रिश्तों की टोकरी

रिश्तों की टोकरी में बहुत नाम है रखे हुए
एक तेरा नाम ही हमेशा याद आता है

खुशी या गम हो जब इज़हार करना चाहू
एक तेरे ही नाम का पर्चा हाथ आता है

मिलो मिल के सफ़र में अपने साए का तो वजूद भी नही कही
जिधर देखु वही तेरा प्यार परछाई बन मुझे नज़र आता है

17 टिप्पणियाँ

  1. shrddha said,

    सितम्बर 19, 2008 at 12:48 अपराह्न

    yahi hota hai, jise hum pyaar karte hain bus aise hi karte hain

  2. सितम्बर 19, 2008 at 1:05 अपराह्न

    सच कहा महक जी,नाम तो अनेकों हैं,पर कमबख्त एक वही नाम हर पल तड़पाता रहता है.
    अन्तिम पंक्ति संयोग की बात करती है पर अपने तो वियोग की घड़ी चल रही है,’शाश्वत वियोग की घड़ी”.और वियोग की घड़ी का सबसे अजीबोगरीब संयोग कि पहला कमेन्ट जिस नाम से पड़ा वो नाम भी कमबख्त वियोग के दर्द को बढ़ाने वाला ही है.खैर,खुबसूरत पोएट्री
    आलोक सिंह “साहिल”

  3. Dr Anurag said,

    सितम्बर 19, 2008 at 1:15 अपराह्न

    कुछ काँटो से चुभते है
    सब रिश्ते गुलाब नही होते

  4. ranju said,

    सितम्बर 19, 2008 at 1:46 अपराह्न

    प्यार सच्चा तो कहीं खो गया है ..

  5. mehek said,

    सितम्बर 19, 2008 at 1:54 अपराह्न

    aare aare idhar to sab log bahut enti ho gaye,sabhi ka shukran,zindagi hai chalta hai:),pyar khud se karon dusre se apne aap ho jata hai:)

  6. सितम्बर 19, 2008 at 2:12 अपराह्न

    Sachcha pyaar kabhi khota nahi hai .

  7. rashmi prabha said,

    सितम्बर 19, 2008 at 2:13 अपराह्न

    pyaar ki baat jab tumhaari kalam se hoti hai
    mat poocho wo rumaniyat mein dubi hoti hai
    pyaar bhari kashish saath-saath chalti hai………
    aaj mere blog par muddaton baad aana hua,
    laga koi bichhada mil gaya,
    bahut pyaar

  8. सितम्बर 19, 2008 at 2:44 अपराह्न

    बहुत सही!!! बढ़िया है.

  9. सितम्बर 19, 2008 at 2:46 अपराह्न

    रिश्तों की टोकरी में बहुत नाम है रखे हुए
    एक तेरा नाम ही हमेशा याद आता है

    खुशी या गम हो जब इज़हार करना चाहू
    एक तेरे ही नाम का पर्चा हाथ आता है

    bahut sunder….man ko bha gai aap ki rachana

  10. ramadwivedi said,

    सितम्बर 19, 2008 at 3:27 अपराह्न

    रिश्तों की टोकरी में बहुत नाम है रखे हुए
    एक तेरा नाम ही हमेशा याद आता है

    खुशी या गम हो जब इज़हार करना चाहू
    एक तेरे ही नाम का पर्चा हाथ आता है

    bahut achhi panktiya hain…..badhayi….

  11. parul said,

    सितम्बर 19, 2008 at 4:40 अपराह्न

    खुशी या गम हो जब इज़हार करना चाहू
    एक तेरे ही नाम का पर्चा हाथ आता है

    pyaari baat

  12. सितम्बर 20, 2008 at 8:12 पूर्वाह्न

    gud hai ji…..

  13. pallavi trivedi said,

    सितम्बर 20, 2008 at 8:34 पूर्वाह्न

    sundar likha hai….

  14. razia786 said,

    सितम्बर 20, 2008 at 10:36 पूर्वाह्न

    बहोत खूब!

  15. Rewa Smriti said,

    सितम्बर 22, 2008 at 3:43 अपराह्न

    Beautiful.

    Kahte hai pyaar ka rishta hai janam ka rishta….
    Hai janam ka jo ye rishta to badalta kyon hai…??

  16. राहुल सिँह said,

    जनवरी 21, 2011 at 5:52 अपराह्न

    सहज शब्दोँ मेँ कठिन अभिव्यक्ति… अग्रिम हेतु अनंत शुभकामनायेँ!

  17. जनवरी 31, 2011 at 3:48 पूर्वाह्न

    […] चीज़ों की अपेक्षा ज़्यादा मिलता है।3. रिश्तों की टोकरी जिसमें नही के बराबर है […]


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