इश्क़ में जब

इश्क़ में जब लेन देन की बात निकल आए
वफ़ायें सारी नकद हो ,तोहमते उधार छोड़ना |

=================================

आदते बदली जा सकती है जो कोई ज़िद्द पे उतर आए
ये नामुमकिन है गर किसी को इश्क़ की लत लग जाए

================================
हमारी बोलने की आदत से
परेशां होते हो तुम
और गुस्सा करके
चले जाते हो कही
आज देखो हम मौन है
और हमारे आसपास बिखरी
अनगिनत खामोशिया
फिर भी तुम्हारी गुस्सा करने की
अदा का इंतज़ार बाकि
शायाद अपनी अपनी आदत की बात है …….

17 टिप्पणियाँ

  1. vandana said,

    फ़रवरी 16, 2009 at 6:27 पूर्वाह्न

    bahut khoob……..seedhe dil se nikli rachna……………….har shabd mein jadoo bhara hai.

  2. ranju said,

    फ़रवरी 16, 2009 at 6:30 पूर्वाह्न

    शायद अपनी अपनी आदत की बात है ……. सही कहा महक आपने सुंदर अभिव्यक्ति

  3. rashmi prabha said,

    फ़रवरी 16, 2009 at 7:24 पूर्वाह्न

    हमारी बोलने की आदत से
    परेशां होते हो तुम
    और गुस्सा करके
    चले जाते हो कही
    आज देखो हम मौन है
    और हमारे आसपास बिखरी
    अनगिनत खामोशिया
    फिर भी तुम्हारी गुस्सा करने की
    अदा का इंतज़ार बाकि
    शायाद अपनी अपनी आदत की बात है …….
    ……..jawaab nahi is aadat ki ada ka

  4. alpana said,

    फ़रवरी 16, 2009 at 9:56 पूर्वाह्न

    ‘वफ़ायें सारी नकद हो ,तोहमते उधार छोड़ना |’
    kya gazab ki baat likhi hai!

    –kavita bhi khuuub likhi hai!!!!

  5. Devesh said,

    फ़रवरी 16, 2009 at 10:31 पूर्वाह्न

    बहुत सुंदर रचना .
    बधाई
    इस ब्लॉग पर एक नजर डालें “दादी माँ की कहानियाँ ”
    http://dadimaakikahaniya.blogspot.com/

  6. Neeraj said,

    फ़रवरी 16, 2009 at 1:07 अपराह्न

    मन के भाव बड़े कलात्मक रूप से आपकी रचना में चले आए हैं…वाह.

    नीरज

  7. फ़रवरी 16, 2009 at 1:44 अपराह्न

    aapke shabd mahak chod dete hain seedhe Dil tak. is baar ki shaayri wkyi kaabile-tariif hai…

  8. akshatvichar said,

    फ़रवरी 16, 2009 at 3:34 अपराह्न

    हमारे आसपास बिखरी
    अनगिनत खामोशिया

  9. फ़रवरी 16, 2009 at 4:24 अपराह्न

    हमेशा की तरह अनूठा अंदाज़ मैम…..
    फिर भी तुम्हारी गुस्सा करने की
    अदा का इंतज़ार बाकि
    शायाद अपनी अपनी आदत की बात है …….
    सच

  10. फ़रवरी 16, 2009 at 6:47 अपराह्न

    वाह क्य अंदाज है, बहुत सुंदर.
    धन्यवाद

  11. फ़रवरी 17, 2009 at 2:43 अपराह्न

    इससे आगे कि दास्ताँ सुनाने कि गुस्ताखी करता हूँ…
    “प्यार में अब कहाँ वो शरारत रह गई,
    अब कहाँ वो छुअन वो हरारत रह गई,
    लैला और शिरी के किस्से पुराने हो चले,
    अब कहाँ वो शोखियाँ वो नजाकत कर गई.
    प्यार किया जैसे अहसान हो भला,
    शुक्रिया तो गया शिकायत रह गई..”

  12. Rewa Smriti said,

    फ़रवरी 17, 2009 at 5:03 अपराह्न

    आदते बदली जा सकती है जो कोई ज़िद्द पे उतर आए
    ये नामुमकिन है गर किसी को इश्क़ की लत लग जाए

    Beautiful, and I love it.

  13. फ़रवरी 18, 2009 at 6:06 पूर्वाह्न

    बहुत खूब कहा है आपने, दिल को छू गयी पंक्तियॉं। और हॉं, उपर दिया शेर भी लाजवाब है।

  14. फ़रवरी 18, 2009 at 7:02 पूर्वाह्न

    छोटी छोटी बेमतलब की बातों में ही
    जिंदगी कभी कभी बहुत बड़ी बड़ी ख़ुशिया
    रख कर भूल जाती है !
    वह प्रेम ही है
    जो इन खुशियों को ढूढ़ पाता है !
    भाग्यशाली है वे
    जो इसमें डूब सके है !

  15. फ़रवरी 20, 2009 at 8:26 पूर्वाह्न

    वाह वाह लाजवाब लिखा है
    सुंदर अभिव्यक्ति

  16. ASHWANI R.DEV(LUCK) said,

    फ़रवरी 20, 2009 at 11:39 पूर्वाह्न

    aadte waqt pe na badli jaye to jarurate ban jati hai
    hasrate badhjaye to manjile ban jati hai
    jab raho me kisi ka intjar satane lage
    to yade ban jati hai, dev ki ada yahi hai
    kisi ko samajh aur kisi ko na samajh aati hai


एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: