बूंदों की खनक में

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  बूंदों की खनक में

ढूंढ़ती हूँ अक्सर

वो छुपा हुआ अक्स तेरा

तुम जब भी खिलखिलाते

जैसे बूंदे बजती थी

 

बरसात की बूंदे

हथेली पर लेकर

एक कोशिश करती हूँ 

उन्हें छुपाने की

ताकी बहते पानी संग

तुम भी बह जाओ

 

बूँद में तुझे देखना

खयाल अच्छा लगता है

जितनी बूंदे होती है

तेरी उतनी ही तस्वीरे

 

29 टिप्पणियाँ

  1. Rohit Jain said,

    अप्रैल 6, 2009 at 4:48 पूर्वाह्न

    बहुत खूबसूरत

  2. limit said,

    अप्रैल 6, 2009 at 4:54 पूर्वाह्न

    बरसात की बूंदे

    हथेली पर लेकर

    एक कोशिश करती हूँ

    उन्हें छुपाने की

    ताकी बहते पानी संग

    तुम भी न बह जाओ
    ” superb mehhak……like dit ya”

    Regards

    seema

  3. alpana said,

    अप्रैल 6, 2009 at 4:59 पूर्वाह्न

    बरसात की बूंदे

    हथेली पर लेकर

    एक कोशिश करती हूँ

    उन्हें छुपाने की

    ताकी बहते पानी संग

    तुम भी न बह जाओ

    kya baat hai Mahak!
    jis ko jyada chahtey hain usee ko khone ka sab se jyada dar laga rahta hai.
    bhaavon ko boondo ke zareeye sundrata se abhvyakt kiya hai.

    chitr bhi pyra lag raha hai,jaise booondon ko sambhaal rakhne ki koshish hai.

  4. ranju said,

    अप्रैल 6, 2009 at 5:16 पूर्वाह्न

    बहुत सुन्दर लगा यह ख्याल

    बूँद में तुझे देखना

    खयाल अच्छा लगता है

    जीतनी बूंदे होती है

    तेरी उतनी ही तस्वीरे

  5. अप्रैल 6, 2009 at 6:09 पूर्वाह्न

    आपकी हर तहरीर अच्छी होती है. यह भी सुन्दर है.

  6. अप्रैल 6, 2009 at 6:24 पूर्वाह्न

    सुन्दर!!

  7. अप्रैल 6, 2009 at 6:48 पूर्वाह्न

    वाह ……..क्या ख्याल है, क्या नजाकत है इस रचना मैं. बहुत बहुत दिल को छूने वाली है यह रचना…..बूंदों में देखना, बूंदों की खनक में महसूस करना……….सुन्दर ehsaas

  8. Dr Anurag said,

    अप्रैल 6, 2009 at 6:52 पूर्वाह्न

    बरसात की बूंदे

    हथेली पर लेकर

    एक कोशिश करती हूँ

    उन्हें छुपाने की

    ताकी बहते पानी संग

    तुम भी न बह जाओ

    उम्दा ख्याल …

  9. neeshoo said,

    अप्रैल 6, 2009 at 7:31 पूर्वाह्न

    क्या बात है , बहुत ही सुन्दर रचना पेश की है आपने । बधाई

  10. kavi kulwant said,

    अप्रैल 6, 2009 at 8:26 पूर्वाह्न

    bahut khoob

  11. Chandra Mohan Gupta said,

    अप्रैल 6, 2009 at 10:55 पूर्वाह्न

    बरसात की बूंदे
    हथेली पर लेकर
    एक कोशिश करती हूँ
    उन्हें छुपाने की
    ताकी बहते पानी संग
    तुम भी न बह जाओ

    सुन्दर भाव !
    अद्भुत ख्याल !!
    विलक्षण संरक्षण !!!

    चन्द्र मोहन गुप्त

  12. rachnasingh said,

    अप्रैल 6, 2009 at 11:27 पूर्वाह्न

    very nice

  13. sciblog said,

    अप्रैल 6, 2009 at 11:36 पूर्वाह्न

    प्रेम की सबसे बडी विशेषता यह है कि वह सकारात्मक सोच को प्रेरित करता है।
    ———-
    तस्‍लीम
    साइंस ब्‍लॉगर्स असोसिएशन

  14. अप्रैल 6, 2009 at 11:48 पूर्वाह्न

    बहुत सुन्दर रचना है।

  15. अप्रैल 6, 2009 at 12:50 अपराह्न

    आपका हर ख़याल और उसे बयान करने का हर अंदाज ख़ूबसूरत होता है.

  16. अप्रैल 6, 2009 at 1:45 अपराह्न

    WAAH !! Bahut bahut sundar….Bhaav man ko chhoo gaye…

  17. rashmi prabha said,

    अप्रैल 6, 2009 at 3:53 अपराह्न

    rimjhim bundon ki runjhun aur tumhara khyaal…….isse sundar,sondhi barsaat aur kya hogi !
    bahut hi bheene-bheene bhaw

  18. vijay said,

    अप्रैल 6, 2009 at 4:26 अपराह्न

    बहुत ही ख़ूब। जो कहूं सो कम है। सच में मुझे बहुत ही पसंद आई यह रचना

  19. Rewa Smriti said,

    अप्रैल 6, 2009 at 4:27 अपराह्न

    बरसात की बूंदे
    हथेली पर लेकर
    एक कोशिश करती हूँ
    उन्हें छुपाने की
    ताकी बहते पानी संग
    तुम भी न बह जाओ

    It’s simply beautiful Mehek!

  20. drymkaushik said,

    अप्रैल 6, 2009 at 4:35 अपराह्न

    बूँद में तुझे देखना
    अच्छा लगता है
    क्या बात है……. बहुत ही खूबसूरती से अपनी बात सुन्दर शब्दों में कही है बधाई हो

  21. anil kant said,

    अप्रैल 6, 2009 at 6:14 अपराह्न

    barsat ki boonde hatheli par lekar lambe pal guzar dena mujhe bhata hai …

    aapki rachna mujhe bahut pasand aayi

  22. अप्रैल 7, 2009 at 6:27 पूर्वाह्न

    बूँद में तुझे देखना
    खयाल अच्छा लगता है
    जीतनी बूंदे होती है
    तेरी उतनी ही तस्वीरे

    वाह बडी खूबसूरती से आपने इस ख्याल को शब्द दिये हैं. बहुत ही खूबसूरत.

    रामराम

  23. अप्रैल 7, 2009 at 6:33 पूर्वाह्न

    एक जरुरी सुझाव के लिये, आप चाहे तो आपका इमेल एडरेस मेरे कमेंट बाक्स मे छोड दे. वहां मोडरेशन on है, मैं उसे पबलिश नही करुंगा.

  24. mehek said,

    अप्रैल 7, 2009 at 7:53 अपराह्न

    tau ji hamne post update kar di hai,na jane vartani k isudharna kyun nahi dikh rahi,khair bahut shukran

  25. preeti tailor said,

    अप्रैल 8, 2009 at 12:13 अपराह्न

    kamalse alfaz aapke uski shanme kuchh farmate hai :

    bunde fisal jati bhale hatheli se ,
    ruh me vo tasvir si sama jaati hai,
    kabhi dikha na paun bhale tumhe,
    dilko to hamesha bhitarse bhiga jaati hai….

  26. अप्रैल 8, 2009 at 12:57 अपराह्न

    एक मद्धम से भाव की मद्धम सी अभिव्यक्ति ! सुन्दर !

  27. अप्रैल 8, 2009 at 3:47 अपराह्न

    बूँद में तुझे देखना
    खयाल अच्छा लगता है
    जितनी बूंदे होती है
    तेरी उतनी ही तस्वीरे

    नायाब…शुभकामनाएं.

    रामराम.

  28. hridyesh said,

    मई 25, 2009 at 6:52 पूर्वाह्न

    dil par lag gaye ……………….


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