हम तो आगे जाने की कोशिश

हम तो आगे जाने की कोशिश में थोड़े कामयाब भी हुए जानिसार
मन वही अक्सर रुकता है जहा तेरी यादें बिखरी महकती अभी तलक |

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या खुदा क्या खता हुई मुझसे बतादे भूले से
दिल को किसी के घायल होने का इल्म हुआ है |

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9 टिप्पणियाँ

  1. सितम्बर 25, 2008 at 2:31 अपराह्न

    या खुदा क्या खता हुई मुझसे बतादे भूले से
    दिल को किसी के घायल होने का इल्म हुआ है |
    bahut sunder

  2. rashmi prabha said,

    सितम्बर 25, 2008 at 5:42 अपराह्न

    dil ke itne kareeb
    yaa khuda ! kitne kam log hote hain

  3. paramjitbali said,

    सितम्बर 25, 2008 at 5:46 अपराह्न

    बहुत बढिया!!

  4. Anwar said,

    सितम्बर 25, 2008 at 7:23 अपराह्न

    bahut khub likha hai aap ne ….

  5. Rewa Smriti said,

    सितम्बर 26, 2008 at 1:46 पूर्वाह्न

    मन वही अक्सर रुकता है जहा तेरी यादें बिखरी महकती अभी तलक…..

    Man ka bhanwar kare pukar pyar ke geet suno….

  6. सितम्बर 26, 2008 at 5:21 पूर्वाह्न

    बहुत सुन्दर रचना. लिखति रहे.

  7. sagar kumar said,

    सितम्बर 26, 2008 at 5:49 पूर्वाह्न

    bahut khoob likha hai aapne,

  8. pallavi trivedi said,

    सितम्बर 26, 2008 at 8:47 पूर्वाह्न

    nice….

  9. Dr Anurag said,

    सितम्बर 26, 2008 at 2:18 अपराह्न

    हम तो आगे जाने की कोशिश में थोड़े कामयाब भी हुए जानिसार
    मन वही अक्सर रुकता है जहा तेरी यादें बिखरी महकती अभी तलक |

    क्या खूब कहा…..


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