मधु मुस्कान

मोह किसी भी चीज़ का होता है

मन अटकेलिया करता है

वो फूल से फूल मंडराती तितली

आँखें मिचे मधु चुराती

पर फेहराए तो प्रतीत हो

आस पास हज़ारों खुशियाँ लहरा रही हो

तब हम स्वार्थी हो जाते है

दिल में ये ख़याल आता है

वो उड़कर हमारी हथेली पर आए

और अपनी मधु मुस्कान हमे भेट कर दे

खुद पर फिर हंसी भी आती है

क्या हम इतने आलसी हो गये वक़्त के साथ

के खुशियाँ भी उधार की हो……

8 टिप्पणियाँ

  1. hempandey said,

    नवम्बर 13, 2008 at 10:04 पूर्वाह्न

    सच कहा –
    आस पास हजारों खुशियाँ लहरा रही हों
    तब हम स्वार्थी हो जाते हैं |

    बुत अच्छे !

  2. alpana said,

    नवम्बर 13, 2008 at 10:29 पूर्वाह्न

    sach mein sahi likha hai..soch badal gayee hai…swarth srvopari jo ho gaya hai..

  3. Rewa Smriti said,

    नवम्बर 13, 2008 at 1:23 अपराह्न

    वो उड़कर हमारी हथेली पर आए
    और अपनी मधु मुस्कान हमे भेट कर दे

    Beautiful poem.
    Hamare yahan sarson ke phool per baith jab madhu ras lekar aati hai, usse jo shahad banta hai, us shahad ke swad mein kahi mithas hote hein or wo bahut hi swadisht hota hai. Mehek, what a coincidence…..believe me, just now main chapati ke sath shahad khai hun….I love shahad or jab bilkul pure cheez ghar ka mil jaye to uske taste ka maza hi kuch aur hai.

  4. arsh said,

    नवम्बर 13, 2008 at 2:08 अपराह्न

    तब हम स्वार्थी हो जाते है

    दिल में ये ख़याल आता है

    वो उड़कर हमारी हथेली पर आए

    bahot hi nazuk lahaje se likha hai aapne bahot hi sundar rachana aapko dhero badhai …..

  5. नवम्बर 13, 2008 at 4:04 अपराह्न

    बिल्कुल सही कहा..बेहतरीन!

  6. parul said,

    नवम्बर 13, 2008 at 5:43 अपराह्न

    क्या हम इतने आलसी हो गये वक़्त के साथ

    के खुशियाँ भी उधार की हो…sahi baat…

  7. नवम्बर 13, 2008 at 7:49 अपराह्न

    sundar abhivyakti

  8. MEET said,

    नवम्बर 14, 2008 at 2:06 पूर्वाह्न

    Bahut khoob.


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