गुजरे लम्हों की याद दिलाई किसने

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गुजरे लम्हों की याद दिलाई किसने

बुझी  शमा दोबारा सुलगाई किसने

 

चिंगारी से भड़केंगे शोले हजारों देखना

विद्रोह की आग दिल में जलाई किसने

 

अमनसफरनामा शुरू हुआ है अभी

हिंसा की मूरत , बिच राह बनाई  किसने

 

बस और नहीं जानमाल पर हमला

खून से सनी काली रत भुलाई किसने

 

वार करके भागने की फितरत कायर

चोटो पर मरहम कभी लगाईं  किसने

 

सुधर जाए इससे पहले के सब ख़त्म हो

के रब पूछे ये स्नेह धारा बनाई  किसने

23 टिप्पणियाँ

  1. mamta said,

    मार्च 17, 2009 at 6:20 पूर्वाह्न

    यूँ तो सभी शेर अच्छे है पर आखिरी वाला बहुत अच्छा लगा ।

  2. Dr Anurag said,

    मार्च 17, 2009 at 6:31 पूर्वाह्न

    bahutt achhe ……kaisi hai aap?

  3. मार्च 17, 2009 at 7:05 पूर्वाह्न

    ग़ज़ल के सब शेर एक दूजे से अलग मूड के, सबने अलग जादू जगाया.

  4. alpana verma said,

    मार्च 17, 2009 at 7:27 पूर्वाह्न

    aaj Mahak aap ne bahut dino baad gazal pesh ki hai.
    bahut hi sundar bhaav hain.
    sabhi sher achchey lagey.
    khaas yah laga-
    अमन- ओ – सफरनामा शुरू हुआ है अभी

    हिंसा की मूरत , बिच राह बनाई किसने

    bahut badhiya!great !

  5. ranju said,

    मार्च 17, 2009 at 7:28 पूर्वाह्न

    सुन्दरलगी आपकी यह रचना

  6. mehek said,

    मार्च 17, 2009 at 10:29 पूर्वाह्न

    aap sabhi ka shukran,hum bahut badhiya hai doc saab.

  7. मार्च 17, 2009 at 12:09 अपराह्न

    चिंगारी से भड़केंगे शोले हजारों देखना
    विद्रोह की आग दिल में जलाई किसने

    Aaj aapki gazal main ek nayee talkhi nazar aa rahi hai.
    Yeh andaaj bhi bahoot sundar hai

  8. मार्च 17, 2009 at 12:53 अपराह्न

    चिंगारी से भड़केंगे शोले हजारों देखना

    विद्रोह की आग दिल में जलाई किसने……

    bahut sundaer… shayad mai pahali baar aapake blog par aaya hoon aakar kaaphi aachha laga… sach gujare lamhon ki baaten ….aage koi shab hi nahi kya likhu …ho sakata hai aapne mera dard mahshush kar liya ho ..

  9. rashmi prabha said,

    मार्च 17, 2009 at 1:18 अपराह्न

    अमन- ओ – सफरनामा शुरू हुआ है अभी

    हिंसा की मूरत , बिच राह बनाई किसने
    …..aham prashn,bahut badhiyaa

  10. Vikrant said,

    मार्च 17, 2009 at 3:55 अपराह्न

    वार करके भागने की फितरत कायर

    चोटो पर मरहम कभी लगाईं किसने

    सुधर जाए इससे पहले के सब ख़त्म हो

    के रब पूछे ये स्नेह धारा बनाई किसने

    bahut khoob !!!!!!!!!

  11. puja said,

    मार्च 17, 2009 at 4:10 अपराह्न

    aaj ke mahaul par likhi khoobsoorat rachna.

  12. मार्च 17, 2009 at 5:37 अपराह्न

    वार करके भागने की फितरत कायर

    चोटो पर मरहम कभी लगाईं किसने

    सुधर जाए इससे पहले के सब ख़त्म हो

    के रब पूछे ये स्नेह धारा बनाई किसने
    वाह वाह जबाब नही सभी शॆर एक से बढ कर एक .
    धन्यवाद

  13. pallavi trivedi said,

    मार्च 17, 2009 at 5:57 अपराह्न

    बस और नहीं जानमाल पर हमला

    खून से सनी काली रत भुलाई किसने

    waah…bahut khoob.

  14. मार्च 17, 2009 at 7:20 अपराह्न

    गुजरे लम्हों की याद दिलाई किसने

    बुझी शमा दोबारा सुलगाई किसने

    सुन्दर .सोचने को मज़बूर करती रचना .

  15. मार्च 17, 2009 at 7:30 अपराह्न

    bahut hi sundar or bhaavpurna rachna… har lafz sochne par majboor karta hai ki “YE HAALAT HAMAARI BANAAYI KISNE….”

    “सुधर जाए इससे पहले के सब ख़त्म हो

    के रब पूछे ये स्नेह धारा बनाई किसने”
    🙂

  16. rohit said,

    मार्च 18, 2009 at 12:15 पूर्वाह्न

    सुधर जाए इससे पहले के सब ख़त्म हो

    के रब पूछे ये स्नेह धारा बनाई किसने
    Hello Mehak….khwais kafi bdai hai…per log sudherge kabhi, yeh aash kafi muskil hai, political parties kabhi sochigi muskil hai, ..per kahte hai na ki ummeid per dunia kayaam hai……Ammin

    Rohit

  17. मार्च 18, 2009 at 6:03 पूर्वाह्न

    बहुत सुंदर!!!

  18. Chandra Mohan Gupta said,

    मार्च 19, 2009 at 3:33 पूर्वाह्न

    चिंगारी से भड़केंगे शोले हजारों देखना
    विद्रोह की आग दिल में जलाई किसने

    जिसने भी जलाई, उसकी होली जले ऐसी ही हमारी कामना है और हम सब फिर धूमधाम से होली मनाये .

    कुलमिलाकर ग़ज़ल सुन्दर और भावपूर्ण है.

    चन्द्र मोहन गुप्त

  19. preeti tailor said,

    मार्च 19, 2009 at 10:17 पूर्वाह्न

    achchhi rachana

  20. Rewa Smriti said,

    मार्च 20, 2009 at 3:29 अपराह्न

    “गुजरे लम्हों की याद दिलाई किसने
    बुझी शमा दोबारा सुलगाई किसने”

    Beautiful!

  21. shatrughan sharma said,

    जनवरी 23, 2014 at 11:49 पूर्वाह्न

    wah ji wah


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