नयी सहेली

नयी सहेली

वक़्त मिला सोचा बाज़ार जाउँ
दोचार दिन की सब्जी खरीद लाउँ
रास्ते में मिली नार नवेली
बातों बातों में ही बनी सहेली
फॅशनेबल,उँची एडी के सॅंडल
रहेन सहेन एक दम हाई फाई
मीठी ज़ुबान,दिल की अच्छी
बोली अब छूटेगी नही कभी
अपनी दोस्ती ये पक्की
हमे भी हुआ था बड़ा गुमान
उसकी मर्सीडीज़ में बैठे,बढ़ी अपनी शान
कितने आराम से सब्जी मंडी पहुँचे
मेमसाब को साथ देख 
कभी ना पूछनेवाले भी
कहे बोलो मेडम आप क्या लेंगे ?
हम अपने बूढ़े काका के दुकान गये
पाँच अलग सब्जी के पचास रूपीए दिए
बेटा और एक पचास का नोट देना
अगर इतना सारा माल है लेना
मगर काका पिछले हफ्ते 
के जैसा ही दिया पैसा
दुगुना दाम माँग रहे हमसे से ऐसा कैसा ?
नज़र उठाए काका बोले जानती हो
कौन है ये जो बला तुम संग लाई ?
बेटा इनका नाम है महँगाई “
एक बार चिपकी अब ना छोड़गी
ये सुनते ही हमे फूटी रुलाई 
और मेमसाब धीरे से मुस्कुराइ….

17 टिप्पणियाँ

  1. Rewa Smriti said,

    अप्रैल 29, 2008 at 7:04 पूर्वाह्न

    बेटा इनका नाम है ” महँगाई ”
    एक बार चिपकी अब ना छोड़गी
    ये सुनते ही हमे फूटी रुलाई
    और मेमसाब धीरे से मुस्कुराइ…

    Nice poem.

    Mahnagai ki kathin samasya
    hal hoga sachcha
    ghar ghar mein yadi janm le
    bina pet ka bachcha…😛

  2. anurag arya said,

    अप्रैल 29, 2008 at 8:08 पूर्वाह्न

    वैसे भी डाक्टरों से सब रेट ज्यादा करके ही बतलाते है….

  3. mehek said,

    अप्रैल 29, 2008 at 10:16 पूर्वाह्न

    rews shukrana,ha ha aisa hoga kabhi :):)

    anuragji shukrana,sahi hai doc saab,doc ko hamesha jyada bhav batate hai:);)

  4. kmuskan said,

    अप्रैल 29, 2008 at 12:19 अपराह्न

    ekdum sahi kaha ek baar jo chipak gayi to phir peecha nahi chodagi

  5. kmuskan said,

    अप्रैल 29, 2008 at 12:21 अपराह्न

    ekdum sahi kaha ek baar jo chipak gayi to phir peecha nahi chodagi

  6. ajaykumarjha said,

    अप्रैल 29, 2008 at 3:11 अपराह्न

    mehek jee,
    saadar abhivaadan. saral shabdon mein sundar rachnaa lagee.

  7. mehhekk said,

    अप्रैल 29, 2008 at 5:41 अपराह्न

    kmuskan ji,ajay ji shukrana

  8. Abhishek said,

    अप्रैल 29, 2008 at 7:00 अपराह्न

    ऐसी चीजों से बच कर ही रहना चाहिए😛

  9. Annapurna said,

    अप्रैल 30, 2008 at 7:38 पूर्वाह्न

    अन्दाज़े बयाँ पसन्द आया

  10. mehek said,

    अप्रैल 30, 2008 at 4:21 अपराह्न

    abhishek ji,annapurna ji shukrana

  11. menka said,

    अप्रैल 30, 2008 at 5:23 अपराह्न

    aapki naye saheli badi majedaar hai.

  12. mehhekk said,

    मई 1, 2008 at 6:05 पूर्वाह्न

    shukrana menka ji :):) hum isse aapki bhi saheli bana rahi hai.

  13. Tanu Shree said,

    मई 2, 2008 at 11:24 पूर्वाह्न

    नज़र उठाए काका बोले जानती हो
    कौन है ये जो बला तुम संग लाई ?
    बेटा इनका नाम है ” महँगाई ”
    एक बार चिपकी अब ना छोड़गी
    ये सुनते ही हमे फूटी रुलाई
    और मेमसाब धीरे से मुस्कुराइ….
    😛 , what a writing Mehekk…just mindblowig ….
    Maza aa gaya..really kitne lighly aapne itni badi baat keh di!!!

    Regards!!

  14. mehhekk said,

    मई 2, 2008 at 5:14 अपराह्न

    :):) shukrana tanu

  15. मई 2, 2008 at 7:44 अपराह्न

    नज़र उठाए काका बोले जानती हो
    कौन है ये जो बला तुम संग लाई ?
    बेटा इनका नाम है ” महँगाई ”
    एक बार चिपकी अब ना छोड़गी
    ये सुनते ही हमे फूटी रुलाई
    और मेमसाब धीरे से मुस्कुराइ….
    बहुत खूब

  16. ami said,

    मई 4, 2008 at 10:05 पूर्वाह्न

    its sooooooooooo good and well written

    jawab nahi aapka

  17. Hari Saini said,

    मार्च 15, 2010 at 3:56 अपराह्न

    I like it.


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