तुम हमे यू ना भुला पाओगे

सुना है कल तुम चले जाओगे
ना जाने फिर कब लौट आओगे
जब भी चलेंगी ये मस्त हवाए
हमे तुम याद बहुत आओगे

अश्को को हमने छिपा दिया है
जुदाई पर भी तुम मुस्कुराओगे
एक ही गहरा सदमा काफ़ी है
हमे तुम और कितना सताओगे

वादा अब ये हमारा भी रहा
हम भी तेरे साथ ही रहेंगे
जिस अंजुमन तुम कदम रखोगे 
वहा हम फूल बनकर खिलेंगे

जिस राह भी तुम जाओगे
सब हमे ही तेरी मंज़िल कहेंगे
तेरे दिल को अपना घर बनाया
तुम हमे यू ना भुला पाओगे

14 टिप्पणियाँ

  1. ajaykumarjha said,

    अक्टूबर 13, 2008 at 1:41 अपराह्न

    mehek jee,
    shub abhivaadan. achhee panktiyaan hain aur behad bhaav purn bhee. likhtee rahein.

  2. अक्टूबर 13, 2008 at 1:56 अपराह्न

    सुन्दर रचना है आपकी। खूबसूरत।

  3. Dr Anurag said,

    अक्टूबर 13, 2008 at 2:14 अपराह्न

    फ़िर उदासी…….क्या बात है??/

  4. mehek said,

    अक्टूबर 13, 2008 at 2:23 अपराह्न

    aare doc ssab udasi kaha e to bas ek purani si kavita hai,sabhi ka shukran:)

  5. रौशन said,

    अक्टूबर 13, 2008 at 2:57 अपराह्न

    बहुत सुंदर

  6. rashmi prabha said,

    अक्टूबर 13, 2008 at 3:06 अपराह्न

    aapko jo bhulane ki koshish karega
    wah jayega kaha…………
    bahut sahi aur behtar

  7. sachinmishra said,

    अक्टूबर 13, 2008 at 4:34 अपराह्न

    Bahut badiya.

  8. अक्टूबर 13, 2008 at 7:25 अपराह्न

    धन्यवाद सुन्दर कविता के लिये

  9. विनय said,

    अक्टूबर 14, 2008 at 7:04 पूर्वाह्न

    बेहतरीन! इस बार ऐसा लगा दिल से लिखा है आपने बिना किसी कोशिश के!

  10. razia786 said,

    अक्टूबर 14, 2008 at 11:25 पूर्वाह्न

    आज लगता है जैसे यह हमारे लिये ही लिख़ा हो। क्योंकि महेक जी मैं दो महिनो के लिये मेडीकल मिशन पर भारत सरकार द्वारा साउदी के लिये जा रही हुं। फिर कैसे भुला पाउंगी आप सबको?

  11. sangita puri said,

    अक्टूबर 14, 2008 at 11:41 पूर्वाह्न

    जिस राह भी तुम जाओगे
    सब हमे ही तेरी मंज़िल कहेंगे
    तेरे दिल को अपना घर बनाया
    तुम हमे यू ना भुला पाओगे
    बहुत अच्छा।

  12. Lovely said,

    अक्टूबर 14, 2008 at 5:48 अपराह्न

    sundar kavita mahek jee..bahut marmik..

  13. Rewa Smriti said,

    अक्टूबर 16, 2008 at 2:46 अपराह्न

    अश्को को हमने छिपा दिया है
    जुदाई पर भी तुम मुस्कुराओगे
    एक ही गहरा सदमा काफ़ी है
    हमे तुम और कितना सताओगे

    Bahut sunder….Royenge ham hazar baar koi hame rulaye kyun?

  14. Sambhav Jain said,

    नवम्बर 1, 2008 at 10:02 पूर्वाह्न

    जुदाई के गम का बड़ा ही मार्मिक वर्णन है …..


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