पंखुडियां खिली

Image and video hosting by TinyPic

पंखुडियां खिली सूरज की रश्मि से

 

हवाएं झुमने लगी , फूल चूमने लगी

 

ओस की बूंदे थिरकने लगी

 

पत्ते डोलते बासुरी के स्वर पे

 

उन में एक खिलखिलाती हंसी

 

पिया वो ध्वनि पूरी सहर गूंजी थी …….

Every morning gives u opportunity,every evening asks u what u did with them….

15 टिप्पणियाँ

  1. neelima said,

    मार्च 24, 2009 at 11:13 पूर्वाह्न

    beautiful lines…

  2. alpana said,

    मार्च 24, 2009 at 11:44 पूर्वाह्न

    उन में एक खिलखिलाती हंसी

    पिया वो ध्वनि पूरी सहर गूंजी थी ..
    waah ! Mahak..bahut hi sundar panktiyan..apne aap mein purn !

  3. ranju said,

    मार्च 24, 2009 at 11:47 पूर्वाह्न

    पिया वो ध्वनि पूरी सहर गूंजी थी …….बहुत मीठी प्यारी बात सुन्दर

  4. मार्च 24, 2009 at 11:52 पूर्वाह्न

    ओस की बूंदे थिरकने लगी
    पत्ते डोलते बासुरी के स्वर पे

    Bahoot khoob……..
    Sundar sanyojan shabdon ka

  5. shobha said,

    मार्च 24, 2009 at 12:03 अपराह्न

    सुन्दर लिखा है।

  6. seema gupta said,

    मार्च 24, 2009 at 12:18 अपराह्न

    ओस की बूंदे थिरकने लगी

    पत्ते डोलते बासुरी के स्वर पे

    उन में एक खिलखिलाती हंसी
    पिया वो ध्वनि पूरी सहर गूंजी थी …….
    ” beautiful words and thoughts..”

    Regards

  7. sanjay vyas said,

    मार्च 24, 2009 at 3:12 अपराह्न

    subah ki poori taazgi samaa gayi hai in kaavya bimbon men!

  8. संगीता पुरी said,

    मार्च 24, 2009 at 5:33 अपराह्न

    बहुत बढिया लिखा है …

  9. p s rathore said,

    मार्च 24, 2009 at 7:03 अपराह्न

    सुन्दर कविता ! पढ़ कर ऐसा लगा जैसे सुबह की ताजा हवा में सांस ली हो ..

  10. मार्च 24, 2009 at 8:07 अपराह्न

    पंखुडियां खिली सूरज की रश्मि से

    हवाएं झुमने लगी , फूल चूमने लगी
    बहुत ही सुंदर भोर का सन्देश लाई है आप की यह कविता.
    धन्यवाद

  11. amarpankajjha said,

    मार्च 25, 2009 at 3:52 पूर्वाह्न

    Sapna to dekhana hi hai hamko.sunder dikhane ka sapna, khush hone ka sapna, duniya ko badalne ka sapna, teeno lok ko teen kadmo se naap lene ka sapna, duniya ko muthee men karne ka sapna .Sapna bas sapna .

  12. mamta said,

    मार्च 25, 2009 at 5:13 पूर्वाह्न

    बहुत ही प्यारी कविता और नीचे लिखी पंक्तियाँ तो बहुत ही सुंदर है ।

  13. Jayant said,

    मार्च 25, 2009 at 3:12 अपराह्न

    कम शब्दों में ज्यादा बात!!!

    वाह, वाह.

  14. मार्च 26, 2009 at 3:54 अपराह्न

    बहुत ही सुन्दर और मोहक अभिव्यक्ति …/

  15. AJIT PAL SINGH DAIA said,

    अप्रैल 2, 2009 at 6:28 अपराह्न

    OH !
    So beautiful ! u r writig in my way .my best wishes to u.
    Do visit my blog.
    —AJIT PAL SINGH DAIA


एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: