ग्लानि

कल रात जल्दी सो गये थे हम | मुंबई में हुए हादसों के बारे में कोई खबर ही नही थी |
जब सुभह उठे तो मों ने बताया | एक सेकेंड के लिए कुछ निस्तब्ध रहे ,फिर मूह से
निकल गया,एतो रुटीन होता जा रहा है , तो क्या हुआ | मों बहुत गुस्सा हो गयी |
   कहती है तुम्हे पता नही हालत की गभीरता | जानते है स्थिति बहुत नाज़ुक है |
किसी का कोई म गया , कुछ शहीद हुए,उनका क़र्ज़ है हम पर | मगर हमारे अंदर 
आज उतनी खलबली नही मची जो अक्सर ऐसे हादसों के बाद इंसान महसूस करता है |
क्या हमारी भावनाए म गयी है | 
हमे खुद पे ही  बहुत   शरम रही है | कल ही सवेदनओ की बातें की और आज
पत्थर हो गए | इतने तंग दिल कैसे हो सकते है हम आसू का खून का असर
हो रहा हैये भी समझते है  भला ये भी कोई लिखने की बात हुई | बस अपनी बेशर्मी
की ग्लानि को कही छोड़ आना चाहते थे |

11 टिप्पणियाँ

  1. विवेक सिंह said,

    नवम्बर 27, 2008 at 8:26 पूर्वाह्न

    क्या कहें कुछ कहते नहीं बनता .

  2. बेनामी said,

    नवम्बर 27, 2008 at 8:35 पूर्वाह्न

    ये मेरे देश पर हमला है, हमारे देश पर हमला है और हम में हिन्दू मुसलमान, सिख सभी धर्म के लोग शामिल है. हमारे प्रधानमंत्री और हमारे देश के विपक्ष के नेता आडवानी जी दोनों कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं.

    ये सिखाये पढ़ाये विदेशी हमलावर हिन्दू और मुसलमान के बीच विवाद की बात कह रहे हैं, और हम उनके खिलौने साबित हो रहे हैं!

    मैं हेमन्त करकरे को शायद पसन्द नहीं करता था लेकिन उसने उस समय मेरे देश को बचाते हुये अपनी जान दी है जब मैं रजाई ओढ़ कर टेलिविजन देख रहा था? मेरे जैसे लोग किस मुंह से उसकी बराबरी कर सकते हैं? किस मुंह से मैं उसके बारे में गलत बोलूं?

    मेरे देश मुझे माफ करना, शायद मैं भटक रहा था!

  3. रौशन said,

    नवम्बर 27, 2008 at 8:37 पूर्वाह्न

    शहीदों को श्रद्धांजलि
    इस घटना को राजनीति को अलग करके सख्ती से देखना होगा और तमाम एजेंसियां जवाबदेह बनाई जानी चाहिए कि क्यों नही रोकी जा सकी इतनी भीषण घटना

  4. tarushree said,

    नवम्बर 27, 2008 at 9:25 पूर्वाह्न

    बढ़ते जा रहे हैं आतंक के हौंसले और हमें कुछ ना कर पाने की मजबूरी सताए जाती है। कुछ विस्फोट में मर जाते हैं और हम हर दिन इस दहशत में मरते हैं कि जाने कब हमारा या हमारे परिवार के किसी सदस्य का नाम उस सूची में शामिल हो जाए। कब तक बनती रहेंगी ये सूचियां….बस, अब और नहीं।

  5. NirjharNeer said,

    नवम्बर 27, 2008 at 10:19 पूर्वाह्न

    कल ही सवेदनओ की बातें की और आज
    पत्थर हो गए..

    shayad..

  6. scsatyarthi said,

    नवम्बर 27, 2008 at 10:48 पूर्वाह्न

    यकीन उठ गया अपनों पर से भी अब तो
    हर एक चेहरे में एक कातिल नज़र आता है

  7. मलय त्रिदेव said,

    नवम्बर 27, 2008 at 7:07 अपराह्न

    अब तो हद ही हो गयी। कुछ क्रान्तिकारी कदम उठाना चाहिए। कुछ भी…।

    अब समय आ गया है कि देश का प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी को, राष्ट्रपति लालकृ्ष्ण आडवाणी को, रक्षामन्त्री कर्नल पुरोहित को, और गृहमन्त्री साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को बना दिया जाय। सोनिया,मनमोहन,शिवराज पाटिल,और प्रतिभा पाटिल को अफजल गुरू व बम्बई में पकड़े गये आतंकवादियों के साथ एक ही बैरक में तिहाड़ की कालकोठरी में बन्द कर देना चाहिए। अच्छी दोस्ती निभेगी इनकी।

    इनपर रासुका भी लगा दे तो कम ही है।

  8. akshaya-mann said,

    नवम्बर 27, 2008 at 7:47 अपराह्न

    aapse bina pooche comm. jodna pada lekin majbur tha mafi chahuinga
    aap hi bataiye kya karta ????

    मैंने मरने के लिए रिश्वत ली है ,मरने के लिए घूस ली है ????
    ๑۩۞۩๑वन्दना
    शब्दों की๑۩۞۩๑

    आप पढना और ये बात लोगो तक पहुंचानी जरुरी है ,,,,,
    उन सैनिकों के साहस के लिए बलिदान और समर्पण के लिए देश की हमारी रक्षा के लिए जो बिना किसी स्वार्थ से बिना मतलब के हमारे लिए जान तक दे देते हैं
    अक्षय-मन

  9. नवम्बर 28, 2008 at 3:39 अपराह्न

    महक जी कल रात मेने टिपण्णी देने की बहुत कोशिश की लेकिन हर बार एरर ही आ रहा था;
    शहीदों को श्रद्धांजलि. ओर हम अगर अब भी ना चेते तो…. बहुत ही दुख की बात है , एक दम से सदमा सा लगा देख कर ,अभी तो समझ भी नही आ रहा की केसे ओर क्या कहे??? बस एक दम से हेरान हुये जा रहे है

  10. नवम्बर 28, 2008 at 6:00 अपराह्न

    अब तो आदत हो गई है, सिर्फ़ जगह और तारीख बदल जाती है. मुंबई की स्पिरिट कल काम पर लौटने से दिखाई पड़ेगी लेकिन जब वोटिंग करने का वक्त आता है तो ये स्पिरिट कहीं दिखाई नही पड़ती.


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