पहेलियाँ बुझना हमे आया नही

आगे बढ़ने की राह में लकीर बैठी है
रंग भरने है जिस में सफेद तस्वीर बैठी है
नज़दीक से चहेरा पहचाना सा लगा
देखा आरामखुर्सि पर हमारी तकदीर बैठी है |

===============================

पहेलियाँ बुझना हमे आया नही
जवाब तुम ने बताया नही
खामोश लौट गये अल्फ़ाज़ लबों तक आकर
दिल का आईना दोनो ने दिखाया नही |

35 टिप्पणियाँ

  1. rashmi prabha said,

    दिसम्बर 28, 2008 at 7:35 पूर्वाह्न

    पहेलियाँ बुझना हमे आया नही
    जवाब तुम ने बताया नही
    खामोश लौट गये अल्फ़ाज़ लबों तक आकर
    दिल का आईना दोनो ने दिखाया नही |

    …….खामोश लौटे अल्फाजों को एक मुकाम मिले,
    इस खूबसूरत कविता पर यह दुआ है .

  2. sangita puri said,

    दिसम्बर 28, 2008 at 7:58 पूर्वाह्न

    पहेलियाँ बुझना हमे आया नही
    जवाब तुम ने बताया नही
    खामोश लौट गये अल्फ़ाज़ लबों तक आकर
    दिल का आईना दोनो ने दिखाया नही |
    बहुत सुंदर।

  3. दिसम्बर 28, 2008 at 8:05 पूर्वाह्न

    बहुत ही लाजवाब शेर, बहुत समय बाद आप के ब्लॉग से महके,

    नज़दीक से चहेरा पहचाना सा लगा
    देखा आरामखुर्सि पर हमारी तकदीर बैठी है |

    खूबसूरत अल्फाज़, बेहतरीन अंदाज़,
    मज़ा आ गया पढ़ कर

  4. hempandey said,

    दिसम्बर 28, 2008 at 8:06 पूर्वाह्न

    रश्मि प्रभा और संगीता पुरी की ही तरह उन्हीं पंक्तियों पर दाद देता हूँ. साधुवाद.

  5. दिसम्बर 28, 2008 at 9:33 पूर्वाह्न

    पहेलियाँ बुझना हमे आया नही
    जवाब तुम ने बताया नही…
    बहुत ही सुंदर भाव लिये है आप की दोनो कविता.
    क्या बात है पहेलियां तो कोई भी नही बुझ पाया इस जिन्दगी की…
    धन्यवाद

  6. दिसम्बर 28, 2008 at 11:36 पूर्वाह्न

    खामोश लौट गये अल्फ़ाज़ लबों तक आकर
    दिल का आईना दोनो ने दिखाया नही |
    बहुत सुन्दर एवं भावपूर्ण रचना
    बधाई!

  7. alpana said,

    दिसम्बर 28, 2008 at 11:58 पूर्वाह्न

    खामोश लौट गये अल्फ़ाज़ लबों तक आकर
    दिल का आईना दोनो ने दिखाया नही |

    Wah! Wah!kya baat kahi hai..!
    bahut hi pyare sher hain Mahak.
    bahut hi sundar!

  8. दिसम्बर 28, 2008 at 1:21 अपराह्न

    बहुत ही अच्‍छे शेर ढेरों बधाई महक जी

  9. shashwat said,

    दिसम्बर 28, 2008 at 1:24 अपराह्न

    तकदीर को आरामकुर्सी पर बिठाना अच्छा लगा|

  10. Rewa Smriti said,

    दिसम्बर 28, 2008 at 4:01 अपराह्न

    खामोश लौट गये अल्फ़ाज़ लबों तक आकर
    दिल का आईना दोनो ने दिखाया नही |

    Wah…Beautiful. Kash dil ka ainaa bina dikhaye bhi kabhi kabhi dikh jata🙂

  11. bhootnath said,

    दिसम्बर 28, 2008 at 8:14 अपराह्न

    baap re baap ………..kyaa kar rahe ho aap…..gajab…..!!

  12. LOVELY said,

    दिसम्बर 29, 2008 at 5:55 पूर्वाह्न

    sundar kavita.

  13. muflis said,

    दिसम्बर 29, 2008 at 11:51 पूर्वाह्न

    khaamosh laut gyr alfaaz laboN pr aakar…..
    chuninda alfaaz mei khoobsurat izhaar….!
    badhaaee !!
    —MUFLIS—

  14. दिसम्बर 29, 2008 at 12:17 अपराह्न

    अच्छी एवम मनभावक रचना के लिये आपका अभिनन्दन करते हुये आपकी इस पोस्ट को ****MIND BLOWING कहना चाहता हु।

  15. दिसम्बर 29, 2008 at 1:45 अपराह्न

    आपकी उदासी भरी चौपाईया पढ़ कर नरेश कुमार शाद के कितात याद
    आ गए:-
    अश्क में सर्खुशी की मौज कहा?
    फितरतन ये तो ग़म रसीदा है,
    मेरे हरमा नसीब होंठो की,
    मुस्कराहट भी आब्दीदा है.
    ———————————
    एहसासऐ निशात की कमी देखोगे,
    आलाम की एक गर्द जमी देखोगे,
    नज़दीक से देखोगे तबस्सुम को अगर,
    सूखे हुए अश्को की नमी देखोगे.
    —————————————-
    आपने भावनाए अच्छे से व्यक्त की है.
    म.हाश्मी .

  16. दिसम्बर 29, 2008 at 1:57 अपराह्न

    महक जी आपकी यह कविता पंसद आयी इस पर मैंने कुछ पंक्तियां लिखीं जो प्रस्तुत है।
    दीपक भारतदीप
    …………………………….
    खींचते गये बिना सोचे समझे लकीर पर लकीर
    खुद ही नहीं समझे, बन गयी ऐसी एक तस्वीर ?
    कागज पर लिखे कई शब्द जो शायरी बन गये
    फिर भी तन्हाई का संग रहा,रूठी रही तकदीर
    ………………………………

  17. akshaya-mann said,

    दिसम्बर 29, 2008 at 9:59 अपराह्न

    नज़दीक से चहेरा पहचाना सा लगा
    देखा आरामखुर्सि पर हमारी तकदीर बैठी है |
    क्या लिखा है जबरदस्त…
    दोनों मुक्तक बहुत ही अच्छे हैं ……

  18. दिसम्बर 30, 2008 at 7:50 पूर्वाह्न

    bahut sundar rachana ,

    नज़दीक से चहेरा पहचाना सा लगा
    देखा आरामखुर्सि पर हमारी तकदीर बैठी है |

    ye pankhitiyan kaafi kuch kah jaati hai ..

    wah wah , bahut sundar ji ..
    bahut badhai ..

    maine bhi kuch naya likha hai , aapka sneh chahiye ..

    aapka vijay
    http://poemsofvijay.blogspot.com/

  19. brijendra said,

    दिसम्बर 30, 2008 at 8:58 पूर्वाह्न

    बहुत शानदार लिखा ………….
    आज पहेली बार आपका ब्लॉग पड़ रहा हूँ. बहुत खूब.

  20. satish said,

    दिसम्बर 30, 2008 at 5:24 अपराह्न

    बहुत सुंदर ! नव वर्ष की शुभकामनायें स्वीकार करें !

  21. arsh said,

    दिसम्बर 30, 2008 at 5:30 अपराह्न

    आपको तथा आपके पुरे परिवार को नव्रर्ष की मंगलकामनाएँ…साल के आखिरी ग़ज़ल पे आपकी दाद चाहूँगा …..

    अर्श

  22. विनय said,

    दिसम्बर 31, 2008 at 9:53 पूर्वाह्न

    नववर्ष की शुभकामनाएँ

  23. harkirat haqeer said,

    दिसम्बर 31, 2008 at 2:01 अपराह्न

    पहेलियाँ बुझना हमे आया नही
    जवाब तुम ने बताया नही
    खामोश लौट गये अल्फ़ाज़ लबों तक आकर
    दिल का आईना दोनो ने दिखाया नही |

  24. harkirat haqeer said,

    दिसम्बर 31, 2008 at 2:02 अपराह्न

    नववर्ष की शुभकामनाएँ….

  25. दिसम्बर 31, 2008 at 4:33 अपराह्न

    वाह! निहायत ही उम्दा रचनाएं हैं। हर पंक्ति जैसे बोल रही हो। बधाई स्वीकारें।

    आपको नव वर्ष की हार्दिक मंगलकामानाएं।

  26. दिसम्बर 31, 2008 at 7:18 अपराह्न

    बहुत सुन्दर!

    नववर्ष की आप सभी को सपरिवार हार्दिक शुभकामनाऐं.

  27. दिसम्बर 31, 2008 at 9:56 अपराह्न

    नव वर्ष की आप और आपके परिवार को हार्दिक शुभकामनाएं !!!नया साल आप सब के जीवन मै खुब खुशियां ले कर आये,ओर पुरे विश्चव मै शातिं ले कर आये.
    धन्यवाद

  28. जनवरी 1, 2009 at 5:19 पूर्वाह्न

    नव वर्ष मंगल मय हो
    आपका सहित्य सृजन खूब पल्लिवित हो
    प्रदीप मानोरिया
    09425132060

  29. Kajal Kumar said,

    जनवरी 1, 2009 at 11:32 पूर्वाह्न

    कार्टून पसंद करने के लिए धन्यवाद. नव वर्ष की ढेरों मंगलकामनायें. -काजल कुमार

  30. जनवरी 1, 2009 at 1:35 अपराह्न

    तकदीर पर आराम कुर्सी का बैठना…उम्दा एक्सप्रेशन…

  31. जनवरी 1, 2009 at 1:36 अपराह्न

    तकदीर का आरामकुर्सी पर बैठना…उम्दा एक्सप्रेशन…अच्छा लगा

  32. swapn said,

    जनवरी 1, 2009 at 4:12 अपराह्न

    bahut achchi rachna, gagar men sagar, badhai, nav varsh ki shubh kaamna. swapn

  33. Rewa Smriti said,

    जनवरी 2, 2009 at 5:52 पूर्वाह्न

    Hi Mehek,

    Happy new year…Kal se msg dalne ka try kar rahi hun but ja nahi raha hai. Could you check in your spam. Ho sakta ho mera comment wahan save ho raha ho. Do check and let me know.

    rgds.

  34. विवेक सिंह said,

    जनवरी 2, 2009 at 5:05 अपराह्न

    आपको नया साल मुबारक हो !

  35. praveen said,

    जनवरी 30, 2009 at 1:04 अपराह्न

    very nice ……..


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