हाथों की लकीरें

हाथों की लकीरें
सुना है हमारी किस्मत लिखती है
तो फिर वो लिखाई
सिद्धि क्यूँ नही होती
उन्ही की तरह टेढ़ी मेढ़ी
चलती हूँ उनपर  एक सिरा पकड़कर
सोचती हूँ अब दूसरी लकीर पर 
कदम नही रखूँगी
पहली टूट जाती है आधी राह में ही
नयी और मुश्किल होती है
ये लकीरों का जाल मिटाना चाहती हूँ
बार बार हाथ धोती हूँ अपने ही
वो और साफ सुथरी होकर निखर आती है
एक और इम्तेहाँ लेने के लिए

15 टिप्पणियाँ

  1. अक्टूबर 20, 2008 at 7:09 अपराह्न

    बहुत ही सुन्दर
    धन्यवाद

  2. rashmi prabha said,

    अक्टूबर 21, 2008 at 7:23 पूर्वाह्न

    होनी बन जाती हैं ककीरें,कभी टेढी,कभी सीधी भी बन जाती है…
    क्रम है,उन लकीरों का…..
    बहुत सुन्दर

  3. Dr Anurag said,

    अक्टूबर 21, 2008 at 8:38 पूर्वाह्न

    .ये हाथ की लकीरे कभी कभी लोग ख़ुद भी बनाया करते है……आपकी कविता सुंदर है

  4. विनय said,

    अक्टूबर 21, 2008 at 9:53 पूर्वाह्न

    इम्तिहाँ ही ज़िन्दगी है!

  5. कुश said,

    अक्टूबर 21, 2008 at 10:16 पूर्वाह्न

    bahut hi sundar.. wakai

  6. ranju said,

    अक्टूबर 21, 2008 at 10:29 पूर्वाह्न

    हाथो की लकीरों का भरोसा क्या🙂 अच्छी लगी आपकी यह रचना

  7. संगीता पुरी said,

    अक्टूबर 21, 2008 at 10:37 पूर्वाह्न

    बार बार हाथ धोती हूँ अपने ही
    वो और साफ सुथरी होकर निखर आती है
    एक और इम्तेहाँ लेने के लिए
    …….क्या खूब लिखा है।

  8. अक्टूबर 21, 2008 at 6:19 अपराह्न

    very gud ji… one of ur best….

  9. nivedita said,

    अक्टूबर 22, 2008 at 7:36 पूर्वाह्न

    very nice, u r a best of the best
    plz send me this

  10. nivedita said,

    अक्टूबर 22, 2008 at 7:36 पूर्वाह्न

    very nice, u r a best of the best
    plz send me this.

  11. Rewa Smriti said,

    अक्टूबर 22, 2008 at 4:26 अपराह्न

    हाथों की चन्द लकीरों का, यह खेल है सब तक़दीरों का
    तक़दीर है क्या मैं क्या जानूँ, मैं आशिक़ हूँ तदबीरों का – from the film ‘विधाता’

    Hi mehek….Nice poem! Tumhari poem padhkar mujhe yeh gana yaad aa gayi. Please isse pahle wala comment delete kar dena.

  12. naseema said,

    अक्टूबर 27, 2008 at 10:25 पूर्वाह्न

    ok plz send me in my iail box shyri like dadr ke n pyar ke ok

  13. naseema said,

    अक्टूबर 27, 2008 at 10:27 पूर्वाह्न

    when u love some one u dont realize it is too late u always l u the one who leaves u &leaves the one who loves u

  14. Ranju said,

    अक्टूबर 1, 2011 at 4:05 पूर्वाह्न

    when u love some one u dont realize it is too late u always l u the one who leaves u &leaves the one who loves u I love u su

  15. Ranju Gupta said,

    अक्टूबर 1, 2011 at 4:08 पूर्वाह्न

    khuda se dua mangi hai, dua me maut mangi hai, khuda ne kaha maut to de dun tujhe, par use kya jawab dun, jisne teri zindagi ki dua mangi hai.


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