ऐसा कब होगा

खुदा तेरी दुनिया में ऐसा कब होगा

 किसी को भूख लगे और  उसका मन रोगा

खुदा तेरी दुनिया में क्यूँ है इतने बीमार

कुछ लोग महलों में और कुछ क्यूँ लाचार

ये कब बदलेगा,कब सब समान होगा

सब को एक ही छत और सरी की रोटी तू कब देगा?

10 टिप्पणियाँ

  1. rasprabha said,

    नवम्बर 23, 2008 at 4:27 अपराह्न

    काश ऐसा हो जाये……..

  2. paramjitbali said,

    नवम्बर 23, 2008 at 5:00 अपराह्न

    असम्भव बात लगती है।लेकिन भाव बहुत सुन्दर हैं।

  3. नवम्बर 23, 2008 at 5:12 अपराह्न

    बहुत सुंदर भाव, ऎसा उस दिन होगा जिस दिन हम सब के मन से अहंकार मर जायेगा.ओर हम भगवान की पुजा नही,बल्कि उस भगवान के कहे अनुसार कर्म करे गे तब
    धन्यवाद

  4. Smart Indian said,

    नवम्बर 23, 2008 at 9:54 अपराह्न

    अफ़सोस, ऐसा हो नहीं सकता.

  5. Rewa Smriti said,

    नवम्बर 24, 2008 at 4:57 पूर्वाह्न

    खुदा तेरी दुनिया में क्यूँ है इतने बीमार
    कुछ लोग महलों में और कुछ क्यूँ लाचार

    Aisa hi hota hai…
    kuch ko mil pati bhikh nahi
    kuch ko shrikhand chakhata hai😦

  6. alpana said,

    नवम्बर 24, 2008 at 5:21 पूर्वाह्न

    कब सब समान होगा??
    bahut mushkil sa dikhta hai ye sab!

  7. akshaya-mann said,

    नवम्बर 24, 2008 at 6:22 पूर्वाह्न

    काश! ऐसा हो पता कितनी सार्थक सोच है …..

    मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है आने के लिए
    आप
    ๑۩۞۩๑वन्दना
    शब्दों की๑۩۞۩๑
    सब कुछ हो गया और कुछ भी नही !!
    इस पर क्लिक कीजिए
    आभार…अक्षय-मन

  8. ramadwivedi said,

    नवम्बर 24, 2008 at 6:48 पूर्वाह्न

    डा. रमा द्विवेदी said…

    पत्थर युग में

    ऐसा लगता है,जैसे हम,
    पत्थर युग की ओर
    धीरे-धीरे सरक रहे हैं।
    अच्छा है अगर,
    सब पत्थर बन जाएं,
    कम से कम
    ऊंच-नीच की खाई तो
    पट जाएगी,
    और भावनाएं इस तरह,
    लहूलुहान तो नहीं होंगी।

    Bahut achhi soch hai …..badhaayi…….apaki kavitaa ke pratyuttar me apani ek chhoti kavitaa preshit kar rahi hoon….jo bahut pahale likhi thi…..

  9. नवम्बर 24, 2008 at 10:16 पूर्वाह्न

    महक जी,

    आपका प्रयास अच्छा है, मेरा आपसे एक अनुरोध है कि आप अपने लेखन को और ज़्यादा कसें, आपने लिखा अच्छा है लेकिन रचनाएं और मेहनत चाहती हैं। मेरी बातें बुरी लगे तो उन्हें नज़रअंदाज़ कर दें। आपका लेखन का सफर जारे रहे ऐसी उम्मीद आपसे रहेगी।

  10. mehek said,

    नवम्बर 24, 2008 at 12:44 अपराह्न

    sarahna ke liye sahi ka shukran

    rama ji sahi kaha aapne kaash sab pathar ban jaye,na ansoon ho na dard,es kavita ke ilye shukriya bahut sundar hai

    prakash ji thank for comment,bura kahe lage,hum kaha profesional kavi hai,mehnat ke liye waqt bhi nahi,bas jab jo dil mein aaya likh diya.


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