रघुकुल रीति सदा चली आई

बचपन के वो दिन थे कितने सुहाने
कुछ भी कीमत दूं वापस कभी ना आने
कितनी अजब गजब थी वो छोटी सी दुनिया
हक़ीक़त में जहा उड़कर आती परीयाँ
देवगन सारे अच्छे ,बुरे थे सारे दानव
बर्फ की होती राजकुमारी,साथ बूटे मानव
सात समंदर पार से राजकुमार आता
सफेद घोड़े पर बैठ राजकुमारी ले जाता

शाम को सारे बच्चे कहते नानी –
राजारानी से शुरू और उन्ही पे ख़तम कहानी
दीप जलते ही वो दीपम करोती सुनाती
कहानी के साथ कुछ अच्छी बाते सिखाती

बुरा कभी ना सोच किसिका,सदा बनो नेक
राम रहिम येशू नानक सारे ये है एक
जो भी खुद के पास है बाट कर खाना
कभी ख्वाब में भी किसी का दिल नही दुखाना

ये सारे अच्छे बोल नानी बार बार दोहराई
एक बात वो हमे गा बाँधकर समझाई
राम कहत रघुकुल रीति सदा चली आई
चाहे प्राण जाए पर वचन ना जाई

2 टिप्पणियाँ

  1. rashmi prabha said,

    सितम्बर 27, 2008 at 3:44 अपराह्न

    nani ki kahaani bachpan ki yaaden lekar paas
    aa baithi………. bahut badhiyaa

  2. Rewa Smriti said,

    सितम्बर 28, 2008 at 8:43 पूर्वाह्न

    शाम को सारे बच्चे कहते नानी -२
    राजारानी से शुरू और उन्ही पे ख़तम कहानी

    Aisi hi hoti hai nani aur dadi.


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