मनीप्लांट

 

मनीप्लांट

ख्वाहिशो की
पारदर्शक बोतल को
ख्वाबों के पानी से भर दिया
उम्मीद का एक
हरा पत्ता जड़ दिया

आकांक्षाओ का मनीप्लांट
देखो कैसे ल़हेरा रहा
उँचा उँचा चढ़ेगा
जिधर राह मिल जाए

सब देखेंगे उसको
बढ़ते हुए
वाह वाह होगी

जड़ों में अटकी हुई
रिश्तों की
सौंधी मिटटी को
पानी में घोल दिया
खुद से दूर……..

12 टिप्पणियाँ

  1. Ajay said,

    अप्रैल 23, 2008 at 5:21 पूर्वाह्न

    ye kavita bahut achi hai

  2. Annapurna said,

    अप्रैल 23, 2008 at 6:14 पूर्वाह्न

    मनीप्लांट धीरे-धीरे बढता है और उसमें फूल नहीं लगते। आपने बिना सुगन्ध के जीवन की कल्पना कर ली।

  3. mamta said,

    अप्रैल 23, 2008 at 7:03 पूर्वाह्न

    अति सुन्दर ।

  4. kush said,

    अप्रैल 23, 2008 at 7:28 पूर्वाह्न

    ख्याल की मासूमियत को मेरा सलाम!

  5. shubhashishpandey said,

    अप्रैल 23, 2008 at 9:08 पूर्वाह्न

    sunder, shayd money plant ke paudhe ki jad hum me se jyada tar ke bachpan se he judi hui hai.
    vo doosro ke yahan se ek daal tod ke le aana aur ek botal me pani bhar ke daal dena aur har din dekhna ki aaj kitna bada hau🙂
    sach me ek dum bachpan yaad aagaya

  6. anurag arya said,

    अप्रैल 23, 2008 at 1:41 अपराह्न

    ख्वाहिशो की
    पारदर्शक बोतल को
    ख्वाबों के पानी से भर दिया
    उम्मीद का एक
    हरा पत्ता जड़ दिया

    अब तक आपको पढता हुआ आया हूँ ,पर ये कविता बेहद सुंदर लगी ,शायद आपकी one ऑफ़ the बेस्ट मे शामिल होने जैसी .

  7. Rewa Smriti said,

    अप्रैल 23, 2008 at 1:42 अपराह्न

    जड़ों में अटकी हुई
    रिश्तों की
    सौंधी मिटटी को
    पानी में घोल दिया
    खुद से दूर……..

    Hmmm….hath chute bhi to riste nahi chuta karte🙂

  8. mehhekk said,

    अप्रैल 23, 2008 at 5:56 अपराह्न

    aap sabhi ka tahe dil se shukrana.

  9. अप्रैल 24, 2008 at 7:13 अपराह्न

    जड़ों में अटकी हुई
    रिश्तों की
    सौंधी मिटटी को
    पानी में घोल दिया
    खुद से दूर…….. महक जी बहुत पसंद आई आपकी यह कविता . रिश्तो के बिना आकांक्षाओ
    की पूर्ति का प्रयास खुद से दूर होने जॆसा हॆ. वर्तमान जीवन शॆली का सटीक चित्रण

  10. अप्रैल 24, 2008 at 7:48 अपराह्न

    जड़ों में अटकी हुई
    रिश्तों की
    सौंधी मिटटी को
    पानी में घोल दिया
    खुद से दूर……..

    अरे महक कितना खुब सुरत लिखती हॊ दिल से वाह वाह खुद् वा खुद निकलती हे,बहुत धन्यवाद

  11. menka said,

    अप्रैल 25, 2008 at 10:26 अपराह्न

    u write very beutifully..on any topic.
    great keep it up.

  12. mehhekk said,

    अप्रैल 26, 2008 at 3:20 पूर्वाह्न

    vikramji,raj ji,menka ji aap sabhi ka bahut shukrana


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