मृगतृष्णा

कभी ख़त्म ना होनेवाला रेगिस्तान हो जैसे
अक्सर हमे जीवन के पल प्रतीत होते है ऐसे
उँचे तूफ़ानो के बवंडर ,दिल को झेले ना जाए
पराकाष्ठा हो प्रयत्नो की,पर वो थम ना पाए

रेत के नन्हे से कन हवाओ में उड़ते रहते है
हाथों पर ,पैरो पर,गालों पर ,होठों और नयनो पे
एक जुट होकर,सिमटकर, चिपक के बैठे रहते है
कोलाहल,अंतरंग शोर, मचा देते है छोटे से मन में

मन के पूरे बल से तूफ़ानो का सामना करना
अपनी दिशा कौनसी,किस और ये ग्यात करना
रेत के टीलो को बनाकर सहारा कभी लेना आराम
नयी उमीद की किरण दिखला जाए जरा सा विराम

चलते रहना हमेशा उस चमकीली ज़मीन की और
मृगतृष्णा हरा चाहे हो धोखा मगर जगाता एक आस
बरसात होगी तपती रेत पर , स्वप्न नज़र आए साथ
मंज़िल तक पहुँच जाएँगे,बुझेगी तकलीफ़ों की प्यास .

http://merekavimitra.blogspot.com/2008/02/blog-post_7282.html#mahak

7 टिप्पणियाँ

  1. malhotraklal said,

    अप्रैल 13, 2008 at 4:53 पूर्वाह्न

    मृगतृष्णा हरा चाहे हो धोखा मगर जगाता एक आस
    बरसात होगी तपती रेत पर , स्वप्न नज़र आए साथ
    मंज़िल तक पहुँच जाएँगे,बुझेगी तकलीफ़ों की प्यास .

    A new dimension has been provided to mirage where one can find his manjil
    ( say water ) even in mirage if he walks continuously towards that उस चमकीली ज़मीन की और Let us try . But sorry madam , my experience has made me to think that

    मृगतृष्णा के पीछे दौड़ा तो दौड़ दौड़ मर जायेगा
    पानी तो वहाँ मिलना ही नहीँ नाहक ही जान गँवानी है

    It is better to realize the reality as early as possible and earlier the better

  2. अप्रैल 13, 2008 at 5:39 पूर्वाह्न

    बहुत बढ़िया है

  3. अप्रैल 13, 2008 at 6:17 पूर्वाह्न

    आशावाद जीवन को सरल और सहज बना देता है. बहुत सुन्दर रचना

  4. mehhekk said,

    अप्रैल 13, 2008 at 9:21 पूर्वाह्न

    klal sir ji shukriya,ye to apna apna nazariya hai zindagi ki aur dekhne ka,hame aashavad achha lagta hai:)

    mishra ji bahut shukrana

    meenakshi ji,shukriya,sahi aasha jeevan ko saral bana deti hai,varna to kai gum hai zamane ke kuch kismat ke diye.

  5. rasprabha said,

    अप्रैल 13, 2008 at 3:58 अपराह्न

    चलते रहना हमेशा उस चमकीली ज़मीन की और
    मृगतृष्णा हरा चाहे हो धोखा मगर जगाता एक आस
    बरसात होगी तपती रेत पर , स्वप्न नज़र आए साथ
    मंज़िल तक पहुँच जाएँगे,बुझेगी तकलीफ़ों की प्यास ………..

    हाँ होगा ऐसा,जब है अन्दर विश्वास,
    परी बनूंगी मैं तेरी,
    आना मेरे पास-
    सच कहती हूँ,
    छड़ी घुमाकर,
    पूरी कर दूंगी हर बात……..

  6. Rewa Smriti said,

    अप्रैल 13, 2008 at 4:02 अपराह्न

    रेत के नन्हे से कन हवाओ में उड़ते रहते है
    हाथों पर ,पैरो पर,गालों पर ,होठों और नयनो पे
    एक जुट होकर,सिमटकर, चिपक के बैठे रहते है
    कोलाहल,अंतरंग शोर, मचा देते है छोटे से मन में

    Bahut sahi likha hai aapne…..U know mehek yest i had an official party nd went to some sea beach resort and wahan dhul se kafi kheli…..and till night 11pm I played wid ret. Chand, sagar ki lahren, sabhi mere sath the.

  7. mehhekk said,

    अप्रैल 14, 2008 at 3:04 पूर्वाह्न

    rashmi ji shukrana,aap hamari pari hi to ho,jarur jab hame jarurat hogi apni pari se mangne aa pahudhenge;):)

    rews thanks dear,so cool and nice ur enjoyed the beach,leherein,chand:):) hamare chand ke saath rews aur wo bhi beach par?hame dyan rakhna hoga chand par:);)


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