जुगनू बन कर जागता है कोई

काली घटाओं के पर्दे से झाकता है कोई 
अध खुले उन नयनो से ताकता  है कोई |

हम तो अनजान बन गुजर जाते मोड़ से
बावरा ये मन क्यों काफिर भागता है वही |
दर्पण से कुछ पूछू वो जवाब नही देता
मालूम नही चल रही क्या रास्ता है सही |
  

 

 

 

 

 

गवाह –दिल कहते मिली उनको मंज़िल
उस अजनबी रूह से अपना वास्ता है कोई |


 

 

 

अपनो के जज़्बात जहाँ लोग समझे नही
हमारे लिए जुगनू बन कर जागता है कोई |

22 टिप्पणियाँ

  1. जून 23, 2008 at 7:45 पूर्वाह्न

    हम तो अनजान बन गुजर जाते मोड़ से
    बावरा ये मन क्यों काफिर भागता है वही |
    दर्पण से कुछ पूछू वो जवाब नही देता
    मालूम नही चल रही क्या रास्ता है सही |

    क्या बात कह दी …बहुत खुबसूरत

    अपनो के जज़्बात जहाँ लोग समझे नही
    हमारे लिए जुगनू बन कर जागता है कोई |

    बेहद सुंदर

  2. जून 23, 2008 at 7:46 पूर्वाह्न

    हम तो अनजान बन गुजर जाते मोड़ से
    बावरा ये मन क्यों काफिर भागता है वही |
    दर्पण से कुछ पूछू वो जवाब नही देता
    मालूम नही चल रही क्या रास्ता है सही |
    bhut sundar paktiya.sundar rachana ke liye badhai.

  3. mehhekk said,

    जून 23, 2008 at 7:47 पूर्वाह्न

    thanks ranju ji so much,sorry for the hapazard alingment,i tried but couldnt correct it:(

  4. mehhekk said,

    जून 23, 2008 at 7:48 पूर्वाह्न

    rashmi ji shukrana

  5. Dr Anurag said,

    जून 23, 2008 at 7:50 पूर्वाह्न

    vah mahak aaj kuch mood badla badla najar aaya sarkaar ka…..ye do sher khas taur se pasand aaye…..

    गवाह -ए-दिल कहते मिली उनको मंज़िल
    उस अजनबी रूह से अपना वास्ता है कोई |

    अपनो के जज़्बात जहाँ लोग समझे नही
    हमारे लिए जुगनू बन कर जागता है कोई |

  6. mehhekk said,

    जून 23, 2008 at 7:53 पूर्वाह्न

    🙂;) aare wah doc saab aap to man ki bat bhi jan lete hai,shukrana,sarahna ke liye aaj mod bahut khush hai:)well see u all later,hv o rn now.

  7. Annapurna said,

    जून 23, 2008 at 9:47 पूर्वाह्न

    बहुत सुन्दर !

  8. ranjana singh said,

    जून 23, 2008 at 10:22 पूर्वाह्न

    अपनो के जज़्बात जहाँ लोग समझे नही
    हमारे लिए जुगनू बन कर जागता है कोई |

    बहुत ही सुंदर रचना महक जी. पूरी गजल ही खूबसूरत है,पर यह शेर सबका सिरमौर है.बधाई.

  9. cartoonist ABHISHEK said,

    जून 23, 2008 at 11:14 पूर्वाह्न

    bahut umdaa
    badhai

  10. sameerlal said,

    जून 23, 2008 at 2:39 अपराह्न

    अपनो के जज़्बात जहाँ लोग समझे नही
    हमारे लिए जुगनू बन कर जागता है कोई |

    -बहुत उम्दा रचना, बधाई.

  11. mehek said,

    जून 23, 2008 at 3:31 अपराह्न

    annapurna ji, ranjana singh ji,abhishek ji,sameer ii tahe dil se shukrana

  12. मनीष said,

    जून 23, 2008 at 3:31 अपराह्न

    bahut sundar laga har sher. khaskar ye donon to behad pasand aaye

    हम तो अनजान बन गुजर जाते मोड़ से
    बावरा ये मन क्यों काफिर भागता है वही

    गवाह -ए-दिल कहते मिली उनको मंज़िल
    उस अजनबी रूह से अपना वास्ता है कोई

    aur haan ek line thodi durust kar lein

    मालूम नही चल रही क्या रास्ता है सही

    ki jagah
    maloom nahin chal raha kya rasta hai sahi

    hoga

  13. जून 23, 2008 at 9:51 अपराह्न

    दर्पण जो दिखाता है
    सच नहीं होता
    सिर्फ झूठ ही दिखाता है
    ये–
    भौतिक विज्ञान का है अभिमत
    दर्पण से पूछना भी मत
    रचना बड़ी अच्‍छी है
    लिखते रहिये

  14. Rewa Smriti said,

    जून 24, 2008 at 2:01 पूर्वाह्न

    अपनो के जज़्बात जहाँ लोग समझे नही
    हमारे लिए जुगनू बन कर जागता है कोई |

    Hi Mehek,

    Really a beautiful poem, very well written! I liked last this stanza very much.
    जुगनूओं के शहर में यहाँ रहता है हर कोई…..

  15. जून 24, 2008 at 2:11 पूर्वाह्न

    बहुत ही खुबसूरत
    अपनो के जज़्बात जहाँ लोग समझे नही
    हमारे लिए जुगनू बन कर जागता है कोई

  16. jeetu said,

    जून 24, 2008 at 5:43 पूर्वाह्न

    अपनो के जज़्बात जहाँ लोग समझे नही
    हमारे लिए जुगनू बन कर जागता है कोई |

    kya baat hai
    ati sundar

  17. Dr.Bhawna said,

    जून 24, 2008 at 7:47 पूर्वाह्न

    बहुत सुंदर रचना है… बहुत-बहुत बधाई…

  18. mehhekk said,

    जून 24, 2008 at 9:39 पूर्वाह्न

    manish ji shukrana,wo chal rahi ek ladki ke liye sambhodit so rahi likha hai shayad bich mein comma reh gaya

    pawanji,rews,rajesh ji,jeetu ji,dr bhawna ji tahe dil se shukrana

  19. rohit said,

    जून 26, 2008 at 4:25 अपराह्न

    अपनो के जज़्बात जहाँ लोग समझे नही
    हमारे लिए जुगनू बन कर जागता है कोई |

    mehak jugoono kaun hai jara baata dena !!!!!
    jagta kaun hai bata dena !!!!heheheheh!!!!
    rohit

  20. alpana said,

    जून 27, 2008 at 6:53 पूर्वाह्न

    गवाह -ए-दिल कहते मिली उनको मंज़िल
    उस अजनबी रूह से अपना वास्ता है कोई |

    bahut pasand aaya ye sher–
    achca likha hai Mahak…

  21. rajesh said,

    जुलाई 12, 2008 at 3:31 अपराह्न

    bahut badia aise hi likhte raho aur hum parte rahe

  22. rajesh said,

    जुलाई 12, 2008 at 3:31 अपराह्न

    aise hi likhte raho aur hum parte rahen bahut hi badia


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