राह के किनारे

आसमान से गिरती ये बूँदो की झिम झिम
मन में उमड़े सारे ख़यालों को भिगो गयी

धूल जाए सारी यादें कही साजिश तो नही |
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राह के किनारे बहुत से घर देखे है
उन घरों तक पहुँचे ऐसी कोई राह नही |

13 टिप्पणियाँ

  1. seema gupta said,

    फ़रवरी 7, 2009 at 12:26 अपराह्न

    hi, mehak
    very touching words ya.

    regards

  2. फ़रवरी 7, 2009 at 1:04 अपराह्न

    बहुत सुंदर भाव लिये है आप की कविता.
    धन्यवाद

  3. Pratap said,

    फ़रवरी 7, 2009 at 2:01 अपराह्न

    राह के किनारे बहुत से घर देखे है
    उन घरों तक पहुँचे ऐसी कोई राह नही |

    वाह!! क्या खूबसूरत लिखा है..

  4. rashmi prabha said,

    फ़रवरी 7, 2009 at 2:26 अपराह्न

    दिल की गहराइयों की दास्ताँ निचोड़कर रख दिया है….
    दिल को छूते हैं

  5. विनय said,

    फ़रवरी 7, 2009 at 3:07 अपराह्न

    मेरे में दबी बात लिखी है


    चाँद, बादल और शाम

  6. फ़रवरी 7, 2009 at 4:24 अपराह्न

    राह के किनारे बहुत से घर देखे है
    उन घरों तक पहुँचे ऐसी कोई राह नही |

    wonderful words………..
    kuch hi shabdon me kahi………poori ki poori daastaan

  7. फ़रवरी 8, 2009 at 10:32 पूर्वाह्न

    क्या खूब “राह के किनारे बहुत से घर देखे है/उन घरों तक पहुँचे ऐसी कोई राह नही ”
    लाजवाब….और त्रिवेणी का क्लाइमेक्स तो “धूल जाए सारी यादें कही साजिश तो नही”
    बहुत सुंदर

  8. फ़रवरी 10, 2009 at 5:51 पूर्वाह्न

    बहुत सुन्दर व भावपूर्ण रचना है।बधाई स्वीकारें।

    “राह के किनारे बहुत से घर देखे है
    उन घरों तक पहुँचे ऐसी कोई राह नही ”

  9. alpana said,

    फ़रवरी 11, 2009 at 7:36 पूर्वाह्न

    bahut sundar…raah bhi mil jayegi

  10. preeti tailor said,

    फ़रवरी 11, 2009 at 10:36 पूर्वाह्न

    raah dhundhane ke liye bas ek kadam badha do rasta khud b khud banta jayega

  11. Rewa Smriti said,

    फ़रवरी 12, 2009 at 3:14 अपराह्न

    राह के किनारे बहुत से घर देखे है
    उन घरों तक पहुँचे ऐसी कोई राह नही |

    Bahut khub….
    Talash karne se ek raah mil hi jayega
    jo us ghere se aage bhi bahut dur le jayega!

  12. फ़रवरी 12, 2009 at 7:33 अपराह्न

    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति …

  13. ASHWANI R.DEV(LUCK) said,

    फ़रवरी 20, 2009 at 2:55 अपराह्न

    manjil hai to raste bhi honge
    badal hai to boonde bhi hogi
    nadiya hai to kal_kal bhi hogi
    raat hai to sitare bhi honge
    fhool hai to kante bhi honge
    agar ankho se parda hat jaye
    to duniya mein sare najare honge
    dekhna dev ke in sabdo se ache ache pagal honge
    bas samjhne ki baat hai, lekin hmare ulte _pulte sabdo me pura saaj hai
    hmari umar 19 ke aas pass hai
    ham jante hai ki kuch log kehte hai, hamari ye roj ki bakwas hai
    sayad hame apni galtiyon se hi sikhne ka andaj hai..
    sory mam i am not writer baut i am ‘ter’


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