मज़हबी सरहद

दूरियाँ बहुत है वक़्त ने बिछाई हुई
रिश्तों के लहू में प्यार उबलता है आज भी

ये मज़हबी सरहद कब और किसने बनाई

9 टिप्पणियाँ

  1. विनय said,

    जनवरी 26, 2009 at 2:40 अपराह्न

    गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ

    —आपका हार्दिक स्वागत है
    गुलाबी कोंपलें

  2. जनवरी 26, 2009 at 4:36 अपराह्न

    गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ !

  3. जनवरी 26, 2009 at 7:31 अपराह्न

    आप को गणतंत्र दिवस की बहुत बहुत शुभकामनाएं !!

  4. alpana verma said,

    जनवरी 27, 2009 at 7:27 पूर्वाह्न

    ये मज़हबी सरहद कब और किसने बनाई

    सच में यह सवाल ही रह गया है —-ऐसा kab aur क्यूँ हुआ?

    गणतंत्र दिवस की शुभकामनायें ,महक.

  5. जनवरी 27, 2009 at 10:57 पूर्वाह्न

    वाह ………क्या बात कही है
    ये मजहबी सरहद किसने बनाई ………….
    शायद मेरे, आप और हमारे जैसे ही किसी सिरफिरे नें बनाई होगी

  6. rashmi prabha said,

    जनवरी 27, 2009 at 6:39 अपराह्न

    jisne bhi banaai ho,hum mita sakte hain,par?!

  7. ARVI'nd said,

    जनवरी 28, 2009 at 6:06 पूर्वाह्न

    SAHI KAHA AAPNE KABHI PANKSHI BANAKAR AASMAAN ME UDNE KO JI CHAHTA HAI,
    KABHI KABHI BICHDE HUYE SAATHI SE PHIR MILNE KO JI CHAHTA HAI

  8. paramjitbali said,

    जनवरी 30, 2009 at 5:27 पूर्वाह्न

    बहुत सही कहा-

    ये मज़हबी सरहद कब और किसने बनाई


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