खट्टी इमलिसा

खट्टी इमलिसा

कुछ यादों का स्वाद
वैसा ही होता है
खट्टी इमलिसा
मूह में घुलकर
दातो तले आते ही
मीठी सी सिरहन दौड़ती है
सर से पाव तक
आँखों में ले आती है
वही पहचानी मुस्कान
और चहेरे पर आनंद की लकीरें ….

17 टिप्पणियाँ

  1. ranju said,

    नवम्बर 11, 2008 at 5:11 पूर्वाह्न

    कुछ यादों का स्वाद
    वैसा ही होता है
    खट्टी इमलिसा
    सही कहा ..अच्छी लगी यह

  2. sangita puri said,

    नवम्बर 11, 2008 at 5:11 पूर्वाह्न

    पढकर आनंद आ गया। बधाई।

  3. नवम्बर 11, 2008 at 6:18 पूर्वाह्न

    सही है । यादों का स्वाद इमली सा भी होता है ।
    घुघूती बासूती

  4. विनय said,

    नवम्बर 11, 2008 at 7:49 पूर्वाह्न

    गुड़ से मीठा और इमली से खट्ठा होता है कुछ रिश्तों का स्वाद!

  5. vidhu said,

    नवम्बर 11, 2008 at 9:02 पूर्वाह्न

    kavitaa achchi hai ,blog khoobsurat

  6. Abhishek said,

    नवम्बर 11, 2008 at 9:57 पूर्वाह्न

    Sahi kaha apne, yaadon keswad ke bare mein. Swagat mere blog par bhi.

  7. नवम्बर 11, 2008 at 10:42 पूर्वाह्न

    yadon ka swad imli sa – sahi upma.

  8. Ranjan said,

    नवम्बर 11, 2008 at 11:12 पूर्वाह्न

    bahut aachchaa..

  9. Rewa Smriti said,

    नवम्बर 11, 2008 at 11:40 पूर्वाह्न

    सर से पाव तक
    आँखों में ले आती है
    वही पहचानी मुस्कान

    Lovely poem. Yahan to imli ke ped kafi hein but I really don’t like it. Bahut khatte hote hein, aur main kha hi nahi pati hun. You must heard this song na…
    Imli ka boota beri ka ped
    imli khatti meethe ber
    iss jungle mein hum do sher
    chal ghar jaldi ho gayi der…

  10. नवम्बर 11, 2008 at 2:51 अपराह्न

    बहुत उम्दा!!! वाह!!

  11. MEET said,

    नवम्बर 11, 2008 at 3:35 अपराह्न

    Acchha hai …

  12. Lavanya said,

    नवम्बर 11, 2008 at 3:47 अपराह्न

    मेरी हार्दिक सराहना व स्नेह,
    – लिखते रहीये

  13. arsh said,

    नवम्बर 11, 2008 at 4:16 अपराह्न

    kuch galat na le magar main kya ise imlee ki tarah khatti mitti kahun to bura na mane … bahot hi umda swad is rachana me ….bahot hi swadist…aapko dhero badhai mehak ji…

  14. नवम्बर 11, 2008 at 5:45 अपराह्न

    दिल को छु गया आप का यह अंदाज, बहुत सुंदर
    धन्यवाद

  15. alpana said,

    नवम्बर 12, 2008 at 4:56 पूर्वाह्न

    कुछ यादों का स्वाद
    वैसा ही होता है
    खट्टी इमलिसा
    सही कहा –
    achcha likha hai Mahak…khatti mithi imli jaisee yaden.magar .kahan bhulti hain

  16. नवम्बर 12, 2008 at 4:14 अपराह्न

    याद हो या प्यार, दोस्ती हो या कुछ यार…सब में खट्टे-मीठे और कड़वेपन का स्वाद आता ही है1 बढ़िया लिखा आपने1 बधाई!

  17. नवम्बर 13, 2008 at 1:19 पूर्वाह्न

    खट्टी-मीठी यादें और खट्टी-मीठी बातों का जवाब नही/बहुत सुंदर कविता बधाई/


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