लफ़्ज़ों का सज़ा कर नगमा

त्रिवेणी

1.लफ़्ज़ों का सज़ा कर नगमा हालदिल सुनाया
उनके लबों की मुस्कान देख समझे हमने उन्हे मनाया
वाह वाह कह वो निकल गये हमे ग़लत फ़हमी हुई बताया

2.जाम हाथों में लिए वो पीते रहे रात भर
उनके साथ साथ हम भी नशे में है
निगाहों से पिलाने का यही असर होता है

3. ख्वाबो के पर लगा कर उड़ान भरली
ठिकाना तेरा ढूँढ ने में बड़ी देर कर दी
अब तो ना ज़मीन के रहे ना आसमान के.

4.दीवाना दिल मेरा जानता ही नही
तुझे मोहोब्बत नही हमसे ये  मानता ही नही
इसको क्या सज़ा दूं तुम ही तय कर लो.

5.चाँद रोज तुम खिड़की से क्यूँ  झाकते हो
साजन संग प्रीत छेड़ू तब क्यूँ निकलते हो
छुपने का इशारा  समझो इतने नादान तो नही हो
.  

7 टिप्पणियाँ

  1. anurag arya said,

    मार्च 29, 2008 at 6:47 पूर्वाह्न

    vichar bahut khoob hai par triveni ko thoda refine karne ki jarurat hai….kisi din on line milengi to discuss karege.

  2. mehhekk said,

    मार्च 29, 2008 at 6:53 पूर्वाह्न

    shukriya anurag ji,aap ka dekh kar likhne ki lalsa huyi,aakhari vale ulte passe jame nahi,ye kami hume bhi zamajh gayi,shuruwat hai,aap jaise guru ho jarur sikh lenge,agar aap yahi kuch udharan ke tour par isi mein pher karke bata de hame badi khushi hogi.

  3. मार्च 29, 2008 at 7:34 पूर्वाह्न

    चाँद रोज तुम खिड़की से क्यूँ झाकते हो
    साजन संग प्रीत छेड़ू तब क्यूँ निकलते हो
    छुपने का इशारा न समझो इतने नादान तो नही हो.
    महक हमेशा की तरह से आज भी बहुत खुब सुरत कविता कही, यह कम्बख्त चांद भी जान बुझ कर अन्जान बन जाता हे.

  4. rasprabha said,

    मार्च 29, 2008 at 9:15 पूर्वाह्न

    pyaar se bheege palon ka khubsurat izhaar……..

    yun lagta hai kalam me pyaar bhar liya hai

  5. मार्च 30, 2008 at 7:24 पूर्वाह्न

    बहुत बढ़िया .. हमेशा की तरह🙂

  6. Rewa Smriti said,

    मार्च 30, 2008 at 3:03 अपराह्न

    4.दीवाना दिल मेरा जानता ही नही
    तुझे मोहोब्बत नही हमसे ये मानता ही नही
    इसको क्या सज़ा दूं तुम ही तय कर लो.

    Hmmm…nice one. Abhi to mera dil filhal yahi kah raha hai….Dil to hai dil, dil ka etbar kya kije…..🙂

  7. Tarun said,

    अप्रैल 1, 2008 at 6:49 अपराह्न

    दीवाना दिल मेरा जानता ही नही
    तुझे मोहोब्बत नही हमसे ये मानता ही नही
    इसको क्या सज़ा दूं तुम ही तय कर लो.

    awesome

    -tarun


एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: