उस गली के मोड़ पर

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तेरे दर्द में सनम हम रह लेंगे 
इश्क़ में हुए हर सितम सह लेंगे 
दूर ही सही मगर दिल के करीब हो 
तेरे आने की आस है खुद से कह देंगे  |

———————-

अक्सर सवाल करते हो किस बात में छिपी है खुशी हमारी
इतना  समझ पाए अपनी तो जन्नत है मुस्कान तुम्हारी |

————————

संगीन गुनाह हुआ है  हमसे जमाने की नज़र में
कहते है कम उमर में  कैसे तुमसे इश्क़ कर बैठे  |

————————–

बहुत संभ कर ही चलते है राहसफ़रकदम
उस गली के मोड़ पर यकायक तुमसे टकरा जाते है |

14 टिप्पणियाँ

  1. जून 15, 2008 at 6:23 पूर्वाह्न

    बहुत संभल कर ही चलते है राह-ए-सफ़र-ओ-कदम
    उस गली के मोड़ पर यकायक तुमसे टकरा जाते है |

    सभी प्रशंसनीय हैं..

    ***राजीव रंजन प्रसाद

  2. anurag arya said,

    जून 15, 2008 at 7:44 पूर्वाह्न

    बहुत संभल कर ही चलते है राह-ए-सफ़र-ओ-कदम
    उस गली के मोड़ पर यकायक तुमसे टकरा जाते है |

    ye behad pasand aaya…….

  3. alpana said,

    जून 15, 2008 at 8:46 पूर्वाह्न

    बहुत संभल कर ही चलते है राह-ए-सफ़र-ओ-कदम
    उस गली के मोड़ पर यकायक तुमसे टकरा जाते है |

    bahut khuub likha hai! Wah !Wah!

  4. ajaykumarjha said,

    जून 15, 2008 at 10:42 पूर्वाह्न

    mehek jee,
    lagtaa hai kisi ko kisi se jabardast ishk ho gaya hai, khuda khair kare, ham to padhte rahenge.

  5. जून 15, 2008 at 4:06 अपराह्न

    अक्सर सवाल करते हो किस बात में छिपी है खुशी हमारी
    इतना न समझ पाए अपनी तो जन्नत है मुस्कान तुम्हारी |

    बहुत सुन्दर

  6. DR. CHANDRAKUMAR JAIN said,

    जून 15, 2008 at 5:58 अपराह्न

    आस…एहसास…मुस्कान के बीच
    सम्हलकर क़दम उठा रहे अशआर.
    …लेकिन चित्र ख़ुद पूरी ग़ज़ल जैसी है.
    ====================
    शुक्रिया
    डा.चंद्रकुमार जैन

  7. Rewa Smriti said,

    जून 16, 2008 at 1:30 पूर्वाह्न

    अक्सर सवाल करते हो किस बात में छिपी है खुशी हमारी
    इतना न समझ पाए अपनी तो जन्नत है मुस्कान तुम्हारी |

    Wah wah wah wah…..
    wah ji wah…wah ji wah…wah ji wah wah

    lovely…Mehek
    mere taraf se ek line-
    “Aah tak na nikli aur tum ro pade…..”

  8. Shubhashish Pandey said,

    जून 16, 2008 at 9:04 पूर्वाह्न

    kya baat hai
    bahut khoob

  9. mehek said,

    जून 16, 2008 at 2:38 अपराह्न

    sabhi ka dil se shukrana

  10. जून 16, 2008 at 5:29 अपराह्न

    बहुत ही उम्दा है सब की सब.

  11. Annapurna said,

    जून 17, 2008 at 8:05 पूर्वाह्न

    अच्छा ख़्याल है

  12. mehhekk said,

    जून 18, 2008 at 6:34 पूर्वाह्न

    sameerji,annapurnaji shukran

  13. jeetu said,

    जून 24, 2008 at 5:48 पूर्वाह्न

    संगीन गुनाह हुआ है हमसे जमाने की नज़र में
    कहते है कम उमर में कैसे तुमसे इश्क़ कर बैठे |

    kya khoob kaha hai ….kam umar me kaise tumse ishq kar baithe !!!

  14. rohit said,

    जून 26, 2008 at 4:14 अपराह्न

    wah yaar,
    kafi din baad aa rah hu per geet sundar hai
    बहुत संभल कर ही चलते है राह-ए-सफ़र-ओ-कदम
    उस गली के मोड़ पर यकायक तुमसे टकरा जाते है |
    kiya kare, kismat hai, har mode per takra jate hai
    dunia goal hai madam ..nahi kia
    rohit


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