कशिश

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कशिश खिचाव

या सिर्फ लगाव

मत पूछो

हमें नहीं मालूम

हाँ हाँ

दिल का गीत गुनगुनाते है

लफ्ज़ नहीं मालूम

पहली बार हुआ

खुद की धड़कन ,

धीमी रफ्तार नब्ज़ 

की चाल

नहीं पहचानी

कभी सुना भी

तो नहीं था

एक मोड़  ऐसा होगा

जहा हम गुमशुदा

और कोई दूजा अपना होगा …..

17 टिप्पणियाँ

  1. rachnasingh said,

    मार्च 19, 2009 at 8:19 पूर्वाह्न

    शायद अगला मोड़ फिर मिलवा दे , जिन्दगी इसी का नाम हैं , लिखती रहो

  2. ranju said,

    मार्च 19, 2009 at 8:21 पूर्वाह्न

    एक मोड़ ऐसा होगा/जहाँ हम गुमशुदा/और कोई दूजा अपना होगा …..यही कशिश कुछ तलाश की कोशिश जरी रखती है .सुन्दर लिखा है आपने महक

  3. मार्च 19, 2009 at 8:39 पूर्वाह्न

    वाह बहुत हसीन एहसास सिमटे हुवे है ये रचना
    कशिश खिचाव
    या सिर्फ लगाव
    मत पूछो
    वाकई एल पल ऐसा आता है जहां हम गम हो जाते हैं …….और बस वो ही वो होता है

  4. mark rai said,

    मार्च 19, 2009 at 8:50 पूर्वाह्न

    कभी सुना भी

    तो नहीं था

    एक मोड़ ऐसा होगा

    जहा हम गुमशुदा

    और कोई दूजा अपना होगा …..

    सुन्दर लिखा है आपने….

  5. मार्च 19, 2009 at 9:32 पूर्वाह्न

    वाह महक जी वाह आपकी कविता की महक बहुत ही लुभावनी है।

  6. मार्च 19, 2009 at 9:57 पूर्वाह्न

    विस्मयकारी !!

  7. preeti tailor said,

    मार्च 19, 2009 at 10:19 पूर्वाह्न

    ati sundar

  8. neeraj said,

    मार्च 19, 2009 at 11:43 पूर्वाह्न

    एक मोड़ ऐसा होगा
    जहा हम गुमशुदा
    और कोई दूजा अपना होगा

    वाह बहुत अच्छी रचना है ये आपकी…खूबसूरत ज़ज्बात से भरी…असरदार.
    नीरज

  9. Dr Anurag said,

    मार्च 19, 2009 at 2:38 अपराह्न

    एक मोड़ होता है है न इत्तेफाक शायद आपको मिल जाये …..

  10. मार्च 19, 2009 at 3:26 अपराह्न

    सधे शब्दों में गहन और सुन्दर अभिव्यक्ति……वाह !!!

  11. मार्च 19, 2009 at 4:09 अपराह्न

    बहुत सुन्दर!!

  12. मार्च 19, 2009 at 4:58 अपराह्न

    एक मोड़ ऐसा होगा

    जहा हम गुमशुदा

    और कोई दूजा अपना होगा …गहन गुम्फित रचना ,बधाई .

  13. मार्च 19, 2009 at 6:24 अपराह्न

    लाजवाब, बहुत ही सुंदर…
    धन्यवाद

  14. मार्च 19, 2009 at 8:28 अपराह्न

    बहुत सुन्दर!
    अपना खोना और दूजे को पाना यही तो प्यार है।
    घुघूती बासूती

  15. rashmi prabha said,

    मार्च 20, 2009 at 8:25 पूर्वाह्न

    पूरी रचना में एक अजीब सी कशिश है…….
    प्यार के अलग-अलग विम्बों को अच्छा प्रस्तुत करती हैं,
    कुछ पल को उसे जी लेता है पढ़नेवाला…..

  16. Rewa Smriti said,

    मार्च 20, 2009 at 3:26 अपराह्न

    एक मोड़ ऐसा होगा

    जहा हम गुमशुदा

    और कोई दूजा अपना होगा …..

    Bahut khub…But kuch bhi kah lo ek kashish dil mein hamesha rah jati hai!

  17. मार्च 7, 2010 at 11:49 पूर्वाह्न

    Dear Author
    I appreciate your metaphysical deep in your proses,well if you are lost and if others become your own then nothing wrong,this is a true philanthropy which this world needs!at every stage and age of your life course you will like distinct persons so carry on raving in your life,spreading the message of amnesty,peace and mutual liking [I hate the word love] your future is radiantly bright.Best of luck


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