दीवानगी

 Image and video hosting by TinyPic

दीवानगी हा दीवानगी ही कह सकते है हम इसे | जो एहसास मन में खुश्बू सी खुशी का
आभास कराए ,उसके पीछे हम दीवाने से ही तो भागे भागे दौड़ते है | 

आज की सुबह भी हर सुबह की तरह ही तो थी | जल्दी उठना ,तैयार होना ,काम ख़तम ना होने पर
चिड़चिड़ापन , सभी को भागने की जल्दी होती है घर में | हम अकेले तो नही , कोई ज़ोर से टीवी 
लगाए समाचार सुनता है , कोई और रेडियो पर गाने  लगाता है | सब क अपने शौक , ज़रा शांति नही 
हमे चाय के चुस्कियों संग कुरकुरी सी लोकल म्यूज पेपर पढ़ने का शौक है | मगर एक एक पन्ना
सब के अलग अलग हाथों में होता है | 

आज हमने भी तय कर लिया, किसी से सुबह सुबह  पेपर के लिए हाथा पाई नही करेंगे 
आख़िर बुरे तो हमही बनते है सब की नज़र में | चाय का प्याला लिए चले गए घर के पीछेवाले
आँगन | शायद हमारे आने से पहले वरुण राज का आगमन हुआ होगा | सब तरफ पानी | सोचा
वापस लौट जाउ अंदर | नही दीवार के कोने से कोई तो झाका था | वहम होगा ,नही नही ,हवा 
के झूले पर झूलती नन्ही सी गुलाबी  कली | जैसे बुला रही हो हमे , आओना ,देखो मुझे |

मन को क्या है ,जहा कोई उसे आमंत्रण मिला जाने की जिद्द शुरू | कभी कभी पाओं से
पहले पहुँच जाता है उस जगह, अपनी अलग कल्पानो समेत | पैर कब पानी में उतरे,साफ़ धुलि 
सलवार औरचूनरी भी कीचड़ में भीगी उसको परवाह कहा | मन और पाव के साथ हम भी वहा 
पहुँच गए | हमे बुलानेवाली और जिसके पीछे दीवाने हो  हम आए वो गुलबो एक ही नही थी | 
उसके जैसी और तीन खूबसूरत सी अपनी अपनी शाखाओ पर झूलती | मोतीयों से
दव बिंदु से सजी कलियाँ  डौल रही थी |

कुछ मोती हमारी भी हथेली पर गिरा दो | ले लो जीतने चाहे मोती लेलो , तुम जैसे दीवानो
के लिए ही तो है ये सुंदर सी अमानत , जो खुद ही अपनी दीवानगियों को भुलाए बैठे है |
रोज सुबह की जल्द बाज़ी में कहा वक़्त निका पाती हूँ | मगर अब याद से आया करूँगी ,
हमे दीवाना बना देने वाली तुम सी दीवानो से मिलने |

9 टिप्पणियाँ

  1. सितम्बर 16, 2008 at 2:03 अपराह्न

    सही चित्रण भागदौड़ की उहापोह से जन्मा…अच्छा लगा यह भाव पढ़ना भी.

  2. Dr Anurag said,

    सितम्बर 16, 2008 at 2:13 अपराह्न

    रोज की जिंदगी का एक खाका ……

  3. सितम्बर 16, 2008 at 2:30 अपराह्न

    बहुत ही प्यारा गुलाब है।

  4. सितम्बर 16, 2008 at 2:44 अपराह्न

    आये दिन की भागम भाग और नित नये से नये तरह की तकलीफ़े कम नहीं है। लेकिन वे दर्ज तो होनी ही चहिए।

  5. सितम्बर 16, 2008 at 3:29 अपराह्न

    Bahut accha likha hai.

  6. सितम्बर 16, 2008 at 4:48 अपराह्न

    bhut sahi baat ko sundar shabdo me likh diya aapne. badhai ho. bhut dino baad aapki rachana padhakar achha laga.

  7. rashmi prabha said,

    सितम्बर 17, 2008 at 9:05 पूर्वाह्न

    जिद्द शुरू | कभी कभी पाओं से
    पहले पहुँच जाता है उस जगह, अपनी अलग कल्पानो समेत |……..
    hum bhi aksar aap tak aa jate hain,deewangi jo hai padhne ki
    aur chah ki aap bhi aa jao……..
    bahut hi achha likha hai.

  8. pallavi trivedi said,

    सितम्बर 18, 2008 at 11:40 पूर्वाह्न

    बहुत खूब लिखा है महक….एक अद्भुत एहसास दे गया! और सचमुच गुलाब की कली इतनी सुन्दर है की हर कोई दीवाना हो जाए!

  9. kmuskan said,

    सितम्बर 19, 2008 at 11:30 पूर्वाह्न

    उसके जैसी और तीन खूबसूरत सी अपनी अपनी शाखाओ पर झूलती | मोतीयों से
    दव बिंदु से सजी कलियाँ डौल रही थी |

    zindagi ki bhag dod me hum in chote-chote,khubsurat palo ko bhool jaate hai .yaad dilvaane ke liye shukriya.


एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: