खामोशियों ने…..

खामोशियों ने दिल में डेरा जमा लिया
ज़ुबां अलसाई हुयी शब्दों के मौन से |

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धैर्य हर किसी के बागीचे में नहीं उगता
वो कड़वा पौधा है जिसे सफलता के मीठे फल लगते है
वो वही पनपता है जहा अपने लक्ष को पाने की जिद्द हो |
unnown

9 टिप्पणियाँ

  1. मार्च 16, 2009 at 5:49 पूर्वाह्न

    बहुत खूबसूरत !

  2. ranju said,

    मार्च 16, 2009 at 6:07 पूर्वाह्न

    बहुत सुन्दर लगा यह

    खामोशियों ने दिल में डेरा जमा लिया
    ज़ुबां अलसाई हुयी शब्दों के मौन से |

  3. मार्च 16, 2009 at 6:12 पूर्वाह्न

    धैर्य हर किसी के बागीचे में नहीं उगता
    वो कड़वा पौधा है जिसे सफलता के मीठे फल लगते है
    वो वही पनपता है जहा अपने लक्ष को पाने की जिद्द हो
    बहूत खूबसूरत है …………..
    सत्य और सार्थक

  4. मार्च 16, 2009 at 8:13 पूर्वाह्न

    ज़ुबां अलसाई हुयी शब्दों के मौन से…..हम तो आपके इन मिस्‍रों-इन नायाब मिस्‍रों के कायल हो गये हैं…कहाँ से सजाती-संवारती हैं आप इन्हें?

  5. Rewa Smriti said,

    मार्च 16, 2009 at 1:56 अपराह्न

    Beautiful poem!

    But, what about those ped jo unfortunately kabhi phal nahi deta hai? Jinki her ek tahniyan banjh hoti hai? Mehek kya kabhi inki peeda ko mahsus kiya hai? Ek baar mahsus karna shayad aapse ek nayi poem rach jaye.

  6. मार्च 16, 2009 at 4:55 अपराह्न

    बहुत ही सुंदर,
    धन्यवाद

  7. rashmi prabha said,

    मार्च 16, 2009 at 5:48 अपराह्न

    धैर्य हर किसी के बागीचे में नहीं उगता
    वो कड़वा पौधा है जिसे सफलता के मीठे फल लगते है
    वो वही पनपता है जहा अपने लक्ष को पाने की जिद्द हो |
    …… bahut achha laga ise padhna aur ise mahsus karna

  8. कुश said,

    मार्च 17, 2009 at 5:18 पूर्वाह्न

    बहुत ही सुंदर.. वाकई

  9. rachna said,

    मार्च 17, 2009 at 5:30 पूर्वाह्न

    mehak wonderful thoughts


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