चांदनी के फूल

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चांदनी  के फूल महक रहे सारी कायनात में
नीलाई की चादर पर रौशनी बिखरी हुयी

मेजबानी करने की चाँद की बारी है इस बार |

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 टोकरी भर खिलोने लायी खिलोनेवाली
माँ सी दिखती गुडिया भी उस में

ममता का हाथ फेरती गर जान होती |

12 टिप्पणियाँ

  1. neeshoo said,

    मार्च 14, 2009 at 2:29 अपराह्न

    bahut khoob .

  2. मार्च 14, 2009 at 3:49 अपराह्न

    बहुत ख़ूबसूरत रचना . धन्यवाद.

  3. मार्च 14, 2009 at 4:54 अपराह्न

    bhav-pranav.

  4. himanshu said,

    मार्च 14, 2009 at 4:57 अपराह्न

    त्रिवेणी लिखने की परंपरा में एक सुन्दर रचना । धन्यवाद

  5. मार्च 14, 2009 at 6:34 अपराह्न

    खूबसूरत रचना है, कम में दम है !! बधाई .

  6. मार्च 14, 2009 at 9:10 अपराह्न

    ममता का हाथ फेरती गर जान होती |
    बस शव्द नही इस सुंदर सी रचना के लिये , सभी शब्द बोने से लगते है.इस रचना के सामने
    धन्यवाद

  7. ranju said,

    मार्च 15, 2009 at 3:35 पूर्वाह्न

    दोनों ही बहुत सुन्दर बढिया भाव

  8. मार्च 15, 2009 at 7:00 पूर्वाह्न

    टोकरी भर खिलोने लायी खिलोनेवाली
    माँ सी दिखती गुडिया भी उस में

    ममता का हाथ फेरती गर जान होती |

    कुछ ही laaino में gahri बात लिख दी है……
    पूरा का पूरा sansaar ही तो simit आता है माँ की yaadon में

  9. मार्च 15, 2009 at 9:09 पूर्वाह्न

    aapki triveni rooh mein sarsarati hai

  10. alpana verma said,

    मार्च 15, 2009 at 12:26 अपराह्न

    arrey waah!!!!!!!!!!

    Mahak bahut hi sundar triveniyan likhi hain..dusri wali jyada pasand aayi…

  11. jitendra singh naruka said,

    मार्च 29, 2009 at 10:24 पूर्वाह्न

    very lovely
    heart touching
    u r beautiful in imotions and thinking
    reallyyyyyyyyyy
    impressed


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