इत्तेफ़ाक

इत्तेफ़ाक

उन्ही लम्हों का तोहफा दिया जिन्हे हम दफ़ना चुके थे
    ख़ुदारा  कसम से,तेरे ये इत्तेफ़ाक भी बड़े अजीब होते है |

. बहका है मौसम लेकर अंगड़ाई,उसपर चुभती ये तन्हाई
    काश हक़ीक़त में तेरे आने का खूबसूरत इत्तेफ़ाक हो जाए |

6 टिप्पणियाँ

  1. anurag arya said,

    अप्रैल 7, 2008 at 2:52 अपराह्न

    ये इत्तेफाक भी बड़े खूबसूरत होते ही है ना?

  2. Rewa Smriti said,

    अप्रैल 7, 2008 at 3:01 अपराह्न

    बहका है मौसम लेकर अंगड़ाई,उसपर चुभती ये तन्हाई
    काश हक़ीक़त में तेरे आने का खूबसूरत इत्तेफ़ाक हो जाए |

    wah wah wah…..kya khoob hai kaha!
    mehek, zindagi bhi ek ittefaaq hi hai!

  3. mehhekk said,

    अप्रैल 7, 2008 at 3:13 अपराह्न

    anurag ji shukrana,haanji kuch ittefaak bade khubsurat hote hai:);)

    rews shukrana hmmm zindagi bhi bhi ek ittefaak hi hai bahut sahi:):)

  4. अप्रैल 7, 2008 at 4:12 अपराह्न

    ख़ुदारा कसम से,तेरे ये इत्तेफ़ाक भी बड़े अजीब होते है | सच मे ये इत्तेफ़ाक भी बड़े अजीब होते है बहुत खुब लिख हे आप ने

  5. mehhekk said,

    अप्रैल 7, 2008 at 5:58 अपराह्न

    raj ji shukriya

  6. अप्रैल 10, 2008 at 5:22 अपराह्न

    . बहका है मौसम लेकर अंगड़ाई,उसपर चुभती ये तन्हाई
    काश हक़ीक़त में तेरे आने का खूबसूरत इत्तेफ़ाक हो जाए |
    इस खूबसूरत इत्तेफ़ाक का इन्तजार सभी को रहता हॆ किसी के जीवन मे आता हॆ किसी के लिये ये इत्तेफ़ाक सपना बन जाता हॆ . सुन्दर रचना


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