चैन – ओ -अमन नदारद हुए

चैनअमन नदारद हुए कई दिल से
सुकून की घड़ियाँ नसीब बड़ी मुश्किल से |

वो खुद को तो कहते है बंदे खुदा के रही
और देते मासूमो को जख्म जलते कील से |

नन्हे  हाथों  में  बारूद – बंदूक  थमा दी  है
छिन किताबबस्ता मदरसे में जमील से |

राहरहमपैगाम हुआ रुखसत
सिखाते नोच खाना अपनो को गीदड़ चील से |

कब ख़ालसा होगा इनका या डरता है मौला
रहमतइंसानियत हो तेरी जादुई झील से |

17 टिप्पणियाँ

  1. makrand said,

    नवम्बर 14, 2008 at 12:37 अपराह्न

    चैन – ओ -अमन नदारद हुए कई दिल से
    सुकून की घड़ियाँ नसीब बड़ी मुश्किल से |

    bahut sunder rachana
    regards

  2. नवम्बर 14, 2008 at 1:09 अपराह्न

    बहुत सुंदर बात कही है आपने. काश लोग समझ पाते कि इंसान की जिंदगी का मकसद प्रेम करना है नफरत करना नहीं.

  3. Rewa Smriti said,

    नवम्बर 14, 2008 at 1:48 अपराह्न

    वो खुद को तो कहते है बंदे खुदा के रहीम
    और देते मासूमो को जख्म जलते किल से |

    Bahut sahi likha hai Mehek…..

  4. Dr Anurag said,

    नवम्बर 14, 2008 at 2:11 अपराह्न

    नन्हे हाथों में बारूद – बंदूक थमा दी है
    छिन किताब – बस्ता मदरसे में जमील से |

    sach me dukhad hai.

  5. arsh said,

    नवम्बर 14, 2008 at 4:13 अपराह्न

    नन्हे हाथों में बारूद – बंदूक थमा दी है
    छिन किताब – बस्ता मदरसे में जमील से |

    bahot khub likha hai aapne ,bahot khub ……………

  6. alpana said,

    नवम्बर 14, 2008 at 4:42 अपराह्न

    रहमत-ए-इंसानियत हो तेरी जादुई झील से |

    ameen!

  7. Rewa Smriti said,

    नवम्बर 14, 2008 at 5:15 अपराह्न

    Hi Mehek, thank you for putting his blog link on my blog. I just copied and put that in other page by your name. Thanks dear…so sweet of you.

  8. Jimmy said,

    नवम्बर 14, 2008 at 6:22 अपराह्न

    Very Nice post

    Shyari is here plz visit karna ji

    http://www.discobhangra.com/shayari/romantic-shayri/

  9. नवम्बर 14, 2008 at 6:49 अपराह्न

    भाव बहुत अच्छे हैं1 बहुत बढ़िया हो अगर आप हिन्दी की व्याकरण की गलतियाँ सुधर सकें…
    रुक्सत की जगह रुखसत, किल की जगह कील..

  10. नवम्बर 15, 2008 at 4:01 पूर्वाह्न

    vaaah vaah vaah bahut khoob. vistaar se tippani aaj sham ko karoonga. aab khoob likhte hain.

    prakashbadal.blogspot.com.

  11. ranju said,

    नवम्बर 15, 2008 at 4:34 पूर्वाह्न

    वो खुद को तो कहते है बंदे खुदा के रहीम
    और देते मासूमो को जख्म जलते किल से |

    बहुत खूब ..बेहतरीन लिखा है

  12. mehhekk said,

    नवम्बर 15, 2008 at 5:53 पूर्वाह्न

    nagpaal ji vyakaran ki galti durust ki hai,batane ke liye shukriya

  13. akshaya-mann said,

    नवम्बर 15, 2008 at 6:40 पूर्वाह्न

    mehek aapne bilkul sach kaha hai…………
    kadwi haqiqat ka aaina khub dikhaya hai awaam ko……..
    meri shubhkaamnaye …….aise hi aur bhi khub likhe ..akshay-mann
    aapka swagat hai….
    “बदले-बदले से कुछ पहलू”
    http://akshaya-mann-vijay.blogspot.com/

  14. Abhishek said,

    नवम्बर 15, 2008 at 10:10 पूर्वाह्न

    वो खुद को तो कहते है बंदे खुदा के रहीम
    और देते मासूमो को जख्म जलते कील से |
    सच्चाई को काफी सटीक प्रस्तुत किया है आपने. बधाई. ‘मेरे अंचल की कहावतें’ में टिप्पणी का शुक्रिया. स्वागत अपनी विरासत को समर्पित मेरे ब्लॉग पर भी.

  15. नवम्बर 15, 2008 at 1:48 अपराह्न

    नन्हे हाथों में बारूद – बंदूक थमा दी है
    छिन किताब – बस्ता मदरसे में जमील से

    क्‍या बात है आज के जमाने की सच्‍चाई को कितनी बेहतरीन शब्‍दों में पिरोया है आपने आभार

  16. Rohit Jain said,

    नवम्बर 17, 2008 at 6:10 अपराह्न

    Wonderful Nazm, Kudos

    Especially this sher —

    वो खुद को तो कहते है बंदे खुदा के रहीम
    और देते मासूमो को जख्म जलते कील से

  17. जनवरी 31, 2011 at 3:44 पूर्वाह्न

    […] 5. काश लोग समझ पाते कि इंसान की जिंदगी का मकसद प्रेम करना है नफरत करना नहीं. – सुरेश चन्द्र गुप्ता […]


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