हर सदी इश्क़ की नयी कहानी होगी

हर सदी इश्क़ की  नयी कहानी होगी
राज़ खुले जो दिल के पशेमानि होगी |

मत छेड़ो दुल्हनदिल को इस कदर
हथेली खिली महेंदी  शरमपानी होगी |

क़ानून की ज़रा मजबूरी तो समझिए
सज़ा मिली हर हस्ती जानीमानी होगी |

चुनाव में इस बार कोई दोगला खड़ा
वोट संभल कर दीजिए मेहेरबानी होगी |

पूछवालों की वफ़ा को जोड़िए सत्ता से
ये उनके प्रति हमारी बद ज़ुबानी होगी |

हक़ीक़त में जमाना पहुँचा चाँद पर
कल्पना में जिए महक ,कब सयानी होगी |

31 टिप्पणियाँ

  1. रौशन said,

    दिसम्बर 10, 2008 at 2:14 अपराह्न

    वाह बहुत सुन्दर गज़ल !

  2. Rewa Smriti said,

    दिसम्बर 10, 2008 at 2:15 अपराह्न

    हर सदी इश्क़ की नयी कहानी होगी
    राज़ खुले जो दिल के पशेमानि होगी |

    हक़ीक़त में जमाना पहुँचा चाँद पर
    कल्पना में जिए महक ,कब सयानी होगी |

    Wah wah wah…. Mehek aapne to dil khush kar diya. Bahut sahi kaha hai…kabil e tarif hai.

  3. दिसम्बर 10, 2008 at 2:53 अपराह्न

    आपकी इस महकती ग़ज़ल के लिए आपको ढेरों बधाईयाँ… अच्छा लिखा है आपने…!!!

  4. rasprabha said,

    दिसम्बर 10, 2008 at 2:59 अपराह्न

    हक़ीक़त में जमाना पहुँचा चाँद पर
    कल्पना में जिए महक ,कब सयानी होगी |……
    mehak ke ishk ka andaaze bayaan aur, bahut achhi

  5. paramjitbali said,

    दिसम्बर 10, 2008 at 3:32 अपराह्न

    वाह! बहुत सुन्दर गज़ल !

    चुनाव में इस बार कोई दोगला खड़ा
    वोट संभल कर दीजिए मेहेरबानी होगी |

  6. दिसम्बर 10, 2008 at 4:14 अपराह्न

    आपने बड़ी ही सहजता से सच परोसने का कार्य किया है , वह भी ग़ज़ल के माध्यम से , बधाईयाँ !

  7. sameer lal said,

    दिसम्बर 10, 2008 at 4:18 अपराह्न

    वाह वाह/!?१!!! गजब बात है इस रचना में. बधाई.

  8. arsh said,

    दिसम्बर 10, 2008 at 4:33 अपराह्न

    bahot khub likha hai aapne ghazal ka makta to kamal ka hai wah dhero badhai aapko mahak ………….

  9. arsh said,

    दिसम्बर 10, 2008 at 4:33 अपराह्न

    sorry mehek…

  10. vidhu said,

    दिसम्बर 10, 2008 at 5:20 अपराह्न

    sundar kavita

  11. Dwijendra Dwij said,

    दिसम्बर 10, 2008 at 5:21 अपराह्न

    Please keep it up.
    Dwijendra Dwij

  12. दिसम्बर 10, 2008 at 9:33 अपराह्न

    बहुत बढ़िया !
    घुघूती बासूती

  13. alpana said,

    दिसम्बर 11, 2008 at 7:59 पूर्वाह्न

    हक़ीक़त में जमाना पहुँचा चाँद पर
    कल्पना में जिए महक ,कब सयानी होगी

    bahut hi achchey khyal hain Mahak badhayee.

  14. दिसम्बर 11, 2008 at 12:38 अपराह्न

    मत छेड़ो दुल्हन -ए-दिल को इस कदर
    हथेली खिली महेंदी शरमपानी होगी |

    बहुत ही सुंदर गजल

  15. Dr Anurag said,

    दिसम्बर 11, 2008 at 12:58 अपराह्न

    र सदी इश्क़ की नयी कहानी होगी
    राज़ खुले जो दिल के पशेमानि होगी |

    बहुत खूब…….

  16. दिसम्बर 11, 2008 at 1:49 अपराह्न

    वाह! वाह! क्या कहने अति सुन्दर…
    दाद कबूल कीजिये मेहरबानी होगी ॥

  17. ranju said,

    दिसम्बर 11, 2008 at 2:11 अपराह्न

    हर सदी इश्क़ की नयी कहानी होगी
    राज़ खुले जो दिल के पशेमानि होगी |

    बहुत सुन्दर ख्याल है

  18. दिसम्बर 11, 2008 at 7:37 अपराह्न

    हर बार की तरह आप की गजले, शेर एक से बढ कर एक, बहुत अच्छा लगा, आज भी सब शेर बहुत ही सटीक लगे…क़ानून की ज़रा मजबूरी तो समझिए
    सज़ा मिली हर हस्ती जानीमानी होगी |
    क्या बात है.
    धन्यवाद

  19. varsha said,

    दिसम्बर 12, 2008 at 6:54 पूर्वाह्न

    ग़ज़ल तो कहती है महक सयानी हो गई है

  20. दिसम्बर 12, 2008 at 7:31 पूर्वाह्न

    वाह! आखरी शेर तो कमाल का है…बहुत खूबसूरत लिखा है.

  21. shashwat said,

    दिसम्बर 12, 2008 at 12:53 अपराह्न

    “मत छेड़ो दुल्हन -ए-दिल को” | Dil ko dulhan banana acha laga!

  22. दिसम्बर 12, 2008 at 6:39 अपराह्न

    wah!vakai bahut sundar gazal hai.bahut badhi.

  23. Ashoo said,

    दिसम्बर 13, 2008 at 4:50 पूर्वाह्न

    महक जी,
    वाह क्या लिखा है आपने, मतला तो कमाल का है ही

    “हर सदी इश्क़ की नयी कहानी होगी
    राज़ खुले जो दिल के पशेमानि होगी |”

    पर मुझे यह शेर भी बहुत अच्छा लगा:

    “मत छेड़ो दुल्हन -ए-दिल को इस कदर,
    हथेली खिली महेंदी शरमपानी होगी |”

    आप ने जो दुल्हन-ऐ-दिल शब्द का इजाद किया है और फ़िर उस के साथ मेहँदी का इस्तेमाल किया है कमाल का है. बहुत बहुत बधाई .

    आशु

  24. akshaya-mann said,

    दिसम्बर 13, 2008 at 5:28 पूर्वाह्न

    areyyy kya baat hai dil ko chu liya…. ab ki baar baar to……..
    bahut hi spl rachna hai ye…….

  25. rajesh said,

    दिसम्बर 13, 2008 at 5:06 अपराह्न

    very good

  26. ramadwivedi said,

    दिसम्बर 14, 2008 at 3:10 पूर्वाह्न

    हर सदी इश्क़ की नयी कहानी होगी
    राज़ खुले जो दिल के पशेमानि होगी |

    मत छेड़ो दुल्हन -ए-दिल को इस कदर
    हथेली खिली महेंदी शरमपानी होगी |

    क़ानून की ज़रा मजबूरी तो समझिए
    सज़ा मिली हर हस्ती जानीमानी होगी |

    Aapka andaze bayaan hi kuch aur hai ….bahut bahut badhaayee…

  27. nirjharneer said,

    दिसम्बर 15, 2008 at 4:30 पूर्वाह्न

    चुनाव में इस बार कोई दोगला खड़ा
    वोट संभल कर दीजिए मेहेरबानी होगी |

    पूछवालों की वफ़ा को न जोड़िए सत्ता से
    ये उनके प्रति हमारी बद ज़ुबानी होगी |
    ni:sandeh behatreen rachna

    khaskar ye pankti………

    हक़ीक़त में जमाना पहुँचा चाँद पर
    कल्पना में जिए महक ,कब सयानी होगी |

    khoobsurat vyaktitv ka aaina.

  28. दिसम्बर 15, 2008 at 9:42 पूर्वाह्न

    चुनाव में इस बार कोई दोगला खड़ा
    वोट संभल कर दीजिए मेहेरबानी होगी |

    जागरूकता के इस दौर मैं
    ग़ज़ल भी कितनी जागरूक हो गई है

    बेहतरीन ग़ज़ल का शुक्रिया

  29. Manish Kumar said,

    दिसम्बर 16, 2008 at 11:56 पूर्वाह्न

    अच्छी ग़ज़ल है खासतौर पर ये शेर तो खूब पसंद आया

    क़ानून की ज़रा मजबूरी तो समझिए
    सज़ा मिली हर हस्ती जानीमानी होगी |

  30. दिसम्बर 18, 2008 at 6:09 अपराह्न

    हक़ीक़त में जमाना पहुँचा चाँद पर
    कल्पना में जिए महक ,कब सयानी होगी |

    waah mehhekk jee bahut khoob hamari bhi daad kabul kare

  31. Lucky said,

    जनवरी 3, 2009 at 4:56 अपराह्न

    मत छेड़ो दुल्हन -ए-दिल को इस कदर
    हथेली खिली महेंदी शरमपानी होगी |

    Very nice ….!!!


एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: