हया

कोई कह दे
उनकी निगाहों से
हमें इतने प्यार से
देखा न करें
शर्मो-हया के परदे का वजन
हमारी नाज़ुक पलके
सह न पायेगी …

30 टिप्पणियाँ

  1. seema gupta said,

    मार्च 25, 2009 at 3:32 पूर्वाह्न

    “oh simple super mehhak…”

    Regards

  2. jeetu said,

    मार्च 25, 2009 at 3:50 पूर्वाह्न

    bahut khoob…

    Carry on the goodwork.

    cheers

  3. मार्च 25, 2009 at 5:23 पूर्वाह्न

    एक पूरा अहसास!

  4. ranju said,

    मार्च 25, 2009 at 5:52 पूर्वाह्न

    सुन्दर एहसास

  5. mamta said,

    मार्च 25, 2009 at 6:15 पूर्वाह्न

    शर्मो-हया के परदे का वजन
    हमारी नाज़ुक पलके
    सह न पायेगी …

    वाह-वाह

    क्या खूब कहा है महक ।

  6. neeraj said,

    मार्च 25, 2009 at 6:33 पूर्वाह्न

    Simply Superb….

    Neeraj

  7. anil kant said,

    मार्च 25, 2009 at 6:48 पूर्वाह्न

    bahut hi achchhi panktiya hain aapki …..bahut achchhi lagin

  8. ShikhaDeepak said,

    मार्च 25, 2009 at 7:00 पूर्वाह्न

    क्या बात है। बहुत खूब।

  9. rashmi prabha said,

    मार्च 25, 2009 at 7:40 पूर्वाह्न

    वारी जाऊँ इस हया पे
    पर कुछ नहीं कहूँगी उनसे
    वरना इस हया का क्या होगा !

  10. मार्च 25, 2009 at 9:32 पूर्वाह्न

    बहुत खूबसूरत है नाज़ुकी.
    खूबसूरत kalpana है…….बहुत सुन्दर

  11. मार्च 25, 2009 at 4:56 अपराह्न

    शर्मो-हया के परदे का वजन
    हमारी नाज़ुक पलके
    सह न पायेगी …
    वाह भई जबाब नही , बहुत सुंदर
    धन्यवाद

  12. alpana said,

    मार्च 25, 2009 at 5:26 अपराह्न

    शर्मो-हया के परदे का वजन
    हमारी नाज़ुक पलके
    सह न पायेगी …
    waah!!! Mahak kya baat kahi hai!
    bahut hi sundar !

    • Mahesh said,

      मई 7, 2009 at 3:55 अपराह्न

      कोई कह दे
      उनकी निगाहों से
      हमें इतने प्यार से
      देखा न करें

      Waah!!!!! Wah Mahak Kya Baat Kahi Hai Bahut Khoob Kahi Hai…. Kya Sabd Piroye Hain..
      कोई कह दे
      उनकी निगाहों से
      हमें इतने प्यार से
      देखा न करें – Dhanyawad.!!

  13. Ketan said,

    मार्च 25, 2009 at 5:26 अपराह्न

    mehek ji.. qatl.. faqat qatl..🙂

  14. मार्च 25, 2009 at 6:49 अपराह्न

    आहहाहाहाहाहा…..कातिलाना

  15. Manoshi said,

    मार्च 25, 2009 at 7:43 अपराह्न

    सिर्फ़ आइकन से जो कहना चाह रही थी वो ज़ाहिर नहीं हो पाया। पढ़ कर एक मुस्कान अनायास ही आ गई थी चेहरे पर। सुंदर ख़याल, महक।

  16. preeti tailor said,

    मार्च 26, 2009 at 4:33 पूर्वाह्न

    pyar hona lazmi hota hai najakat gavah hoti hai ,
    ye khuda ki hi to nemat hai ki ye kayamat hoti hai ….

    pankhudiyonse halke jo ahsaas hote hai ,
    kantose tej jiski chubhan hoti hai ,
    jiske milne se saari kaynat hoti hai ,
    bas yehi to jindagiki amanat hoti hai …

  17. मार्च 26, 2009 at 6:40 अपराह्न

    महक जी
    पंक्तियाँ सुंदर और भावनात्मक हैं.
    मनोवैज्ञनिक भाव भी प्रतिबिंबित हुए.
    – विजय

  18. मार्च 27, 2009 at 9:23 पूर्वाह्न

    iise kahte hain…
    GAAGAR MEIN SAAGAR

  19. मार्च 27, 2009 at 1:36 अपराह्न

    कोई कह दे
    उनकी निगाहों से
    हमें इतने प्यार से
    देखा न करें
    शर्मो-हया के परदे का वजन
    हमारी नाज़ुक पलके
    सह न पायेगी …
    बहुत सुंदर रचना ,लाजवाब .

  20. Sameer Srijan said,

    मार्च 27, 2009 at 2:36 अपराह्न

    “इक लफ्जे मोहब्बत का अदना सा फ़साना है।
    सिमटे तो दिल आशिक, फैले तो ज़माना है।
    आंसू तो बहुत से है आँखों में जिगर लेकिन,
    बिंध जाये सो मोती है रह जाये तो दाना है।”
    बहुत खूब कहा आपने महक जी…..
    आभार….

  21. Pooja said,

    मार्च 29, 2009 at 12:38 अपराह्न

    Pehli baar aapke blog par aayi hun.aapki kavitayen padh kar man khush ho gaya.

  22. rohit said,

    मार्च 29, 2009 at 11:40 अपराह्न

    HI Mehak
    Wah Wah Wah Wah ..Or Kiyaaaaaaaaaaaaaaaa
    शर्मो-हया के परदे का वजन
    हमारी नाज़ुक पलके
    सह न पायेगी …

    Hey bhagwan In Nazook Paklo me hi to sansar basha karta hai…………..

    Mehak
    just can say wow!!!!!!

    Rohit

    rohit

  23. Rewa Smriti said,

    अप्रैल 1, 2009 at 1:13 अपराह्न

    शर्मो-हया के परदे का वजन
    हमारी नाज़ुक पलके
    सह न पायेगी …

    wah wah…
    Bahut khub!

  24. ramadwivedi said,

    अप्रैल 4, 2009 at 5:10 पूर्वाह्न

    शर्मो-हया के परदे का वजन
    हमारी नाज़ुक पलके
    सह न पायेगी …

    Bahut sundar khyaal… achhi prastuti……badhaayi🙂

  25. Maheep Saraf said,

    अप्रैल 9, 2009 at 9:18 पूर्वाह्न

    Bahut badhiya.. kya khoob kaha he…
    http://www.maheep.wordpress.com


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