बूँद में छीपा अस्तित्व

बूँद में छिपा अस्तित्व ढुंढ़ो तो मिल जाए
बूँद से मिलती आशा  सब की प्रेरणा बन पाए |

बूँद विश्वास की गहरे रिश्ते की नीव रचाए
बूँद प्यार की मिठास घोले नफ़रत के शूल मिटाए |

बूँद सा छोटा शब्द  भावनाओ को राह दिखाए
बूँद ही  खुशी और गम में आँखों को सजाए |

बूँद थिरकती पत्तियों पर जश्नसाज़ सुनाए
बूँद बूँद मिलकर बनता विशाल सागर सा समुदाय |

19 टिप्पणियाँ

  1. जून 12, 2008 at 12:58 अपराह्न

    बूँद सा छोटा शब्द भावनाओ को राह दिखाए
    बूँद ही खुशी और गम में आँखों को सजाए |

    सुंदर और सही लिखा है आपने महक

  2. balkishan said,

    जून 12, 2008 at 1:01 अपराह्न

    “बूँद विश्वास की गहरे रिश्ते की नीव रचाए
    बूँद प्यार की मिठास घोले नफ़रत के शूल मिटाए |”

    सुंदर वर्णन.
    आशा से परिपूर्ण कविता.
    बधाई.

  3. mmuskan said,

    जून 12, 2008 at 1:06 अपराह्न

    बूँद में छीपा अस्तित्व ढुंढ़ो तो मिल जाए
    बूँद से मिलती आशा सब की प्रेरणा बन पाए |

    bahut sunder likha hai

  4. कुश said,

    जून 12, 2008 at 1:34 अपराह्न

    बहुत सुंदर प्रस्तुति महक जी… बधाई..

  5. anurag arya said,

    जून 12, 2008 at 2:02 अपराह्न

    बूँद सा छोटा शब्द भावनाओ को राह दिखाए
    बूँद ही खुशी और गम में आँखों को सजाए |

    bahut khoob ….mahak ji..

  6. meenakshi said,

    जून 12, 2008 at 2:25 अपराह्न

    नन्ही सी बूँद में गहरे सागर सा भाव …बहुत खूबसूरत …

  7. ranjana singh said,

    जून 12, 2008 at 2:37 अपराह्न

    बहुत ही सुंदर,भावपूर्ण रचना के लिए बधाई.

  8. Rewa Smriti said,

    जून 12, 2008 at 5:08 अपराह्न

    बूँद में छीपा अस्तित्व ढुंढ़ो तो मिल जाए
    बूँद से मिलती आशा सब की प्रेरणा बन पाए |

    Bund bund se hi ghada bharta hai…..🙂

  9. sameerlal said,

    जून 12, 2008 at 5:25 अपराह्न

    बहुत बढ़िया, बधाई.

  10. mehek said,

    जून 12, 2008 at 5:30 अपराह्न

    itni pyar aur sneh ki boond pakar hamara sagar ban gaya,aap sabhi ka tahe dil se shukrana

  11. जून 12, 2008 at 5:30 अपराह्न

    बूँद सा छोटा शब्द भावनाओ को राह दिखाए
    बूँद ही खुशी और गम में आँखों को सजाए |

    बूँद को सागर बना दिया आपने..

    ***राजीव रंजन प्रसाद

  12. Annapurna said,

    जून 13, 2008 at 3:58 पूर्वाह्न

    महक जी छीपा नहीं छिपा।

    कृपया ठीक कीजिए, कविता का मज़ा किरकिरा हो रहा है।

  13. ajaykumarjha said,

    जून 13, 2008 at 7:01 पूर्वाह्न

    boond boond mil kar saagar ban jaaye,
    aur us saagar main kaun na dubki lagaaye.
    achha lagaa likhtee rahein. aur haan kabhi kabhi aap mere chitthe ko bhee padh saktee hain, koi manaahee nahin hai.

  14. जून 13, 2008 at 8:02 पूर्वाह्न

    bahut hi sundar rachana hai.

  15. mehhekk said,

    जून 13, 2008 at 3:53 अपराह्न

    aap sabhi ka tahe dil se shukrana

    annapurna ji hamne galti sudhar li hai,bahut shukrana shabd ko sahi batane ke liye.

  16. जून 13, 2008 at 5:12 अपराह्न

    महक आपकी कविता पर मुझे यह शब्द कहने का दिल चाह रहा है।
    दीपक भारतदीप

    मन में प्यास थी प्यार की
    एक बूंद भी मिल जाती तो
    अमृत पीने जैसा आनंद आता
    पर लोग खुद ही तरसे हैं
    तो हमें कौन पिलाता

    स्वार्थों की वजह से सूख गयी है
    लोगों के हृदय में बहने वाली
    प्यार की नदी
    जज्बातों से परे होती सोच में
    मतलब की रेत बसे बीत गईं कई सदी
    कहानियों और किस्सों में
    प्यार की बहती है काल्पनिक नदी
    कई गीत और शायरी कही जातीं
    कई नाठकों का मंचन किया जाता
    पर जमीन पर प्यार का अस्तित्व नजर नहीं आता

    गागर भर कर कभी हमने नहीं चाहा प्यार
    एक बूंद प्यार की ख्वाहिश लिये
    चलते रहे जीवन पथ पर
    पर कहीं मन भर नहीं पाता

    जमीन से आकाश भी फतह
    कर लिया इंसान
    प्यार के लिये लिख दिये कही
    कुछ पवित्र और कुछ अपवित्र किताबों
    जिनका करते उनको पढ़ने वाले बखान
    पर पढ़ने सुनने में सब है मग्न
    पर सच्चे प्यार की मूर्ति सभी जगह भग्न
    लेकर प्यार का नाम सब झूमते
    सूखी आंखों से ढूंढते
    पर उनकी प्यास का अंत नजर नहीं आता
    प्यार कोई जमीन पर उगने वाली फसल नहीं
    कारखाने में बन जाये वह चीज भी नहीं
    मन में ख्यालों से बनते हैं प्यार के जज्बात
    बना सके तो एक बूंद क्या सागर बन जाता
    पर किसी को खुश कोई नहीं कर सकता
    इसलिये हर कोई प्यार की एक बूंद के
    हर कोई तरसता नजर नहीं आता
    ……………………………

  17. mehhekk said,

    जून 14, 2008 at 6:24 पूर्वाह्न

    pyar ki boond bhi amrut hai jeene ke liye,sundar kavita ke liye shukrana deepakji

  18. cartoonist ABHISHEK said,

    जून 17, 2008 at 7:16 अपराह्न

    bahut doob kar lika aapne..BADHAI

  19. mehhekk said,

    जून 18, 2008 at 6:35 पूर्वाह्न

    abhishek ji shukrana


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