न आना इस देस

वैसे तो जब भी हमे अपने पेशेंट और ड्यूटी से फुर्सात मिलतीं है,हम टीवी से चिपक जाते है |

ख़ास कर कलर्स चॅनेल पे,हमारी गाड़ी रुकी होती है|’ बालिका वधूसे लेके आखरी सीरियल

 जाने क्या बात हुईतक सभी किरदारों के नाम याद है हमे | अर्र मगर हम ज़्यादा नही देखते,

कहानी मया से पूछ लेते है🙂 |

 

जिस कलर्स से हम नज़रे नही हटती,आज कल एक प्रोमो देख के चॅनेल बदल जाता है |

वो प्रोमो है नये  . , ‘ आना इस देसलाडोका | .

 

उस में एक नव जन्मी बच्ची को दूध से भरे हंडे में डुबो कर समधी दी जाती है|

इतने सारे लोग जमा होते है,जैसे की कोई उत्सव हो,और एक चिलाता है ,

अगले साल छोरा | वो कहते है अब भी एक गाव है जहा  लड़की का जानम लेना

अपराध   से कम नही |

 

हम देख भी ना सके ,क्या ऐसा सच में होता था,या होता है ? कहा है वो गाव ?

अगर सच में ऐसा है तो क़ानून कुछ क्यूँ नही करता ? या फिर से  ये चॅनेल वाले

बस अपनी टी . आर . पी  बढाने के लिए नया सामान लाए है?

12 टिप्पणियाँ

  1. rashmi prabha said,

    फ़रवरी 5, 2009 at 3:09 अपराह्न

    aisi jagah hai,aise log bhi hain………
    kaanun, andha hai n?

  2. फ़रवरी 5, 2009 at 3:13 अपराह्न

    कन्या भ्रूण हत्या की घटनाएं हरयाणा , राजस्थान में सैंकडों हुई हैं. आज भी समाज दो बिल्कुल विरोधी विचार धाराओं की कैद में है. दूर दर्शन तो बाजारू है. उसे भले-बुरे से नहीं अपनी दूकान लगाने-चलाने से मतलब है. आप खुशकिस्मत हैं कि आपने बालिका वधु का सच नहीं भोग. मैंने ऐसी कई घटनाएं देखी हैं.

  3. विनय said,

    फ़रवरी 5, 2009 at 4:35 अपराह्न

    very good work!

  4. फ़रवरी 5, 2009 at 9:04 अपराह्न

    उस में एक नव जन्मी बच्ची को दूध से भरे हंडे में डुबो कर समधी दी जाती है|
    इतने सारे लोग जमा होते है,जैसे की कोई उत्सव हो,और एक चिलाता है ,
    अगले साल छोरा | वो कहते है अब भी एक गाव है जहा लड़की का जानम लेना
    अपराध से कम नही |
    ओर कोई विरोध नही, कोई मना नही करता इन्हे??

  5. ramadwivedi said,

    फ़रवरी 6, 2009 at 5:38 पूर्वाह्न

    अत्यन्त मार्मिक ,अत्यन्त दुखद…पर ऐसा बहुत होता है। सृष्टि का संतुलन बिगड़ रहा है इसलिए भविष्य में बलात्कार जैसी घटनाएं बढ़ जाएंगी या फिर बहुपतिवाद की प्रथा आ जाएगी। इंसान अपने लिए खुद ही खाई खोद रहा है, अपनी मृत्यु का सामान खुद ही तैयार कर रहा है। इक्कीसवीं सदी सभ्यता की ओर जा रही है य पशुता की ओर? निश्चित ही ऐसे लोग समाज के लिए कलंक हैं,इन्हें कठोर से कठोर सज़ा मिलनी चाहिए ।

  6. rachnadesign said,

    फ़रवरी 6, 2009 at 6:33 पूर्वाह्न

    mehak
    it still happens at many places not just the way the promos show but it does . we had maid who was from bihar , she used to work as a midwfe in a goverment hospital before coming to delhi . she used to tell us that she quit her job because many people would pay midwife money to strangulate the new born girl child . its a harsh reality of life .
    and i think the ceo of colours channel is a woman who is trying to highlight woman problems in most of the programs on color tv. it may be giving her great TRP but think on broader plain , even if one soul gets changed by seeing such things its worth making the serial
    love
    rachna

  7. फ़रवरी 6, 2009 at 7:57 पूर्वाह्न

    बहूत मार्मिक……….अगर ऐसा आज भी कहीं होता है तो अत्यन्त दुःख की बात है. पर अगर सच बोलें तो टीवी वाले इसको अपनी टी आर पी बढ़ने की लिए ही कर रहे होंगे, उन्हें विषय की गहराई से कोई मतलब नही होगे

  8. ranju said,

    फ़रवरी 6, 2009 at 8:11 पूर्वाह्न

    अभी तो इसके प्रोमो देखने से ही बहुत दर्द महसूस होता है ..बाकी क्या दिखाते हैं यह तो बाद में देखा जाएगा .बुरा लगा है अभी तो यह सब देख कर

  9. rajneesh said,

    फ़रवरी 6, 2009 at 10:44 पूर्वाह्न

    yeh bahut hi achi site lagti hain hindi bhashi logo ke liye

  10. Rewa Smriti said,

    फ़रवरी 6, 2009 at 3:43 अपराह्न

    Mehek, TV per kuch achhe programms to aate hain but samayabhav ke karan main isse dur hi rahti hun. Kabhi kabhi lagta hai TV problem bhale hi dikha deti hai lekin solution nahi, or jis natakiya dhang se kisi solution ko dikhati hai wo sach or practical life se shayad kafi dur nazar aati hai.

    Anyway, The parents kill their own children, and these are the people who would visit the temple or all the deities and pray for shakti but don’t even hesitate to kill a girl child!

  11. फ़रवरी 6, 2009 at 4:27 अपराह्न

    सही बात तो यही है सब टी आर पी के लिए हो रहा है।बस क्माई करते रहों।

  12. alpana said,

    फ़रवरी 11, 2009 at 7:40 पूर्वाह्न

    Main to serials dekhti hi nahin…maluum nahin ..lekin yah padh kar bahut dukh hua.samjh nahin aata aiseee mansikta walon ka kya kiya jaye?


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