होठो पे मुस्कुराता है

कली सज रही नई पंखुडियों से प्रति दिन
फूल बनने के ख्वाब पनपने लगे है दिल में |
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भीगी रेत को हाथों से छु लिया
वो एहसास वैसा ही था जैसे स्पर्श तुम्हारा |
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होठो पे मुस्कुराता है पल पल
माँ स्वाद तेरे हाथों का |

24 टिप्पणियाँ

  1. anil kant said,

    फ़रवरी 24, 2009 at 6:23 पूर्वाह्न

    माँ स्वाद तेरे हाँथों का ….वाह महक जी वाह

    मेरी कलम – मेरी अभिव्यक्ति

  2. विनय said,

    फ़रवरी 24, 2009 at 6:32 पूर्वाह्न

    सुन्दर पंक्तियों का सुख प्राप्त हुआ


    तख़लीक़-ए-नज़र

  3. seema gupta said,

    फ़रवरी 24, 2009 at 6:37 पूर्वाह्न

    भीगी रेत को हाथों से छु लिया
    वो एहसास वैसा ही था जैसे स्पर्श तुम्हारा
    ” bhut meetha sa ehsaas..”
    Regards

  4. Dr Anurag said,

    फ़रवरी 24, 2009 at 6:49 पूर्वाह्न

    होठो पे मुस्कुराता है पल पल
    माँ स्वाद तेरे हाथों का |
    bahut khoob….

  5. संगीता पुरी said,

    फ़रवरी 24, 2009 at 7:25 पूर्वाह्न

    होठो पे मुस्कुराता है पल पल
    माँ स्वाद तेरे हाथों का |
    मां होती ही है ऐसी … बहुत सुंदर लिखा है।

  6. rashmi prabha said,

    फ़रवरी 24, 2009 at 7:26 पूर्वाह्न

    aapki rachna muhabbat ke paigam liye hoti hai…….

  7. Tarun said,

    फ़रवरी 24, 2009 at 9:04 पूर्वाह्न

    hotho pe muskurata hai pal pal
    maa swaad tere haatho ka

    very true…
    -tarun

  8. alpana said,

    फ़रवरी 24, 2009 at 10:02 पूर्वाह्न

    होठो पे मुस्कुराता है पल पल
    माँ स्वाद तेरे हाथों का |
    Wah!
    bahut khuub Mahak..

  9. फ़रवरी 24, 2009 at 10:02 पूर्वाह्न

    अच्‍छी है…

  10. ARVI'nd said,

    फ़रवरी 24, 2009 at 10:23 पूर्वाह्न

    dil ko chhu gai aapki ye chhoti magar pyari rachna…..

  11. shobha said,

    फ़रवरी 24, 2009 at 10:29 पूर्वाह्न

    सुन्दर लिखा है।

  12. ranju said,

    फ़रवरी 24, 2009 at 12:56 अपराह्न

    होठो पे मुस्कुराता है पल पल
    माँ स्वाद तेरे हाथों का |

    सबसे बढ़िया बात कही आपने महक बहुत सुन्दर

  13. फ़रवरी 24, 2009 at 1:28 अपराह्न

    भीगी रेत को हाथों से छु लिया
    वो एहसास वैसा ही था जैसे स्पर्श तुम्हारा

    बहुत बहुत खूबसूरत शेर……….

    जान उडेल दी है आपने इसमें

  14. ranjana said,

    फ़रवरी 24, 2009 at 2:31 अपराह्न

    WWWWAAAAAAHHHHHH

  15. फ़रवरी 24, 2009 at 4:08 अपराह्न

    होठो पे मुस्कुराता है पल पल
    माँ स्वाद तेरे हाथों का |
    वाह वाह बहुत सुंदर लगी आप की यह कविता.
    धन्यवाद

  16. फ़रवरी 24, 2009 at 5:36 अपराह्न

    बहुत सुँदर !

  17. फ़रवरी 25, 2009 at 9:38 पूर्वाह्न

    दिल में उतर जाने वाले शेर कहे हैं आपने। बधाई।

  18. फ़रवरी 25, 2009 at 5:37 अपराह्न

    अच्छी पंक्तियाँ…हमेशा की तरह।

  19. tasliim said,

    फ़रवरी 26, 2009 at 8:01 पूर्वाह्न

    बहुत ही खूबसूरत शेर हैं।

  20. फ़रवरी 26, 2009 at 8:40 पूर्वाह्न

    बहुत बढ़िया!!

  21. फ़रवरी 26, 2009 at 3:01 अपराह्न

    bhul gya sabkuchh umar ke is padav me,kintu yaad aksar aa jati he maa ke hantho ka bana bhojan

  22. Poonam said,

    फ़रवरी 27, 2009 at 5:53 पूर्वाह्न

    सुन्दर रचना

  23. Rajeev Karunanidhi said,

    फ़रवरी 28, 2009 at 4:45 पूर्वाह्न

    सुन्दर अभिव्यक्ति. अच्छा लगा. आभार.

  24. preeti tailor said,

    मार्च 19, 2009 at 10:06 पूर्वाह्न

    bahut khub …


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