

    hare prakashji shukriya,aapka saidaiv swagat hai hamare blog par.sneh kayam rakhen.

    ila ji thank u very much,ap ka aur hamara sama ban gaya hai ab:)

  12. Tosha said,

    मार्च 28, 2008 at 5:37 अपराह्न

    Bahut hi accha likha hai aap ne:)

  13. anurag arya said,

    मार्च 29, 2008 at 6:48 पूर्वाह्न

    जमाने से छुपाना और जताना भी है
    नवाजिश करूँ सब से हसीन राज हो |
    bahut badhiya sher laga aor boond vala bhi……..

  14. Tanu Shree said,

    मार्च 30, 2008 at 6:02 अपराह्न

    तुमसे दूर जाउँ ये ख़याल सितम ढाए
    जिस में जकड़ना चाहूं एसे बन्द्पाश हो |

    जमाने से छुपाना और जताना भी है
    नवाजिश करूँ सब से हसीन राज हो |

    lovely mehek….
    aapke alfaaz bahut hi khubsurat hai Mehek ji…
    Keep on sharing!!
    Luv

  15. arsh said,

    अगस्त 19, 2008 at 4:49 अपराह्न

    जमाने से छुपाना और जताना भी है
    नवाजिश करूँ सब से हसीन राज हो |

    umda rachana hai badhai…..

    regards
    Arsh


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