अब रोज रात आसमाँ से

तेरा नाम लेकर
मन में पुकारती  हूँ
आज भी जिस 
गली से गुजरती हूँ
बावरी सोचती है
तुम सुन लोगे….

===========
सुना बहुत है
उससे माँगी हर मुराद
पूरी होती है
अब रोज रात आसमाँ से
एक सितारा टूटने की
ख्वाहिशे पनपती है

============
सारा जहाँ घुम लिए
फिर भी 
करार  ना आया
दिल को सुकून मेरे 
मा के आँचल  बिना
कही नही

7 टिप्पणियाँ

  1. neeshooalld said,

    अक्टूबर 10, 2008 at 5:24 पूर्वाह्न

    बहुत अच्छी कविता लिखी है आपने । बधाई स्वीकार करें । भाव को शब्दों के माध्यम से बढ़िया उकेरा है ।

  2. Dr Anurag said,

    अक्टूबर 10, 2008 at 7:13 पूर्वाह्न

    सुना बहुत है
    उससे माँगी हर मुराद
    पूरी होती है
    अब रोज रात आसमाँ से
    एक सितारा टूटने की
    ख्वाहिशे पनपती है…

    bahut khoob……ye vala khas pasand aaya.

  3. ranju said,

    अक्टूबर 10, 2008 at 10:32 पूर्वाह्न

    सुना बहुत है
    उससे माँगी हर मुराद
    पूरी होती है
    अब रोज रात आसमाँ से
    एक सितारा टूटने की
    ख्वाहिशे पनपती है…

    यह अच्छी है

  4. अक्टूबर 10, 2008 at 10:59 पूर्वाह्न

    दिल को सुकून मेरे
    मा के आँचल बिना
    कही नही…

    -बहुत भावपूर्ण.

  5. अक्टूबर 10, 2008 at 11:07 पूर्वाह्न

    सुंदर evm संवेदी रचना, बधाई…….

  6. विनय said,

    अक्टूबर 11, 2008 at 5:02 अपराह्न

    bahut khoob, mehek ji

  7. pankaj said,

    मई 16, 2010 at 9:07 पूर्वाह्न

    ============
    सारा जहाँ घुम लिए
    फिर भी
    करार ना आया
    दिल को सुकून मेरे
    मा के आँचल बिना
    कही नही…

    kitna sach hai ye kathan! kaas o bachpan ke din phir laut aate …..


एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: