एक तेरा एक मेरा

एक तेरा एक मेरा

खिलतें है हज़ारों गुलाब
जब आते हो तुम साजन
फ़िज़ायें भी बहकने लगती है
कर खुशबू का रुख़ मेरे आँगन
महसूस होती है दूर से ही
खुशियों की चहल पहल
तेरे आने से पहले ही दस्तक देते
अरमानो की होती है हलचल
मेरे तरह सब तुझ से
मिलने को मचलते है
तेरी कदमों की आहट होने तक
बड़ी मुश्किल से खुद को संभालते है
तेरी बाहों में सिमट जाउँ
वही तो है मेरा जहां सारा
धड़कते है,दो दिल मिलते है वही
एक तेरा एक मेरा |

17 टिप्पणियाँ

  1. abrar said,

    जून 9, 2008 at 6:20 अपराह्न

    प्रेम रस से लबरेज यह कविता प्रेमी के मिलने का वह सुखद एहसास कराती है जिसे हर नारी महसूस करना चाहती है। इस एहसास के लिए बधाई।

  2. Rewa Smriti said,

    जून 9, 2008 at 6:52 अपराह्न

    खिलतें है हज़ारों गुलाब
    जब आते हो तुम साजन
    फ़िज़ायें भी बहकने लगती है
    कर खुशबू का रुख़ मेरे आँगन

    Lovley poem Mehek! Aye dost yeh duwa hai meri ‘yun hi mahakti rahe khushboo Mehek ke pyare aangan mein!’

  3. sameerlal said,

    जून 9, 2008 at 7:15 अपराह्न

    बहुत सुन्दर भावपूर्ण अभिव्यक्ति. बधाई. लिखते रहिये.

  4. Alpana said,

    जून 10, 2008 at 4:04 पूर्वाह्न

    kya baat hai Mahak!!!!!

    lagta hai barsat ke mausam ka asar hai ???[:)]

    prem ras se bhari pyari si yah kavita pasand aayee.

  5. जून 10, 2008 at 4:10 पूर्वाह्न

    तेरे आने से पहले ही दस्तक देते
    अरमानो की होती है हलचल
    मेरे तरह सब तुझ से
    मिलने को मचलते है

    बहुत ही प्यारी कविता लिखी है महक आपने प्यार कि सुंदर महक है इस में🙂

  6. Annapurna said,

    जून 10, 2008 at 8:45 पूर्वाह्न

    अवतार कुछ बदला-बदला सा है। अक्षर बड़े और रंगीन है। अच्छी है प्रस्तुति भी और कविता भी।

  7. जून 10, 2008 at 11:38 पूर्वाह्न

    sundar kavita..laga jaise sbd aankhon ke samne se aa ja rahen hain.

  8. anurag arya said,

    जून 10, 2008 at 1:47 अपराह्न

    तेरी कदमों की आहट होने तक
    बड़ी मुश्किल से खुद को संभालते है
    तेरी बाहों में सिमट जाउँ
    वही तो है मेरा जहां सारा

    kuch aor kahne kijarurat nahi…..

  9. जून 10, 2008 at 2:36 अपराह्न

    महक जी आपकी कविता बहुत पसंद आयी। आजकल मैं कविता कहीं भी देखता हूं तो मेरे मन मेंें भी कविता जन्म लेती है। आपकी कविता पर मुझे यह कविता सूझी। आप दिन-ब-दिन बहुत ही मनभावन पाठ लिखने लगीं हैं। मेरी तरफ से बधाई।
    दीपक भारतदीप
    ………………………………………………………………………….
    जिनको देखने के लिय मचलता है मन
    अगर वह पास आते हैं तो
    हो जाता है अमन
    बातें होतीं हैं प्यारी
    कभी होती है तकरार भी भारी
    पर प्रेम के पथ पर
    चलने वाले कभी रुकते नहीं
    लगता है जहां खड़े हैं
    कदम उनके बरसों तक थमें रहेंगे यहीं
    पर मिलना और बिछुड़ना तो
    इस दुनियां की रीति है
    चले जाते हैं वह जब आंखों से दूर
    अंधियारी हो जाती है यह दुनियां
    वीरान हो जाता हे चमन

    फिर चलता है यादों का
    कभी खत्म ना होने वाला दौर
    कहीं चैन नहीं आता न मिलता कोई ठौर
    कभी हंसते हुए बात करने की याद आती
    जो हुई थी तकरार वह भी मन भाती
    बिछ+ड़ गये अब क्या
    फिर कभी आयेंगे
    जीवन को महकायेंगे
    जिंदगी की तरह धरती के भी कायदे हैं
    कभी उजड़ता तो कभी महकता है चमन
    …………………………

  10. pawan said,

    जून 11, 2008 at 6:29 पूर्वाह्न

    bahut achha laga…..

  11. mehhekk said,

    जून 11, 2008 at 6:33 पूर्वाह्न

    aap abhi ka tahe dil se shukrana,sneh kayam rakhein,aap sabhi ka pyar yuhi hum par aashana rahe:)

  12. जून 11, 2008 at 9:16 पूर्वाह्न

    बहुत प्यारी कविता है, बधाई।

  13. जून 11, 2008 at 5:42 अपराह्न

    bhut bhut acchi kavita hai.or bhi likhati rhe.

  14. rohit said,

    जून 11, 2008 at 6:30 अपराह्न

    hehehe
    dil mannta to nahi, per aapne pahle bhi kaha ki kalpnik hai,,,,,so ab aap pyare kar hi dalye…asli pyare ke baad to rang jane kia hoga…..
    rohit

    yaar father admit hai hospital me, 2 din baad aya online kavita achi lagi..or apki purani kavita sammne kahdi ho gai….
    rohit

  15. mehhekk said,

    जून 12, 2008 at 5:25 पूर्वाह्न

    mahamntri ji,rashmi ji,rohit ji shukrana
    rohit ji aapke walid jaldi thik ho yahi dua hai,ishq -o-chaman ke gul khile bahut saal ho gaye hamari zindagi mein,khuda ki inayat se ab talak mehek rahe hai,:)shukrana

  16. rohit said,

    जून 26, 2008 at 4:10 अपराह्न

    wah wah
    mehhak , ishq ka gul agar khila tha to murzaye nahi kabhi dua hai meri,
    kisi ko kisi ke yaar se bichdna na ho kabhi, yehi dua hai meri,
    jo dard saha hai humne woh dusman ko bhi na mile, dua hai meri
    mehak rahi ho tum ab talk,khuda ki marzi hai, mehkti raho dua hai meri
    mehak ti raho kisi ki saso me har ghadi, yahi dua hai meri….
    rohit


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