समय भागता रहा

त्रिवेणी

1.समय भागता रहा अपनी रफ़्तार से
कुछ पाने की जिद्द थी मैं भी भागती रही
खुद को ही बहुत अजनबी महसूस कर रही हूँ 

2.हाथियों जितनी बड़ी खुरसियाँ बना कर
निरक्षर नेता बैठे उस पर
और पूरे देश का झूलुस निकालते है

3.टेबल के उपर फाइल का ढेर
टेबल के नीचे हाथों का हेर फेर
मिलकर रिश्वत का पेड़ लगा रहे है

4.मिलावट भरा राशन का सामान  खरीदा
कुछ छूटे पैसे ज़्यादा मिले लौटाए नही वापस
थोड़ी बेईमानी हमने भी सिख ली है ज़माने से

5.पैसों का ढेर लगाओ मंदिर के द्वारे
सबसे पहले दर्शन हो गये हमारे
 भगवान के पास भी वक़्त की कमी है

11 टिप्पणियाँ

  1. मार्च 29, 2008 at 7:36 पूर्वाह्न

    पैसों का ढेर लगाओ मंदिर के द्वारे
    सबसे पहले दर्शन हो गये हमारे
    भगवान के पास भी वक़्त की कमी है
    अरे किस किस जुमले की तरीफ़ करए, हमे तो सभी पंसद आये,बहुत खुब

  2. ila said,

    मार्च 29, 2008 at 8:17 पूर्वाह्न

    Such an apt description of current state of affairs in our country.Wonderful.

  3. rasprabha said,

    मार्च 29, 2008 at 9:13 पूर्वाह्न

    1.समय भागता रहा अपनी रफ़्तार से
    कुछ पाने की जिद्द थी मैं भी भागती रही
    खुद को ही बहुत अजनबी महसूस कर रही हूँ………

    zid me bhagta hai mann dur tak………bahut achhi lagi ye baat

  4. mamta said,

    मार्च 29, 2008 at 9:17 पूर्वाह्न

    सटीक ।
    हर लाइन आज के भारत की तस्वीर दिखाती हुई।

  5. abrar ahmad said,

    मार्च 29, 2008 at 10:53 पूर्वाह्न

    बहुत खूब। महक जी समाज की वर्तमान स्थिति पर आपकी कलम भारी है। अच्छा लगा। लिखते रहिए।

  6. MEET said,

    मार्च 29, 2008 at 10:55 पूर्वाह्न

    बढ़िया है.

  7. मार्च 29, 2008 at 2:40 अपराह्न

    सभी बेहतरीन!! पंच में पेनापन है…बधाई.

  8. मार्च 29, 2008 at 3:38 अपराह्न

    एक से बढ़कर एक ….बेहतरीन अभिव्यक्ति !

  9. mehhekk said,

    मार्च 30, 2008 at 4:45 पूर्वाह्न

    raj ji,ila ji,rashmiji,mamtaji,abrarji,meetji,samir lalji,ravindraji aap sab ka tahe dil se shukrana.

  10. मार्च 30, 2008 at 10:06 पूर्वाह्न

    टेबल के उपर फाइल का ढेर
    टेबल के नीचे हाथों का हेर फेर
    मिलकर रिश्वत का पेड़ लगा रहे है

    ghoos do to museebat,
    aur na do to museebat
    aadamee jaaye to jaaye kahaan…

  11. Rewa Smriti said,

    मार्च 30, 2008 at 3:06 अपराह्न

    पैसों का ढेर लगाओ मंदिर के द्वारे
    सबसे पहले दर्शन हो गये हमारे
    भगवान के पास भी वक़्त की कमी है

    Nice one. But, ab to log bhagwan ko mandir mein nahi paison mein dekhte hein😉


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