हाल-ए-दिल

हालदिल बयान कर रहे थे जब हम अपना
पाकमोहोब्बत है तुमसे ये मान लिया होता |
किसी भी हद्द से गुजर जाने का जुनून सवार
दावा सच्चा है हमारा कोई इम्तेहान लिया होता |
तेरे आने से पूरे हुए बहुत से अरमान हमारे
कितने रह गये बाकी ये जान लिया होता |
दिल में कभी  जगती वो तन्हाई की हसरत
भीड़ में गर तुमने हमे पहचान लिया होता |
 

 

 

 

13 टिप्पणियाँ

  1. DR. CHANDRAKUMAR JAIN said,

    अप्रैल 17, 2008 at 6:21 पूर्वाह्न

    पाक मोहब्बत की
    भीड़ में अलग पहचान
    कायम करती संवेदनशील प्रस्तुति.

  2. amitabh said,

    अप्रैल 17, 2008 at 6:34 पूर्वाह्न

    दिल में कभी न जगती वो तन्हाई की हसरत
    भीड़ में गर तुमने हमे पहचान लिया होता |

    very nice !!

  3. अप्रैल 17, 2008 at 8:02 पूर्वाह्न

    वाह!! बहुत खूब!!

  4. Rewa Smriti said,

    अप्रैल 17, 2008 at 9:36 पूर्वाह्न

    दिल में कभी न जगती वो तन्हाई की हसरत
    भीड़ में गर तुमने हमे पहचान लिया होता |

    kitne ajib riste hein yahan per……🙂

  5. kmuskan said,

    अप्रैल 17, 2008 at 11:07 पूर्वाह्न

    भीड़ में गर तुमने हमे पहचान लिया होता |
    bahut aacha likha hai………

  6. shubhashishpandey said,

    अप्रैल 17, 2008 at 11:33 पूर्वाह्न

    wah akhiri ki do line to sach me bahut umda hai

  7. mehek said,

    अप्रैल 17, 2008 at 2:12 अपराह्न

    aap sabhi ka tahe dil se shukrana

  8. malhotraklal said,

    अप्रैल 18, 2008 at 5:51 पूर्वाह्न

    भीड़ में गर तुमने हमे पहचान लिया होता

    achchhe shabd achchhe bhav achhii kavita

  9. anurag arya said,

    अप्रैल 18, 2008 at 2:46 अपराह्न

    दिल में कभी न जगती वो तन्हाई की हसरत
    भीड़ में गर तुमने हमे पहचान लिया होता |

    goya ki ….javaab nahi.

  10. mehhekk said,

    अप्रैल 18, 2008 at 5:31 अपराह्न

    klal ji,anuragji aabhari hun

  11. shivam rai said,

    अगस्त 10, 2008 at 5:14 पूर्वाह्न

    aap ki likhawat bahut he achha hai mujhe padhakaer bahut majja aaya

    shivam rai

    pune

  12. makrand said,

    अक्टूबर 24, 2008 at 8:11 पूर्वाह्न

    दिल में कभी न जगती वो तन्हाई की हसरत
    भीड़ में गर तुमने हमे पहचान लिया होता |
    great composition

  13. chandan said,

    मई 10, 2009 at 6:13 अपराह्न

    बहुत ख़ूब, आपने तो तन्हा दिल वालों को तो बेचैन कर दिया……….
    माशा अल्ला………….


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