मौसम का हवाला देखिए

मौसम का हवाला देखिए
मुखौटे बदलते नेता देखिए

खुदग़र्ज़ ये पुतले खड़े
वोट माँगते झुकता देखिए

साल भर बच्चे भूखे तो क्या
चुनाव में देते दाना देखिए

वैसे ही मरता रोज आम इंसान
झूठे  वादों से मारता देखिए

बेशरम    क़ौम ये सारी
दुबारा हसके आना देखिए

खुदा कैसे  गैरतमंद शक्स
कर गये किनारा देखिए

22 टिप्पणियाँ

  1. दिसम्बर 2, 2008 at 7:27 पूर्वाह्न

    हजारों जुर्म करके वो उजले लिबासों में घूमें।
    करिश्मा है सियासत के, वकीलों के, अदालत के।।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
    कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
    http://www.manoramsuman.blogspot.com

  2. Anurag said,

    दिसम्बर 2, 2008 at 7:29 पूर्वाह्न

    हम सभी इंसान जो इस भारत की जनता कहलाते हैं आज दुखी हैं, हमारी संवेदनाये हमरी कलम के माध्यम से स्फुटित हो रही है. लेकिन मोटी खाल वाले नेता, जिनकी शायद इंसानियत भी खत्म हो गयी है. न जाने कब समझेंगे हमारे दर्द को. सहमत हूँ आपके विचारों से …. सहमत होगा हर इंसान जिसने इस मिट्टी में जन्म लिया.
    – अनुराग

  3. ranju said,

    दिसम्बर 2, 2008 at 8:00 पूर्वाह्न

    आज के हालात पर सही लिखा है आपने महक ..

  4. Dr Anurag said,

    दिसम्बर 2, 2008 at 8:10 पूर्वाह्न

    क्या कहूँ मन सब ओर से व्यथित है !

  5. Sandesh said,

    दिसम्बर 2, 2008 at 9:44 पूर्वाह्न

    nice read !!!

  6. rasprabha said,

    दिसम्बर 2, 2008 at 10:08 पूर्वाह्न

    मौत,वारदातें,और दहशतजदा सन्नाटा……..बहुत भयानक,
    पर अब हमारी बारी है……खोया है , बचाना है
    सही का चयन करना है!

  7. akshaya-mann said,

    दिसम्बर 2, 2008 at 3:55 अपराह्न

    rukh badal di aaj to un tufano ki
    kaun bigadega hamara kuch
    hamare honslon se ye maunsam badalta dekhiye..
    mehek phir se bahut accha likha hai..

  8. दिसम्बर 2, 2008 at 4:47 अपराह्न

    बहुत सही लिखा है आपने| पर अब सही चुनाव हम सब को ही करना होगा|

  9. arsh said,

    दिसम्बर 2, 2008 at 5:17 अपराह्न

    bahot khub likha hai aapne mahak ji………..

  10. दिसम्बर 2, 2008 at 6:56 अपराह्न

    अच्छा िलखा है आपने । भावों को प्रभावशाली ढंग से अिभव्यक्त िकया है । मैने अपने ब्लाग पर एक लेख लिखा है-उदूॆ की जमीन से फूटी गजल की काव्यधारा । समय हो तो पढें और प्रतिक्रिया भी दें-

    http://www.ashokvichar.blogspot.com

  11. दिसम्बर 2, 2008 at 7:45 अपराह्न

    आपने सही रूप दिया है हमारे देश के विधाताओं का! सच हैः
    साल भर बच्चे भूखे तो क्या
    चुनाव में देते दाना देखिए…..

    बेशरम क़ौम ये सारी
    दुबारा हसके आना देखिए

  12. दिसम्बर 3, 2008 at 8:30 पूर्वाह्न

    बहुत सही फरमाया ,

    अब नहीं देर मेरा भी नाम होगा किसी गोली में ,
    कब तक देती मेरा साथ देखिये ।

  13. दिसम्बर 3, 2008 at 8:31 पूर्वाह्न

    अब नहीं देर मेरा भी नाम होगा किसी गोली में ,
    कब तक देती मेरा साथ जिन्दगी देखिये

  14. franklin said,

    दिसम्बर 3, 2008 at 9:24 पूर्वाह्न

    gud poem….

  15. alpana said,

    दिसम्बर 3, 2008 at 9:39 पूर्वाह्न

    खुदा कैसे गैरतमंद शक्स
    कर गये किनारा देखिए

    bahut sahi likha hai.

  16. sameer lal said,

    दिसम्बर 3, 2008 at 11:27 पूर्वाह्न

    यही हो रहा है और देख रहे हैं. अच्छी अभिव्यक्ति!!

  17. दिसम्बर 3, 2008 at 12:49 अपराह्न

    वैसे ही मरता रोज आम इंसान
    झूठे वादों से मारता देखिए

    bahut hi bhavapoorn sateek rachana. dhanyawad.

  18. दिसम्बर 3, 2008 at 4:06 अपराह्न

    वैसे ही मरता रोज आम इंसान
    झूठे वादों से मारता देखिए

    बेशरम क़ौम ये सारी
    दुबारा हसके आना देखिए

    बहुत खुब बहुत सुन्दर गजल है आप की,
    धन्यवाद.
    पता नही मै दो दिनो से कोशिश कर रहा हुं लेकिन टिपण्णी देते ही एरर आ जाता है, देखू आज

  19. paramjitbali said,

    दिसम्बर 4, 2008 at 6:35 पूर्वाह्न

    बहुत सुन्दर व बढिया रचना है।बधाई स्वीकारें।

  20. Digamber said,

    दिसम्बर 4, 2008 at 1:53 अपराह्न

    वैसे ही मरता रोज आम इंसान
    झूठे वादों से मारता देखिए

    बहुत अच्छा लिखा, आम इंसान तो बेचारा रोज ही पिस्ता है

  21. Shama said,

    दिसम्बर 6, 2008 at 10:35 पूर्वाह्न

    Mehak,
    Aapki mere blogpe tippaneeko mai bohot ehmiyat detee hun….aapke jaisa kaash kabhi likh paun, ye tamanna rahegi…bohot kuchh padha aapke blogpe..aur itne logonki tippaniyanbhi…mai ek adna-si wyakti kya kahun? Meree aisi auqathi nahi…!
    Gadya aur padya meki harek rachna behtareen hai…kin panktiyonko dohraun??
    Ek sachhe deshwasika dard jahan hai, waheen ek komal, swapnil kavimanbhi hai…

  22. सुलभ said,

    दिसम्बर 7, 2008 at 4:55 अपराह्न

    These politicians only work hard for their election campaign.
    kabhi kabhi to bahut sharm mahsus hoti hai unki kaar-gujaarion par.

    सुलभ पत्र


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