दीवानो सा अंदाज़

वादा किया है हवाओं ने हम से
इस मौसम के सारे फूल तेरे दर पे बरसाएँगी
फ़िज़ाओ ने भी कसम ली
खुशबू से उनकी तेरा घर महेकायँगी |
———————————–

तन्हाई की आदत साप जैसी
यादों की बिन बजी के फन फैलाए खड़ी हूई
—————————————
दीवानो सा अंदाज़ दोनो का मौत का ख़ौफ़ नही
बस उन में एक शाहिद था और एक जिहादी

34 टिप्पणियाँ

  1. akshaya-mann said,

    दिसम्बर 14, 2008 at 8:27 पूर्वाह्न

    कितनी अजीब बात है मैं आपका ब्लॉग देख रहा था अपनी ब्लॉग लिस्ट में पर दिख ही नही रहा था….
    देखा तो सबसे ऊपर नई पोस्ट मेरा इंतज़ार कर रही थी…..
    और मैं नीचे देख रहा था……
    लास्ट वाला शेर तो कम!ल का है…..
    बीच वाले में आपने वजह लिखा होगा…….
    wo bhi bahut accha hai….
    yadain sach mei dasti hain….


    अक्षय-मन

  2. akshaya-mann said,

    दिसम्बर 14, 2008 at 8:44 पूर्वाह्न

    yadon ki been baji

  3. दिसम्बर 14, 2008 at 9:47 पूर्वाह्न

    वादा किया है हवाओं ने हम से
    इस मौसम के सारे फूल तेरे दर पे बरसाएँगी
    फ़िज़ाओ ने भी कसम ली
    खुशबू से उनकी तेरा घर महेकायँगी |

    अच्‍छी कंपोजिशन महक जी महकते रहो सदा

  4. विवेक सिंह said,

    दिसम्बर 14, 2008 at 11:02 पूर्वाह्न

    बढिया जुगाड बन पडा है . बधाई स्वीकारें .

  5. दिसम्बर 14, 2008 at 12:15 अपराह्न

    दीवानो सा अंदाज़ दोनो का मौत का ख़ौफ़ नही
    बस उन में एक शाहिद था और एक जिहादी
    एक शाय्र ही ऎसी नजर रख सकता है, बहुत खुब आप के तीनो शेर अच्छे लगे.
    धन्यवाद

  6. sangita puri said,

    दिसम्बर 14, 2008 at 12:37 अपराह्न

    बहुत सुंदर लिखा है । बधाई स्‍वीकारें।

  7. arsh said,

    दिसम्बर 14, 2008 at 1:48 अपराह्न

    बहोत ही बढ़िया लिखा है आपने,बधाई स्वीकार करें.. आपको ढेरो बधाई…

    अर्श

  8. shobha said,

    दिसम्बर 14, 2008 at 2:38 अपराह्न

    बहुत अच्छा लिखा है

  9. rashmi prabha said,

    दिसम्बर 14, 2008 at 3:33 अपराह्न

    bahut-bahut achhi rachna…..
    alag-alag marm ko liye hue

  10. Rewa Smriti said,

    दिसम्बर 14, 2008 at 5:31 अपराह्न

    वादा किया है हवाओं ने हम से
    इस मौसम के सारे फूल तेरे दर पे बरसाएँगी
    फ़िज़ाओ ने भी कसम ली
    खुशबू से उनकी तेरा घर महेकायँगी

    Bahut khub….Kash is mausam ki meharbani se ek palash ka hi phool idhar khil jaye🙂

  11. दिसम्बर 14, 2008 at 8:45 अपराह्न

    दीवानो सा अंदाज़ दोनो का मौत का ख़ौफ़ नही
    बस उन में एक शाहिद था और एक जिहादी
    अति रोचक प्रेरणादायक बात पढने को मिली। रोज लिखते रहे। विचारो कि मुलाकात होती रहे इसी उम्मीद के साथ आपको न्योता दे रहा हु आपके अपने ब्लोग ” हे प्रभु यह तेरापन्थ ” पर जरुर पधारे। आपके उजवल्ल भविष्य हेतु मगलकामनाऐ॥॥॥॥॥।

  12. दिसम्बर 15, 2008 at 9:38 पूर्वाह्न

    वाह……….लाजवाब लिखा
    हर शेर मैं जान है, ख़ास कर

    दीवानो सा अंदाज़ दोनो का मौत का ख़ौफ़ नही
    बस उन में एक शाहिद था और एक जिहादी

  13. kmuskan said,

    दिसम्बर 15, 2008 at 11:24 पूर्वाह्न

    दीवानो सा अंदाज़ दोनो का मौत का ख़ौफ़ नही
    बस उन में एक शाहिद था और एक जिहादी

    bahut khub …..teeno sher bahut aache hai lakin antim sher kmaal ka hai

  14. Amit said,

    दिसम्बर 15, 2008 at 12:16 अपराह्न

    Bhaut he acchi kavita hai……antim sher to kamal ka hai…
    Hammare blog per bhi kabhi visit karein….

  15. rachna said,

    दिसम्बर 15, 2008 at 12:57 अपराह्न

    very very nice mehak

  16. Dr Anurag said,

    दिसम्बर 15, 2008 at 1:42 अपराह्न

    तन्हाई की आदत ????…….क्या बात कही मोहतरमा …..मुजफ्फर वारसी का एक शेर है…..

    zaKhm-e-tanhaa_ii me.n Khushbuu-e-hinaa kisakii thii
    saayaa diivaar pe meraa thaa sadaa kisakii thii

  17. paramjitbali said,

    दिसम्बर 15, 2008 at 2:41 अपराह्न

    वादा किया है हवाओं ने हम से
    इस मौसम के सारे फूल तेरे दर पे बरसाएँगी
    फ़िज़ाओ ने भी कसम ली
    खुशबू से उनकी तेरा घर महेकायँगी

    बहुत सुंदर लिखा है ।

  18. दिसम्बर 15, 2008 at 2:56 अपराह्न

    Alag alag rang ki tino hi rachnaayen achchi hain.

    guptasandhya.blogspot.com

  19. shashwat said,

    दिसम्बर 16, 2008 at 3:09 अपराह्न

    “दीवानो सा अंदाज़ दोनो का मौत का ख़ौफ़ नही
    बस उन में एक शाहिद था और एक जिहादी”

    dekhne ka andaaj hai. waise aapka andaaj bhi kamaal ka hai.

  20. hempandey said,

    दिसम्बर 16, 2008 at 4:31 अपराह्न

    सुंदर कल्पना, बेहतर अंदाज़ .

  21. alpana said,

    दिसम्बर 17, 2008 at 4:09 पूर्वाह्न

    दीवानो सा अंदाज़ दोनो का मौत का ख़ौफ़ नही
    बस उन में एक शाहिद था और एक जिहादी
    kya baat hai! bahut hi arthpuran likha hai.
    teeno rachnayen achchee lagi Mahak.

  22. harsh said,

    दिसम्बर 18, 2008 at 6:09 पूर्वाह्न

    bahut sundar sahi sateek likha hai aapne
    badayi sweekariye

  23. दिसम्बर 18, 2008 at 9:20 पूर्वाह्न

    बहुत ही अच्छी पंक्‍तियाँ है ” दीवानो सा अंदाज़ दोनो का मौत का ख़ौफ़ नही ”

    बधाईयाँ.

    मुकेश कुमार तिवारी

  24. दिसम्बर 19, 2008 at 11:04 पूर्वाह्न

    किया है हवाओं ने हम से
    इस मौसम के सारे फूल तेरे दर पे बरसाएँगी
    फ़िज़ाओ ने भी कसम ली
    खुशबू से उनकी तेरा घर महेकायँगी |

    बहुत ही सुंदर वैसे आजकल आप मेरे ब्‍लाग पर नहीं आ रहे हो

  25. विनय said,

    दिसम्बर 19, 2008 at 12:43 अपराह्न

    सुन्दर!

  26. दिसम्बर 19, 2008 at 3:31 अपराह्न

    vaah kyaa baat hai

  27. vish said,

    दिसम्बर 20, 2008 at 6:12 पूर्वाह्न

    दीवानो सा अंदाज़ दोनो का मौत का ख़ौफ़ नही
    बस उन में एक शाहिद था और एक जिहादी ………in pantiyon se saare bhawo ko hi bhawheen kar diya……..badhai sundar rachna ke liye….

  28. Lucky said,

    दिसम्बर 24, 2008 at 12:31 अपराह्न

    Nice one🙂

  29. दिसम्बर 24, 2008 at 2:43 अपराह्न

    bahut khoob likha hai… :))

  30. दिसम्बर 24, 2008 at 6:53 अपराह्न

    क्या खूब मैम…क्या खूब !!!!!
    और इतनी तारीफ़ का मेरी गज़ल के लिये …शुक्रिया
    मत छेड़ो दुल्हन -ए-दिल को इस कदर
    हथेली खिली महेंदी शरमपानी होगी
    ….इस शेर के हम दीवाने हो गये मैम

  31. akshayamann said,

    दिसम्बर 25, 2008 at 9:28 पूर्वाह्न

    kuch likho jaldi se kafi time ho gaya kuch likha nahi……….

  32. vijay kumar said,

    दिसम्बर 27, 2008 at 5:16 पूर्वाह्न

    bahut sundar abhivyakti,

    तन्हाई की आदत साप जैसी
    यादों की बिन बजी के फन फैलाए खड़ी हूई

    shaandar pankhtiyaan , poori kavita ,jaise apne aap mein ek kahani hai ..

    wah wah

    aapko bahut badhai ..

    vijay
    http://poemsofvijay.blogspot.com/

  33. preeti tailor said,

    दिसम्बर 27, 2008 at 9:53 पूर्वाह्न

    ahsaas ko jite ho,
    shabdose tasvir banate ho ,,
    aur kore kagaz par sajate ho…
    ek ek shabd par aap hame khamosh kar jaate ho…

    just superb ahsasoke in pravahme bahna achcha laga…

  34. दिसम्बर 27, 2008 at 7:16 अपराह्न

    bahut badhiya likha hai apane.
    bahut bahut badhai.


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