तस्वीर के भी ना जाने कितने पहलू

 हसते हसते  हर बार कुछ अश्क़ निकल आते है
बस यही नही मालूम वो खुशी के थे या छुपे गम के  |
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आरज़ू अंबार लगे है दिल में हमारे इतने
कौनसी पूरी हो यही नही पता मुश्किल में खुदा भी |
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ना जाने हवाए कब रुख़ बदल दे अपना ज़िंदगी में कही और तुझसे
खुशी का हर लम्हा मिलता है जो पलछिन उसे संभाले रख लेना  |
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तस्वीर के भी ना जाने कितने पहलू नज़र से छुपे छुपाए रह गये
इश्क़ में कतल कर हमारा ,वो इल्ज़ाम हमी पे लगाए चल दिए |

10 टिप्पणियाँ

  1. seema gupta said,

    अक्टूबर 8, 2008 at 5:05 पूर्वाह्न

    ek se bdh kr ek

    regards

  2. Ranjan said,

    अक्टूबर 8, 2008 at 5:56 पूर्वाह्न

    बहुत अच्छे है..

  3. Dr Anurag said,

    अक्टूबर 8, 2008 at 6:03 पूर्वाह्न

    एक शेर याद आ रहा है ..

    अजीब शख्स है नाराज हो कर हँसता है
    मै चाहता हूँ खफा हो तो खफा सा लगे

  4. makrand said,

    अक्टूबर 8, 2008 at 6:10 पूर्वाह्न

    bahut sunder rachana
    badhai
    aap ki lekhni sashakt he
    keep writing
    visit my dustbin compaereing to u r level
    makrand
    regards

  5. अक्टूबर 8, 2008 at 1:55 अपराह्न

    सही है।

  6. अक्टूबर 8, 2008 at 4:35 अपराह्न

    महक जी आपके कविता पढ़कर यह ख्याल दिल में आया, सो लिख लिया. आपकी कविता पसंद आयी.
    दीपक भारतदीप
    ———————
    अब दिल नहीं भरता किसी की तस्वीर से
    लड़ते लड़ते हार गये अब अपने तकदीर से
    अपने दिल में मोहब्बत सजा कर रखी थी कई बरस
    पर कभी उनको नहीं आया हमारी बक्रारे पर तरस
    हर बार उनके इन्तजार के सन्देश लगे तीर से
    लगता है अब तस्वीरों से क्या दिल लगाना
    ख्याली पुलाव भला किसके लिए पकाना
    इसलिए अपने लिए खुद ही बन जाते हैं पीर से

  7. LOVELY said,

    अक्टूबर 9, 2008 at 6:05 पूर्वाह्न

    sundar likha mahek jee..kafi bhawpurn.

  8. S.B.Singh said,

    अक्टूबर 9, 2008 at 9:12 पूर्वाह्न

    achchhi prastuti

  9. praveen said,

    अक्टूबर 11, 2008 at 4:54 पूर्वाह्न

    kaya baat hai mehek ji, kuch yaad aata hai ..
    ye aandiyaan jo iidhar bah rahi hai unka rukh bhee kabhi udhar hoga |
    bura daur hai mera par khus hoon tumhe dekhkar ,ki kabhi haal tera bhee meri taraha raha hoga.||

  10. Rewa Smriti said,

    अक्टूबर 18, 2008 at 7:58 अपराह्न

    माना कि तुम गुफ़्तगू के माहिर हो ‘वफ़ा’ के लफ्ज़ पर अटको तो याद कर लेना!🙂


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