हमारी संवेदना मरी नही

मुंबई  में जो कूछ हुआ उसका असर हर दिल पर हुआ | और हमे लग रहा था  एक हम ही
बेशरम है जो इसे रुटीन हादसा कह बैठे | बहुत अपराध बोध भी महसूस किया था हमने |
हम पर इतने बड़े हादसे का कोई असर  नही हो रहा था ? इस बात से हैरान भी रहे |
हा मगर जो भी लोग इस हादसे में शहीढ़ हुए ,उनके लिए मन से दुआ ही निकली |
मगर जब टीवी पर उन शहीदों की अंतिम यात्रा देखी अपने आसूओ को रोक नही सके |
कोई जीता जागता इंसान,हसता बोलता व्यक्तिचुप चाप सोवा था | उन सभी को नमन
जो इस हादसे में वीरगति को प्राप्त हुए |

 

(jante hai bahut chote lag rahe hai hum ye sab kehte huye ,itane bade hadse ke samne,

bahut chota mehsus bhi kar rahe hai khud ko)

 

the great warroirs of the country

u r my sons proud feels the land

she wept silently today for long

when u slept forever on her sand.

11 टिप्पणियाँ

  1. munhfatjuyal said,

    नवम्बर 29, 2008 at 4:25 अपराह्न

    हमे लग रहा था एक हम ही बेशरम है जो इसे रुटीन हादसा कह बैठे | …उफ् ये दिन भी देखने थे. हम इस दौर में साथ-साथ.

  2. नवम्बर 29, 2008 at 4:50 अपराह्न

    शहीदों को मेरा प्रणाम्।

  3. monika said,

    नवम्बर 29, 2008 at 4:51 अपराह्न

    जी हाँ आपसे सहमत हूँ मै भी अपने आँसू नही रोक पाई. मेरा नमन उन शहीदों को जो अपनी जान पर खेल कर भी हमें नई रोशनी नया मार्ग दे गए. मोनिका

  4. नवम्बर 29, 2008 at 5:21 अपराह्न

    शहीदों को विनम्र श्रध्दांजली।आभार उन देशप्रेमी जांबाज सिपाहियों का जिन्होंने हजारों जान बचाने के साथ ही साथ इस आंतकी संकट से हमें मुक्ति दिलाई।

  5. नवम्बर 29, 2008 at 5:40 अपराह्न

    हाँ, ऐसे हादसों के बाद हम सभी ख़ुद को बहुत छोटा महसूस करते हैं। साथ ही ज़िन्दगी भी बेमानी लगती है, जो एक पल है और अगले पल नहीं।

  6. alpana said,

    नवम्बर 30, 2008 at 4:02 पूर्वाह्न

    samvednayen marti nahin hain.

    देश के लिए शहीद होने वालों को मेरी भावभीनी श्रद्धांजलि.

  7. cmpershad said,

    नवम्बर 30, 2008 at 8:17 पूर्वाह्न

    वो नौजवान जा रहा है आज कितनी शान से…
    अमर वो देश क्यों न हो वो जिस जगह शहीद हो…

  8. shobha said,

    नवम्बर 30, 2008 at 9:41 पूर्वाह्न

    sahi likha hai aapne. aaj dil ki yahi haalat hai.

  9. नवम्बर 30, 2008 at 1:17 अपराह्न

    Shahidon ko sat-sat pranaam.

  10. दिसम्बर 3, 2008 at 4:11 अपराह्न

    मेरे शहीदो को हम सब का प्राणाम, मे तो पढ कर ही रो पडा देख केसे सकता था, गुस्सा तो बहुत है लेकिन बेबसी है.
    धन्यवाद


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