क्या करूँ ?

किसी के जाने की 
आहट हुई
हमारे दिल सेजो बहुत अज़ीज़ था
कुछ भी नही कर पाए हम
इस वक़्त उसकी राहें कुछ और
हमारी कुछ और
किसी और के कदमों की दस्तक
आनेवाली है
क्या उतना ही चाह पाउंगी
नयी राह को
चली  नयी राह  पर ?
पता नही …
ये हमारी उलझन है,क्या चली जा उससे छोड़ ,
जानती हूँ वो कभी नही आएगा,
क्या करूँ ?

16 टिप्पणियाँ

  1. Dr Anurag said,

    जुलाई 8, 2008 at 2:35 अपराह्न

    kuch uljhane badi ..jalim hoti hai na….

  2. Shrddha said,

    जुलाई 8, 2008 at 3:25 अपराह्न

    hmmmmmmmm ye bhi sach hai
    koi kaha rukta hai bus uljhan si zindgi hoti hai

  3. जुलाई 8, 2008 at 4:02 अपराह्न

    हालात से लडना ही जिन्दगी हे,ओर जो हालात से जीतता हे, जिन्दा दिल वही कहलाता हे, आप की कविता बहुत ही सुन्दर भाव लिये हे. धन्यवाद

  4. ranju said,

    जुलाई 8, 2008 at 4:57 अपराह्न

    उलझन सुलझे न ….अच्छी रचना लिखी है महक आपने
    अमृता का नई पोस्ट पढो शायद कुछ उलझन सुलझ जाए ..:)

    http://amritapritamhindi.blogspot.com/2008/07/blog-post_08.html

  5. abrar ahmad said,

    जुलाई 8, 2008 at 6:15 अपराह्न

    इन्हीं उलझनों का नाम शायद जिंदगी है। बढिया लगी आपकी रचना। बधाई।

  6. जुलाई 8, 2008 at 6:22 अपराह्न

    वाह क्या बात कही है. पर ‘उलझन’ है.
    बहुत बड़िया.

  7. menka said,

    जुलाई 8, 2008 at 8:14 अपराह्न

    titaliyon se jivan me rang bharnewaali…:) aaj itni udaasi kyon.
    nice poem.

  8. meenakshi said,

    जुलाई 8, 2008 at 11:16 अपराह्न

    जो चला गया उसे भूलना ही बेहतर …. जो जीवन में आया उसका मीठी मुस्कान से स्वागत करना ही जीने की सुन्दर कला है..

  9. जुलाई 8, 2008 at 11:59 अपराह्न

    पता नही …
    ये हमारी उलझन है,क्या चली जाउ उससे छोड़ ,
    जानती हूँ वो कभी नही आएगा,
    क्या करूँ ?

    –वाह! बहुत उम्दा.

  10. Rewa Smriti said,

    जुलाई 9, 2008 at 1:27 पूर्वाह्न

    Nice poem!
    Kya uljhan hai?😉
    Na na Mehek….ye koi uljhan nahi….zindagi jidhar le jaye bus chalti chalo. peeche mudakar jo dekha to dukh paoge…. Jab jane wale ko dukh nahi hota hai to samjho koi uljhan nahi. Waise….Keep your door open…na jane kis mod per koi mil jaye jiska pyar sari uljhan hi door kar de….🙂

  11. Rewa Smriti said,

    जुलाई 9, 2008 at 1:38 पूर्वाह्न

    मैं ज़िंदगी का साथ निभाता चला गया
    हर फ़िकर को धुएँ में उड़ाता चला गया……

    ye gana gao aur enjoy your life……

  12. mehek said,

    जुलाई 9, 2008 at 4:39 पूर्वाह्न

    aap sabhi ka bahut shukran,shayad yahisahi hai,jo jaye usse na bulaye,jo aaye shayad wo hi nayaab ho,zindagi aasan hogi.

  13. जुलाई 9, 2008 at 8:10 पूर्वाह्न

    thoda wqt chahiye hoga fir sab thik ho jaygega

  14. gustakh said,

    जुलाई 9, 2008 at 8:52 पूर्वाह्न

    सुंदर अभिव्यक्ति… साधुवाद

  15. जुलाई 10, 2008 at 3:38 पूर्वाह्न

    इस वक़्त उसकी राहें कुछ और
    हमारी कुछ और
    किसी और के कदमों की दस्तक
    आनेवाली है
    क्या उतना ही चाह पाउंगी
    नयी राह को

    hamesha ki tarah sunder aur atisunder bhaav piroye hein mehek ji…merii shubhkaamna sweekar karein….

  16. जुलाई 12, 2008 at 4:01 अपराह्न

    सुंदर अभिव्यक्ति…उम्दा.


एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: