बासुरी के स्वर सी

बासुरी के स्वर सी थिरकति होठों पर
मन को भेदती कोई तीर सी
पानी की बूंदे बन छलकती पत्तियॉं की छोर से
बच्चा बन लिपटती मा की गोद में
चाँदनी सी बरसती पूनम रात
ल़हेर पे उभरती लकीर सी
आँगन में फूल सी महकती बिखरती
सावन के झूलों पे उँचा झूलती
चाँद देखने खिड़की पे खड़ी हो
घंटो आईना निहारती वो
सुरीली नज़्म बजने लगती अपने आप
जब तेरी याद, मन का कोई तार
उंगलियों से छेड़ जाती है ………

13 टिप्पणियाँ

  1. फ़रवरी 13, 2009 at 4:44 पूर्वाह्न

    दिल में कुछ-कुछ होता है,
    जब याद किसी की आती है।
    भीतर ही भीतर रोता मन,
    सारी सुध-बुध खो जाती है।।
    जब याद किसी की आती है।

  2. seema gupta said,

    फ़रवरी 13, 2009 at 5:06 पूर्वाह्न

    सुरीली नज़्म बजने लगती अपने आप
    जब तेरी याद, मन का कोई तार
    उंगलियों से छेड़ जाती है ………
    ” very soft and touching expressions….loved reading them”

    Regards

  3. ranjana said,

    फ़रवरी 13, 2009 at 12:00 अपराह्न

    कोमल भावनाओ को बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति दी है आपने…वाह !!

  4. rashmi prabha said,

    फ़रवरी 13, 2009 at 12:05 अपराह्न

    बांसुरी की तान – सी रचना है……

  5. फ़रवरी 13, 2009 at 1:46 अपराह्न

    सुंदर अभिव्यक्ति.

  6. फ़रवरी 13, 2009 at 5:45 अपराह्न

    रसात्मक और सुंदर अभिव्यक्ति

  7. vish said,

    फ़रवरी 14, 2009 at 6:06 पूर्वाह्न

    TO shuru karen….sabse pahle to achhi post ke liye dhair sari badhae….!! aapki post aapke nam ke anusar mahek rahi hai……!! Valentine ki shubhkamnayen or Ha Mere blog pare aapko jaroor aaana hai…,or achha sa comment bhi karna hai…….vaise aap aalochna bhi karne ke liye swatantra hai….

    Jai Ho Mangalmay Ho

  8. alpana said,

    फ़रवरी 14, 2009 at 6:54 अपराह्न

    sundar rachana Mahak..

    ‘unki’ yaad surili nazm hi to hoti hai..khuub!
    Valentine day ki shubhkamnayen Mahak.

  9. Himalaya said,

    फ़रवरी 14, 2009 at 7:41 अपराह्न

    bahut hi achha laga ise padkar, achhi abhivyakti hai man ki……
    aap bahut achha likhte hain…..Zaari rakhen…………

  10. फ़रवरी 15, 2009 at 3:32 अपराह्न

    सुरम्य रचना !
    शब्दों में सचमुच भावो का संगीत पिरो दिया है आपने !

  11. swapn said,

    फ़रवरी 15, 2009 at 4:04 अपराह्न

    bahut surili aur nashili rachna, sunder badhaai.

  12. Rewa Smriti said,

    फ़रवरी 17, 2009 at 5:08 अपराह्न

    सुरीली नज़्म बजने लगती अपने आप
    जब तेरी याद, मन का कोई तार
    उंगलियों से छेड़ जाती है ………

    Lovely way of expressing the feelings!🙂

  13. Tarun said,

    फ़रवरी 24, 2009 at 9:06 पूर्वाह्न

    ek nazm
    aur kitne bhaav🙂

    -tarun


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